पंचकल्याणक महोत्सव:जिस घर में मुनिराज के आहार नहीं हुए हों वह घर श्मशान भूमि के समान : मुनि निर्णय सागर

चंदेरीएक महीने पहले
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पंच कल्याणक महोत्सव में मुनिश्री के प्रवचनों को सुनते समाजजन। - Dainik Bhaskar
पंच कल्याणक महोत्सव में मुनिश्री के प्रवचनों को सुनते समाजजन।
  • ज्ञान कल्याणक, राजा श्रेयांश के चौके में हुए मुनि वृषभ सागर के आहार

जैन मुनि रत्नात्रय की आराधना में लगे रहते हैं, और तपवृद्धि एवं रत्नात्रय की रक्षा के लिए 24 घंटे में एक बार खड़े होकर शुद्ध प्रासुक आहार जल ग्रहण करते हैं। यही कारण है कि वह आहार के लिए श्रावक के चौके तक जाते हैं। वह श्रावक अपने आपको पुण्यशाली मानता है, इसके चाक में मुनिराज के चरण पड़ते हैं। शास्त्रों में उल्लेख है जो सम्यकदृष्टि श्रावक मुनिराज को नवधा भक्तिपूर्वक आहार कराता है। वह नियम से भोगभूमि का जीव बनता है। वह घर पवित्र हो जाता है और जिस घर में मुनिराज के आहान न हुए हों, वह घर शमशान की भूमि के समान कहा है।

मुनिराज को आहार दान देने के लिए पडगाहन अपने भरत चक्रवर्ती भी अपने परिवार के साथ अपने महल के बाहर खड़ा होता है। उक्त प्रवचन मुनिश्री निर्णय सागर जी महाराज ने दिए। मुनिश्री ने कहा कि युग के आदि में बृषभसागर मुनिराज ने मोक्षमार्ग कैसा होता है, उसका दिग्दर्शन कराया। साथ ही यह मुनिधर्म पंचम काल के अंत तक चलता रहे। श्रावक अपना पापकर्म धोकर पुण्यार्जन कर सके। इसलिए वह आहार के लिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि अपने हाथ से दिया हुआ दान ही फलित होता है और अनुमोदना का फल भी उसी रूप में मिलता है। अत: दान अपने हाथ से देना चाहिए। किसी से दिलव नहीं चाहिये।

आज जिनका हम ज्ञानकल्याणक मना रहे हैं, ऐस वृषभनाथ भगवान दीक्षा के बाद मुनि अवस्था में जब आहार को उठे, उसके बाद भी उन्होंने 7 माह 13 दिन तक विधि नहीं मिली क्योंकि उस समय श्रावक नवधाभक्ति नहीं जानते थे। आदि पुराण में इसका उल्लेख आया कि जब वह हस्तिनापुर पहुंचते हैं, और विधि नहीं मिलती तब राजा श्रेयांश इतने संक्लेश से घिर जाते हैं कि उसी समय उन्हें पूर्व भव का जाति स्मरण होता है, तब नवधाभक्ति पड़गाहन करके आहारदान दिया।

मुनिराज के प्रवचनों को सुनने बड़ी संख्या में पहुंचे समाज के लोग

राजा श्रेयांश के चौके में हुई आहारचर्या

मंगलवार सुबह पंचकल्याण महोत्सव में तप कल्याणक की पूजन हुई। इसके बाद महामुनि बृषभसागर महाराज की आहार चर्या हुई। आहार चर्या कराने का सौभाग्य पंचकल्याणक में राजा श्रेयांस एवं राजा सोम बने परिवार को मिला। इसके अलावा समाज के अन्य लोगों को भी आहार चर्या में शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इसके लिए पांडाल में एक विशाल चौका लगाया गया था। इसमें प्रमुख पात्रों के साथ कई लोगों को मुनिराज को आहारदान देने का लाभ प्राप्त हुआ।

19 दिसंबर को विमान उत्सव

श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में पंचकल्याणक महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। पंच कल्याणक महोतसव आचार्य श्री विद्यागसार जी के परम प्रभावक शिष्य मुनिश्री निर्णय सागर जी महाराज, मुनिश्री पदम सागर जी महाराज, मुनिश्री विष्वाक्ष सागर जी महाराज, ऐलक श्री क्षीर सागर जी महाराज के सानिध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य पं. विमल शौर्या, वर्धमान शौर्या के निर्देशन मं चल रहा है। शहर में 19 दिसंबर को चंदेरी विमान उत्सव का कार्यक्रम मुनिश्री के सानिध्य में होगा।

समवशरण में श्रावकों की जिज्ञासाओं का किया समाधान

पंच कल्याणक महोत्सव में ज्ञान कल्याणक मनाया गया। ज्ञान कल्याणक महोत्सव की मंत्र आराधना, तिलकदान, मुखोउद्घाटन, प्राण प्रतिष्ठा, सूरिमंत्र, केवलज्ञान उत्पत्ति की क्रियाएं हुईं। तत्पश्चात भगवान का विशाल समवशरण लगा। समवशरण में गणधर के रूप में तीनों महाराज ने समोशरण में विराजमान होकर श्रावकों की जिज्ञासाओं का समाधान किया।

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