सुविधाएं नहीं:35 महिलाओं के हुए ऑपरेशन, इसके बाद उनके परिजन ही उन्हें संभालते हैं

चंदेरीएक महीने पहले
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ऑपरेशन के बाद महिलाओं को स्टेचर पर लेटाकर थिएटर से बाहर लाते परिजन। - Dainik Bhaskar
ऑपरेशन के बाद महिलाओं को स्टेचर पर लेटाकर थिएटर से बाहर लाते परिजन।
  • नसबंदी शिविर में महिलाओं के परिजन ही अटेंडर, वार्ड तक लाने स्ट्रेचर भी उठाते हैं

सिविल अस्पताल में सोमवार को महिला नसबंदी शिविर का आयोजन किया गया। इसमें 35 महिलाओं के नसबंदी ऑपरेशन किए गए। शिविर में ऑपरेशन के पहले महिलाओं की जांच विशेषज्ञ डॉक्टरों ने की। इसके बाद 35 महिलाओं के नसबंदी ऑपरेशन किए गए। शिविर में अस्पताल द्वारा सुविधाएं नहीं मिलने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऑपरेशन के लिए आने वाली महिलाओं द्वारा न तो सोशल डिस्टेंस का पालन किया जाता है और न हो कोविड गाइडलाइन का पालन किया जाता है। अस्पताल में ऑपरेशन के लिए आई महिलाओं और उनके अटेंडरों ने मास्क भी नहीं लगाया था। बीएमओ डॉक्टर खरका ने बताया कि ऑपरेशन के पहले नसबंदी कराने वाली महिलाओं की जांच की गई। इसके बाद उनका इलाज भी किया गया। उन्होंने लोगों से कहा कि परिवार की अच्छी आर्थिक स्थिति के लिए सभी लोग परिवार नियोजन को अपनाएं। साथ ही जनसंख्या नियंत्रण में अपना योगदान दे। ऑपरेशन कराने वाली महिलाओं को शासन की ओर से 1400 रुपए प्रोत्साहन राशि दी जाती है जो ऑपरेशन के बाद उनके खाते में डाल दी जाती है।

शिविर में कुछ महिलाओं के साथ एक ही परिजन आता तो दूसरों की लेनी पड़ती है मदद
अस्पताल में नसबंदी ऑपरेशन कराने के लिए आने वाली महिलाओं को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अस्पताल में कर्मचारियों की कमी के चलते मरीजों को परेशानी होती है। ऑपरेशन कराने के लिए आने वाली महिलाओं के साथ एक-दो लोग ही आते हैं। ऐसे में ऑपरेशन के बाद महिलाओं को ऑपरेशन थिएटर से बाहर लाने में परिजनों को दूसरी महिलाओं के साथ आए लोगों की सहायता लेना पड़ती है। ऐसे में लोगों को महिलाओं को वार्ड में ले जाने में भारी परेशानी होती है। मरीजों के परिजनों को महिलाओं को स्वयं स्टे चर पर डालकर वार्ड में ले जाना पड़ता है। ऐसे में उन्हें भारी दिक्कत होती है।

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