परंपरा:12 गांव की 51 किमी की परिक्रमा के बाद तोड़ा मौन व्रत‎

गंजबासौदा‎एक महीने पहले
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‎परिक्रमा के दौरान कमर में मोर पंख बांधकर नृत्य करते ग्वाले।‎ - Dainik Bhaskar
‎परिक्रमा के दौरान कमर में मोर पंख बांधकर नृत्य करते ग्वाले।‎
  • परमा को कारस देव मंदिर से पूजा के बाद ग्वालों की टोली एक दिन न बोलने की लेती है शपथ‎

दीवाली के एक दिन बाद परमा को वार्ड 2 स्थित कारस देव‎ मंदिर से पूजा अर्चना के बाद ग्वालों की टोली एक दिन का मौन‎ व्रत रखने का संकल्प लेकर नंगे पैर गांवों की परिक्रमा की।‎

ग्वालों की टोली ने शुक्रवार सुबह 9 बजे गंगा जल पीकर मौन‎ व्रत की शपथ ली। 12 गांव की 51 किलोमीटर की परिक्रमा कर‎ शाम को उसी मंदिर प्रांगण में कारस देव की पूजा अर्चना के बाद‎ मौन व्रत तोड़ा इस साल ग्वालों की टोली में बच्चे भी मोर पंख‎ और घंटियां लेकर साथ निकले। ग्वालों के दल ने हरदूखेड़ी,‎ स्वरूप नगर, परसोरा, बेहलोट, भड़ेरू, रबरयाई, हतोड़ा, हरिपुर,‎ बेदनखेड़ी, गंज, पचमा, खरपरी गांव की परिक्रमा की। ग्रामीणों ने‎ दही, मट्ठा, दूध आदि पिलाकर टोली के सदस्यों का स्वागत‎ किया।उनको तिलक कर विदा किया। ग्वालों की टोली दिन भर‎ एक से दूसरे गांव तक दौड़ती रही। कोई भी सदस्य न रास्ते में‎ रुका न किसी को रुकने दिया। ग्वालों की यह परंपरा नगर में‎ पिछले 152 सालों से चली आ रही है।‎

पूरे आयोजन का उद्देश्य गो - पूजन का महत्व बताना‎
पूरा आयोजन गो पूजन और संरक्षण से जुड़ा है। परमा के दिन पालक‎ अपनी अपनी गायों को नहाने के बाद उनके सींग और बदन को रंगों से‎ रंगते हैं। गले में घंटी और घंटा पहनाकर सजाते हैं। ग्वाले भी गांवों में‎ पहुंचकर गायों का पूजन करते हैं। इस धारणा के साथ वह भगवान गोवर्धन‎ नाथ की पूजन कर रहे हैं।‎

नियम... एक बार व्रत लिया तो 12‎ साल तक रखना पड़ता है मौन‎
कारस देव मंदिर प्रमुख वयोवृद्ध राम गोपाल‎ यादव ने बताया कि यह कार्यक्रम ग्वालों‎ द्वारा प्रत्येक साल परमा के दिन आयोजित‎ किया जाता है वह यह मानकर निकलते हैं‎ कि गोवर्धन परिक्रमा कर रहे हैं। लगातार हर‎ 11 साल तक ऐसी परिक्रमा कर मान लेते हैं।‎ उनकी चौरासी कोस की परिक्रमा हो गई है।‎

आखरी साल वृंदावन जाकर गोवर्धन की‎ पूजा करते हैं। इसके बाद परिक्रमा शपथ से‎ मुक्त हो जाते हैं। इसकी सबसे खास बात‎ यह है कि जो सदस्य एक बार इस दल में‎ मौन व्रत लेता है उसे लगातार 12 साल तक‎ इस आयोजन में शामिल होता है। इस साल‎ दल में बच्चों ने भी मौन व्रत लिया।‎

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