पारासरी विश्राम घाट की काया पलट:मुक्ति धाम में 12 ज्योतिर्लिंगों के नाम पर बनेंगे मंदिर नुमा शेड, जटाओं से निकली धारा से स्नान

गंजबासौदा9 महीने पहलेलेखक: गोविंद नायक
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  • पारासरी विश्राम घाट की काया पलट जन सहयोग से, समाजसेवी ने उठाया बीड़ा
  • प्रशासक और सीएमओ की मंजूरी के इंतजार में है सड़क का प्रस्ताव
  • दो महिलाओं ने एक लाख रुपए नकद सहयोग के रूप में दिए

जिले का सबसे सुंदर और सनातन संस्कृति पर आधारित सुविधाजनक मुक्ति धाम नगर में बनाने के लिए निर्माण कार्य प्रारंभ हो गया है। करीब डेढ़ बीघा जमीन पर बने पारासरी विश्राम घाट की काया पलट जन सहयोग से करने के लिए समाजसेवी विकास पचौरी द्वारा बीड़ा उठाया गया है। इसका थ्रीडी नक्शा जारी किया गया है।

इसी नक्शे के आधार पर मुक्ति धाम पर निर्माण कार्य चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा। संकल्प को पूरा करने के लिए पिछले तीन सप्ताह से कार्य चल रहा है। अभी तक जन सहयोग के लिए दो महिलाओं ने एक लाख रुपए नकद सहयोग के रुप में दिए हैं। इस कार्य में सहयोग सुझाव के लिए नागरिकों की बैठक रखी जा रही है। जिसमें उनके विचार जाने जाएंगे।

शिव की प्रतिमा के चरणों में रखेंगे शव
पारासरी विश्राम घाट को सुंदर बनाने के लिए जो प्लानिंग की गई है। उसके तहत मुक्ति धाम दो भागों में बांटा गया है। अगले भाग को पार्क बनाया जाएगा। पिछले भाग में मुक्ति धाम रहेगा। दोनों भागों के बीच आरसीसी की बाउंड्रीवाल रहेगी। मुक्ति धाम में जहां दाह संस्कार से पहले शव रखा जाएगा वहां विशाल शिव प्रतिमा बनाई जा रही है। प्रतिमा के चरणों में शव को रखा जाएगा। भगवान भोले की जटा से निकली जल धारा से उसका स्नान होगा। दाह संस्कार के लिए 12 शेड मंदिर आकार के बनाए जाएंगे। प्रत्येक का नाम 12 ज्योर्तिंलिगों के नाम पर होगा।

प्रशासन का कोई नहीं सहयोग
पचौरी ने बताया कि इस कार्य के लिए प्रशासनिक सहयोग उतना नहीं मिल रहा जितनी अपेक्षा की जा रही थी। यदि प्रशासन का सहयोग मिले तो काम गति पकड़ सकता है। चुकी कोई भी नया कार्य प्रारंभ होता है। कई प्रकार की दिक्कतें आती हैं लेकिन बासौदा भामाशाहों और दानदाताओं की नगरी मानी जाती है। इसी को केंद्रित कर यह लक्ष्य पूरा होगा। इसी क्रम में सरोज माथुर, शशी माथुर ने एक लाख रुपए पूर्व नपाध्यक्ष कंछेदीलाल जैन ने 150 बोरी सीमेंट दिया है। सड़क का प्रस्ताव नपा में है वह प्रशासक और सीएमओ की स्वीकृति के लिए पड़ा है।

यह है उद्देश्य
एक कमरे में सेवा सामग्री, दूसरे में लकड़ी, तीसरे में कंडे

जिस शेड में जिस व्यक्ति का अंतिम संस्कार होगा। उस दौरान लोगों की मानसिकता रहे दाह संस्कार के लिए उसे किस ज्योतिलिंग का आर्शीर्वाद मिला है। इसके साथ ही वहां नहाने और प्रसाधन के लिए भी व्यवस्था की जाएगी। इसके अतिरिक्त वर्तमान में जो आरसीसी का हाल लोगों के बैठने बनाया गया था उसमें पार्टीशन बनाकर तीन कमरे बनाए गए हैं। एक कमरे में सेवा सामग्री अंतिम संस्कार वाली रहेगी। दूसरे में लकड़ी तीसरे में कंडे रखे जाएंगे।
मुक्ति धाम में पार्क का भी कराया जाएगा निर्माण
मुख्य प्रवेश द्वार से सीधी सड़क मुक्ति धाम तक प्रस्तावित है। जबकि अगले भाग को पार्क बनाया जाएगा। इससे लोग उसमें टहल या बैठ सकें। यह दोनों अलग अलग रहेंगे। वर्तमान परिसर का पूरा नहीं नक्शा बदल दिया गया है। पहले परिसर को सुरक्षित करने बाउंड्रीवाल का निर्माण कराया जा रहा है। इसके बाद जैसे जैसे जनसहयोग मिलेगा निर्माण चलता रहेगा।

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