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आस्था का केन्द्र:गंगा-यमुना कुंड दो जिलों के लोगों की बुझा रहे प्यास, सिर्फ 4 फीट हैं गहरे

बेगमगंज13 दिन पहले
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  • झिरिया मंदिर में बने इन कुंडों का नहीं सूखता पानी
  • जबकि पास ही बना कुआं गर्मियों से पहले ही सूख जाता है

तहसील के ग्राम कोहनिया से दो किमी दूर विदिशा जिले की सीमा पर पहाड़ी स्थित झिरिया मंदिर रायसेन और विदिशा दोनों जिलों का आस्था का केन्द्र बना हुआ है। मंदिर प्रांगण पर स्थित गंगा यमुना के दो कुण्ड हैं जिनका जल स्तर कभी कम नहीं होता है, जबकि दोनों कुंडों की गहराई महज चार से पांच फीट ही है। इन दोनों कुंडों से आसपास के कई गांवों के ग्रामीण सहित जंगली जानवर अपनी व्यास बुझाते आ रहे हैं।

जबकि मंदिर के आसपास की दोनों पंचायतें सूखा ग्रस्त हैं। इस क्षेत्र में फरवरी माह से ही जल संकट शुरू हो जाता है। ऐसी स्थिति में लोग पानी के लिए परेशान रहते हैं। जब यह कुंड ग्रामीणों का सहारा बनते हैं लेकिन सोचने वाली बात यह है कि गंगा यमुना का जल आज तक कभी नहीं सूखा है और रोजाना प्रतिदिन सैकड़ों नागरिक और जंगली जानवर दोनों कुंडों से अपनी व्यास बुझा रहे हैं। झिरिया मंदिर के पुजारी रामदास त्यागी मंडलेश्वर बताते हैं कि गंगा यमुना का जल कभी नही सूखता है। पास में ही पचास फिट गहरा कुआं है जिसका जल सूख जाता है। गंगा यमुना कुण्ड के जल से चर्म रोग के मरीज सही हो जाते हैं और बड़ी बड़ी बीमारियों के मरीज भी सही हो रहे हैं।

राहतगढ़ के डाॅक्टर राजीव भाईजी भी गंभीर बीमारी से पीडि़त थे,लेकिन गंगा यमुना के जल ग्रहण करने से वह भी ठीक हो गएे हैं,उन्हीं के द्वारा नवीन मंदिर का काम कराया जा रहा है। इसके साथ ही पुजारी बाबा रामदास बताते हैं कि पहले के समय में बड़े-बड़े यज्ञ होते थे। इन्हीं दोनों कुंडों के जल से भंडारा बनता था।

नवाब हैदर अली ने दी थी मंदिर के लिए साठ बीघा जमीन
ग्राम पंचायत कोहनिया के सरपंच प्रतिनिधि संतोष यादव का कहना है कि झिरिया मंदिर का इतिहास काफी प्राचीन है।इस मंदिर पर माता हिंगलाज,रामजानकी और हनुमान जी महाराज का सिद्ध स्थल है। गंगा यमुना कुण्ड से आसपास के लोग प्यास बुझा रहे हैं। नवाबी शासक में हैदरगढ़ के नवाब हैदर अली ने मंदिर से लगान वसूलने के लिए दो बैल बुलवाए थे,लेकिन मंदिर के महंत ने देने से इंकार कर दिया था।

नाराज होकर स्वयं नवाब मंदिर बैल लेने आए लेकिन उन्हें बैलों के स्थान पर शेर बंधे मिले थे,उसी समय वह माता की महिमा समझ गए और पूजा प्रार्थना करने के बाद नवाब गंज गांव स्थित की साठ बीघा जमीन मंदिर के लिए दान में दी थी। वह जमीन आज भी मंदिर की है जो ग्यारसपुर तहसीलदार के अधीन है।

ग्यारसपुर निवासी प्रेमनारायण साहू कहते हैं कि मकर संक्रांति पर मंदिर पर मेला का आयोजन होता है,जिसमें हजारों की संख्या में दूर-दूर के इलाकों से लोग गंगा यमुना के जल को ग्रहण करने लिए आते हैं। इसके साथ ही जल भरकर ले जाते हैं। ग्यारसपुर तहसीलदार सुनील शर्मा का कहना है कि झिरिया मंदिर की साठ बीघा जमीन है,जिससे हर साल नीलामी में कोली दी जाती है,जो भी राशि आती है उसे शासन के कोष में जमा की जाती है। मंदिर के पुजारी को पांच हजार रुपए माह दिया जाता है।

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