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दिक्कत:सिविल अस्पताल का भवन हुआ जर्जर, छत से गिर रहा है प्लास्टर, दुर्घटना का बना डर

बेगमगंजएक महीने पहले
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  • अस्पताल में डाॅक्टर-नर्सिंग स्टाफ की भी कमी, नहीं मिल रहा इलाज, सागर-रायसेन जाने को मजबूर

कहने को तो बेगमगंज में सिविल अस्पताल है, जिसमें मरीजों को भर्ती रखने के लिए 100 बिस्तर स्वीकृत है, लेकिन भवन में 30 बिस्तर तक लगाने की व्यवस्था नहीं है। इस अस्पताल का भवन जर्जर हो गया है, छत से हर कभी प्लास्टर टपक पड़ता है, जिससे स्टॉफ के साथ ही मरीज भी घायल हो चुके है। इतना ही नहीं अस्पताल में डाक्टर और नर्सिंग स्टॉफ की भी कमी बनीं हुई है। डाॅक्टर और नर्सिंग स्टॉफ पुराने भवन में बैठकर काम करने को मजबूर है।

जगह-जगह से चटकती दीवारें और छत से गिरता प्लास्टर कभी भी स्टाफ कर्मचारियों की जिंदगी पर भारी पड़ सकता है। बावजूद उसके जान हथेली पर रखकर कर्मचारी काम करने के लिए मजबूर हैं। ऐसे ही जर्जर भवन में प्रसुताओं व बच्चों को टीके लगाए जाते हैं। इमरजेंसी केसों में किराए के मकानों में निवास करने वाले डॉक्टर कर्मचारी भागते हुए आते हैं। अस्पताल डॉक्टर स्टाफ की भारी कमी है।

जी हां हम बात कर रहे हैं जिले की सबसे बड़ी तहसील बेगमगंज सिविल अस्पताल की जो स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी की गृह तहसील भी है। जहां अस्पताल परिसर में रहने के लिए डॉक्टर के लिए क्वार्टर नियम अनुसार नहीं है। समाजसेवी द्वारा मरीजों को बनवाए गए विश्रामगृह के कक्ष में या फिर कवेलू वाले जर्जर कक्षों में डॉक्टर रहते हैं। शेष दो किराए के मकान में निवास करते हैं। यही हाल नर्सों अन्य स्टाफ का भी है। दाई और चपरासियों के क्वार्टर्स भी जर्जर स्थिति को पहुंच चुके हैं। 4 कक्षों में नर्स रहती हैं, वह भी जर्जर हो चुके हैं।

बैठने व रहने के लिए चाहिए कक्ष: सिविल अस्पताल के हिसाब से 22 डॉक्टर, 50 स्टाफ नर्स सहित अन्य स्टाफ सहित 108 कर्मचारियों के लिए आवास की आवश्यकता पडेगी। उनके कार्य करने के लिए भी करीब दो दर्जन कक्षों की आवश्यकता सिविल अस्पताल में जरूरी है। वर्तमान में जिस पुराने भवन में कंप्यूटर ऑपरेटर बैठते हैं या टीके लगाए जाते हैं, वह काफी जर्जर हो चुका है । उसी से लगा हुआ कॉमेंट वार्ड भी है, उसकी स्थिति भी ठीक नहीं है। जगह-जगह से प्लास्टर झड़ रहा है।

ग्रामीण महिलाएं और प्रसूताएं होती हैं परेशान
नगर एवं ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को डिलेवरी के लिए अत्यधिक परेशान होना पड़ता है। महिला चिकित्सकों की कमी के चलते मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। महिला मरीजों में सबसे ज्यादा गर्भवती महिलाओं को परेशानी उठाना पढ़ती है। एकमात्र महिला डॉक्टर हैं, जिन्हें शासकीय कार्य के अलावा डिलेवरी केस भी देखना मजबूरी बना हुआ है। मरीजों के साथ आने वाले परिजनों को ठहरने के लिए भी कोई कक्ष नहीं है समाजसेवियों ने जो कक्ष बनवाया गया था उसमें ओपीडी चालू कर दी गई है।
वरिष्ठ कार्यालय को लिखा है
सिविल अस्पताल में डॉक्टर, स्टाफ व भवन की कमी के बारे में वरिष्ठ कार्यालय को लिखा जा चुका है। यहां स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ जाए तो लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती है।
डॉ. संदीप यादव, सीबीएमओ सिविल अस्पताल बेगमगंज

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