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  • 14th Poorest District Of The State Guna; Ashoknagar Rajgarh The Situation Is Worse In Better Villages Than Us, 56 Percent People Are Living In Poverty.

जिले के 45.7% लाेग गरीब:प्रदेश का 14वां सबसे गरीब जिला गुना; अशाेकनगर-राजगढ़ हमसे बेहतर गांवाें में हालात और ज्यादा खराब, 56 प्रतिशत लोग गरीबी में जीवन जी रहे

गुना2 महीने पहले
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नीति आयोग ने मल्टी डायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स (बहुआयामी गरीबी सूचकांक) के आधार पर अपनी रिपोर्ट जारी की है। इसमें हमारा गुना प्रदेश के 51 में से 14वां सबसे गरीब जिला आंका गया। आयोग ने अपने सूचकांक के संदर्भ में 45.7 फीसदी आबादी को गरीब माना है। शिक्षा, स्वास्थ्य और रहन-सहन के आधार पर यह आकलन किया गया है। हैरानी की बात यह है कि गुना की हालत पड़ोसी जिले अशोकनगर से भी बदतर है। अशोकनगर को 17वीं रैंक मिली है और वहां की 42.8 फीसदी आबादी गरीब मानी गई। राजगढ़ की हालत और भी बेहतर है, क्योंकि वहां 41.99 फीसदी आबादी ही गरीब मानी गई। हम अपने एकमात्र पड़ोसी जिले शिवपुरी से मामूली बेहतर स्थिति में है। वहां हमसे ज्यादा गरीब लोगों की संख्या 0.4 फीसदी ज्यादा है।

नीति अायाेग की रिपाेर्ट... स्वास्थ्य, शिक्षा और रहन-सहन के आधार पर किया गरीबी के स्तर का आकलन

इन तीन बिंदुओं के आधार पर तैयार की गई रिपोर्ट

1. स्वास्थ्य : इसमें पोषण, शिशु-मातृ मृत्यु दर और प्रसव पूर्व देखभाल के आंकड़ों को आधार बनाया गया। 2. शिक्षा : इसमें यह देखा गया कि किसी परिवार में 10 साल या इससे अधिक आयु के व्यक्ति ने कम से कम 6 साल की स्कूली शिक्षा ली या नहीं। इसके अलावा ऐसे बच्चों की संख्या कितनी है जो 12 साल की आयु होने के बावजूद एक दिन भी स्कूल नहीं गए। 3. रहन-सहन का स्तर : इसमें सात बातों को देखा गया, इसमें भोजन बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ईंधन, स्वच्छता, पेयजल, बिजली, मकान की स्थिति, सम्पत्ति और बैंक एकाउंट।

गरीबों में भी गरीबी का स्तर अलग-अलग

गांव-शहर : शहर और गांव में गरीबी के बीच अंतर नहीं बल्कि खाई है। जिले के गांव में 56.12 फीसदी लोग नीति आयोग के सूचकांकों के आधार पर गरीब पाए गए। जबकि शहर में सिर्फ 15.13 फीसदी इस श्रेणी में हैं।

गरीबों में भी गरीब : जिले में कुल 45.7 फीसदी लोग गरीब हैं लेकिन इनमें भी 47.31 फीसदी बहुत ज्यादा गरीब हैं। यानि उनके गरीबी स्तर अन्य गरीबों से भी नीचे हैं।

15 दिन के भीतर दूसरी निराशाजनक रिपोर्ट

बीते 15 दिन में यह दूसरी रिपोर्ट है, जिसमें जिले की तस्वीर निराशाजनक है। हाल ही में परिवार स्वास्थ्य सर्वे 5 की रिपोर्ट में गुना ऐसे जिलों में शामिल रहा, जहां लिंगानुपात बहुत खतरनाक तरीके से असंतुलित हो गया। महिला स्वास्थ्य को लेकर जिले की हालत में बीते 5 साल के दौरान कोई खास सुधार नहीं आया। उज्जवला, स्वच्छ भारत जैसी योजनाओं के बावजूद लोगों के रहन-सहन के स्तर पर कोई क्रांतिकारी बदलाव नहीं आया।

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