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  • Age...76, Twice Brain Stroke, Then Corona, Lung Infection In CT Scan, Admitted To Medical College For 10 Days, Returned Home If Not Completely Well, Completely Healthy With Favorable Environment And Care

मंडे पॉजिटिव:उम्र...76, दो बार ब्रेन स्टोक, फिर कोरोना, सीटी स्कैन में फेंफड़ों में संक्रमण , मेडिकल कॉलेज में 10 दिन भर्ती रहे, पूरी तरह ठीक नहीं तो घर लौटे, अनुकूल माहौल और देखरेख से पूरी तरह स्वस्थ

गंजबासाैदा23 दिन पहलेलेखक: गोविंद नायक
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76 वर्षीय चिदानंद महाराज उर्फ वीरेंद्र कुमार जैन  कोरोना से जीते। - Dainik Bhaskar
76 वर्षीय चिदानंद महाराज उर्फ वीरेंद्र कुमार जैन कोरोना से जीते।
  • हर परिवार की नींव हैं हमारे बुजुर्ग, जिन्होंने संक्रमण जैसी महामारी से हार नहीं मानी...और परिजनों ने उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ा तो आज वे साथ

कोरोना में कई लोगों ने अपने मजबूत हौसलों का परिचय दिया है। इन हौसलों की दम पर कई बुजुर्ग आज अपनों के साथ है। एक जीत की कहानी हैं 74 वर्षीय वीरेंद्र कुमार जैन तो दूसरी 90 साल की रुक्मणी बाई रघुवंशी की, जिन्होंने बीमार होने पर भी हार नहीं मानी।... पढ़िए दो घर की नींव(हमारे बुजुर्ग) की कहानियां...

5 अप्रैल को धार्मिक मेले में हुए संक्रमित

जब मनुष्य में जीने का हौसला हो तो बड़ी से बड़ी बीमारी भी उसके आगे हार जाती है। इसी तरह का उदाहरण नगर के 76 वर्षीय चिदानंद महाराज उर्फ वीरेंद्र कुमार जैन ने पेश किया है। 6 माह पहले दो बार ब्रेन स्टोक। 5 अप्रैल को मुंगावली के सिद्ध तीर्थ क्षेत्र निसही के फाग फूलना धार्मिक मेले में संक्रमित हुए। दो दिन घर पर उपचार के दौरान बुखार 102 दो डिग्री से कम नहीं हुआ। जांच में कोरोना संक्रमित पाए गए। सीटी स्कैन जांच में 19 स्कोर का फेंफड़ों में संक्रमण मिला। उनको परिजनों ने तत्काल अटल बिहारी मेडिकल कालेज में भर्ती कराया। 10 दिन तक मेडिकल कालेज में उपचार कराया लेकिन पूरी तरह वहां भी ठीक नहीं हो पाए। उनके कहने पर परिजन उनको वापस घर ले आए। डाक्टर की देखरेख में उपचार किया और अनुकूल वातावरण मिला। अब वे पूरी तरह स्वस्थ हो गए हैं।

डरे नहीं, अस्पताल के भरोसे नहीं छोड़ा

चिदानंद महाराज के पुत्र संजीव जैन बताया कि उन्होंने पिता को मेडिकल काॅलेज के भरोसे नहीं छोड़ा। लोग संक्रमण के डर से परिजनों से मिलने से कतराते थे लेकिन वह उनके साथ रहे। उन्होंने इस दौरान अपने पिता को समय पर दवाएं, पौष्टिक आहार दिया। वह कहीं चले जाते तो उनकी अनुपस्थिति में उनका पुत्र हर्ष देखभाल करता। चिदानंद कहते हैं अस्पताल के हालात देखकर वह बिलकुल भी विचलित नहीं हुए। सोचा जीवन मृत्यु अटल सत्य है।

उम्र....90, ऑक्सीजन लेवल आया 80 पर, अस्पताल नहीं गई, बेटे बहू, पोते उनसे मोबाइल पर चौपाई सुनते रहे, अकेला नहीं छोड़ा

गमाकर गांव में 90 साल की रुक्मणी बाई रघुवंशी की तबियत बिगड़ने पर उनके बेटों ने जांच कराई। जांच पॉजिटिव आई। ऑक्सीजन लेवल 80 पाया गया। डाक्टरों ने उनको तत्काल विदिशा मेडिकल काॅलेज में भर्ती कराने की सलाह दी लेकिन उन्होंने अस्पताल में भर्ती होने से यह कहते हुए मना कर दिया कि उनको कुछ नहीं होगा। घर पर ही दवा खाकर ठीक हो जाएंगी। परिजनों ने डाक्टर संकुल जैन से संपर्क किया। उनका उपचार घर पर ही प्रारंभ कराया। कमरे में पहली बार अकेला रहना उनको तनिक भी अच्छा नहीं लग रहा था क्योंकि वह न कभी अकेली रहीं और न ही उम्र को देखते हुए कामकाज करना बंद किया। वह अकेले में भी भजन करती रहती।

दादी कहती थी कुछ नहीं हुआ

बेटे राजेश, महेंद्र, अशोक सिंह और पोते सौरभ, मोहित, अनुज, संजय दिन भर बारी बारी से मोबाइल पर बात करते उनको रामायण की चौपाई सुनाते और उनसे भी कहानी किस्से सुनते। उन्होंने कभी रुक्मणी बाई को अकेलेपन का एहसास नहीं होने दिया। टाइम पर दवा भोजन दूध फल देते रहे। अब उनका ऑक्सीजन लेवल भी 97 हो गया है और वे पूरी तरह स्वस्थ हो गई हैं। पोते कहते हैं कि दादी ने हमेशा कहती रही उनको कुछ नहीं हुआ। कोरोना से नहीं हारूंगी।

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