अनदेखी:संक्रमण की रोकथाम में व्यस्त अफसर, माफिया जंगल साफ कर सबूत मिटाने ठूंठ में लगा रहे आग

बरेली6 महीने पहले
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  • वन अफसरों द्वारा कार्रवाई नहीं करने के कारण बेफिक्र बने माफिया

एक ओर जहां आक्सीजन की कमी के चलते कोरोना संक्रमित मरीज दम तोड़ रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर माफिया सबसे ज्यादा आक्सीजन देने वाले पेड़ों को जंगल से सफाया करने में लगे हुए हैं। वन अफसरों की अनदेखी ओर अन्य कर्मचारियों द्वारा इन वन माफियाओं को नजर अंदाज करने के कारण माफिया भी बेफिक्र बने हुए है।

वहीं दूसरी ओर कोरोना संक्रमण की रोकथाम में समस्त प्रशासनिक अमला दिन-रात लगा हुआ है ताकि संक्रमण पार काबू पाया जा सके। अफसरों की इसी व्यस्तता का पूरा फायदा लक्कड़ चोरों के द्वारा उठाया जा रहा है। परिणाम स्वरूप बाड़ी, बरेली के अंतर्गत आने वाले जंगलों में वन माफियाओं के द्वारा बेशकीमती सागौन की अंधाधुंध कटाई की जा रही है।

वन विभाग के कर्मचारी जिन्हें कि वन चौकियों पर तैनात रहना चाहिए था वह आज संक्रमण के डर से अपनी नौकरी करने की वजह घरों में दुबके बैठे हुए हैं। जिसके चलते अब तो लक्कड़ चोरों के कर्मचारी जंगल में खुले आम ही बड़े-बड़े पेड़ काट कर बेफिक्री के साथ जंगलों में ही सिल्ली, फरदा, पटिया, चरपट ओर पाए तैयार कर रहे हैं।

इन गांवों से लगे जंगल में ज्यादा हो रही चोरी : सिंघोरी अभ्यारण के अंतर्गत आने वाले ग्राम रमगड़ा, पाली डूंगरिया, डूढादेह, डगडगा, पनझिरपा, सेनकुंआ, केसलीं, करतोली, भगदेई आदि गांवों में विगत 2 महीने में बेतहाशा सागौन की कटाई की गई है। यही नहीं लाने लेे जाने की झंझ्ट से मुक्ति पाने जंगलों में ही बड़े पैमाने पर फर्नीचर तैयार किया जा रहा है।

लेकिन अफसर कार्रवाई की जगह अनदेखा कर रहे हैं जो समझ से परे है।
खेतों में तब्दील कर रहे जंगल : माफिया के द्वारा ने लगभग 200 से 300 एकड़ वन भूमि को साफ कर खेतों में तब्दील किया गया है। जिससे धीरे-धीरे यहां अतिक्रमण कर फसल की बोवनी शुरू करने की तैयारी है। यदि ऐसा होता है तो बाद में इन माफिया को यहां से हटाना मुश्किल हो जाएगा।

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