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श्रमिकों का मोहभंग:अस्पताल की योजनाओं का नहीं मिल रहा है लाभ

बेगमगंजएक महीने पहले
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  • अस्पताल से अधिकारी और दवाइयां दोनों गायब

गांधी बाजार में केंद्र सरकार के सहयोग से श्रमिक अस्पताल संचालित की जा रही है, यहां पर श्रमिकों को योजनाओं का लाभ इसलिए नहीं मिल पा रहा है कि अस्पताल में अधिकारी मिलते ही नहीं हैं और तो और मरीजों को दवाएं भी उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। केंद्र सरकार द्वारा संचालित होने के कारण प्रशासनिक अधिकारियों को ही पता नहीं है कि श्रमिक अस्पताल किस तरह से संचालित हो रहा है।

कभी किसी अधिकारी ने वहां पहुंचकर निरीक्षण ही नहीं किया और ना ही मजदूरों की समस्याओं को जाना है। यही कारण है कि यहां पर पदस्थ कर्मचारी डॉक्टर अपनी मर्जी से अस्पताल संचालित कर रहे हैं। जिस कारण मजदूरों का इस अस्पताल से मोहभंग हो गया है।

श्रमिक अस्पताल में मजदूरों के बच्चों को अच्छे अंक पाने पर मिलने वाली छात्रवृत्ति हो या फिर कैंसर टीवी के मरीजों को दी जाने वाली सहायता हो या दवाएं अथवा बीड़ी मजदूरों को मिलने वाली सुविधाएं कागजों पर संचालित हो रही हैं।
पीड़ितों की मांग बीड़ी श्रमिकों अथवा अन्य प्रकार का श्रम करने वालों मे क्रमश: इसहाक अली, घनश्याम प्रसाद, नियाज अली, राधेलाल, निर्भय सिंह, कमल रानी कैलाश रजक रामस्वरूप शिल्पकार पप्पू खान ने कलेक्टर उमाशंकर भार्गव से श्रमिक अस्पताल की व्यवस्थाएं सुधरवाने की मांग की है।

चलित चिकित्सा वाहन भी दो वर्षों से है नदारद
श्रमिक अस्पताल में पूर्व में एक चलित चिकित्सा वाहन था, जो आरक्षण के आंदोलन की भेंट चढ़ गया था। उसके बाद सागर या भोपाल से चलित चिकित्सा वाहन आता था, जो ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर श्रमिकों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराता था।

लेकिन गत दो वर्षों से वह भी किसी को नजर नहीं आया है। श्रम विभाग के इंस्पेक्टर यहां आकर कभी इसका निरीक्षण भी नहीं करते और ना ही मजदूरों के हक में मिलने वाली योजनाओं की समीक्षा करते हैं कि उन्हें कितना लाभ मिला या नहीं।

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