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  • Bari Medical In charge Told The Medicine To Be Fake, The Deputy Director Said The Results Of The Medicine Made With The Help Of Ayurveda Doctors Are Better

मतभेद:बाड़ी चिकित्सा प्रभारी ने दवा को बताया फर्जी, डिप्टी डायरेक्टर बोले- आयुर्वेद चिकित्सकों के सहयोग से बनी दवा के परिणाम बेहतर

बाड़ी8 दिन पहले
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  • बच्चों को पिलाई जाने वाली स्वर्ण प्राशन दवा को लेकर आयुर्वेद अफसरों में आपसी खींचतान

आयुर्वेद चिकित्सा विभाग द्वारा बच्चो की रोग प्रतिरोधक क्षमता के बढ़ने की बात कहते हुए उन्हें दो बूंद पिलाए जाने वाले स्वर्ण प्राशन काढ़ा को लेकर विभाग के ही अफसरों में आपसी खींचतान मची हुई है। मंगलवार को आयुर्वेद विभाग के बाड़ी चिकित्सालय प्रभारी डॉ.वीरेंद्र यादव ने दवा को लेकर कह दिया कि यह फर्जी तरीके से बच्चों को दी जा रही है। क्योंकि इस दवा पर ना ही किसी कंपनी का उल्लेख है और ना ही आवश्यक अन्य मानकों का उल्लेख। जिसको लेकर उन्होंने दवा को घातक भी बता दिया है।

वहीं आयुर्वेद विभाग के डिप्टी डायरेक्टर अनिल चंसोरिया का कहना है कि यह दवा आयुर्वेद चिकित्सकों के सहयोग से बनाई गई है, जो हैंडमेड जरूर है, लेकिन इसके रिजल्ट अच्छे हैं। ऐसे में इसे कैंप के रूप में लगाकर अधिक से अधिक सेवन कराया जा रहा है। कैंपों का आयोजन भामाशाह या एनजीओ के सहयोग से किया जा रहा है।

वहीं आयुर्वेद विभाग के ड्रग्स अधिकारी डॉ.डीडी शर्मा का कहना है कि यह दवा बच्चों को पिलाने के लिए बनाई है, लेकिन इस पर रेफर लगाकर पेश किया जा रहा है, जो गलत है। हमें किसी कम्पनी या बनाने वाले का प्रचार नहीं करना है। ऐसे में जिन चिकित्सकों ने इसे बनाया है और सेम्पल पेश किया है। उनको बुलाकर बात की जाएगी एवं नियम विरुद्ध होने पर कार्यवाही भी की जाएगी।

आप भी जानिए... स्वर्ण प्राशन दवा के क्या हैं फायदे

स्वर्ण धातु सभी धातुओं में सबसे श्रेष्ठ धातु मानी जाती है। स्वर्ण धातु शरीर के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण होती है। यह बच्चों के विकास तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ाने में सबसे अच्छा योगदान देती है। इन सभी कारणों से ही हजारों वर्षों के बाद भी आज स्वर्ण प्राशन का महत्व बना हुआ है।

आयुर्वेद के महान ऋषियों का मत था कि कैसे भी मानव शरीर में स्वर्ण (गोल्ड) की आवश्यकता अनिवार्य है। स्वर्ण प्राशन संस्कार से बच्चे के मानसिक और बौद्धिक क्षमता का विकास होता है। इसके द्वारा बालक के शरीर, मन, बुद्धि और वाणी का उत्तम विकास होता है।

स्वर्ण प्राशन संस्कार के पालन से बालक की बुद्धि, मन, बल एवं पाचन शाक्ति में तेजस्व की वृद्धि होती है। प्रतिदिन स्वर्ण प्राशन का सेवन अगर किसी अच्छे आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में किया जाये तो बालक तेजस्वी बनता है। 6 माह तक नियमित सेवन से बच्चे में स्मरण शाक्ति बढ़ोत्तरी होती है। बच्चा जो बाते सुनता है उसे वह हमेशा याद रहती है।

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