कोरोना में भी बाज नहीं आ रहे निजी अस्पताल:भर्ती तीन मरीजों की बजाय 12 के लिए ऑक्सीजन मांग रहा निजी अस्पताल; कलेक्टर ने जांच के लिए कमेटी बनाई

गुना6 महीने पहले
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कोरोना की इस भयावह स्थिति से जूझते हुए नागरिकों के लिए निजी अस्पताल भी चुनौती बने हुए हैं। वे लगातार कोरोना के इलाज की आड़ में पैसा बनाने में लगे हुए हैं। ऐसा ही एक मामला उस समय सामने आया जब एक निजी अस्पताल द्वारा तीन मरीजों की जगह 12 मरीजों को ऑक्सीजन की जरुरत बताकर प्रशासन से ऑक्सीजन लेता रहा। कोरोना संक्रमण काल में मरीजों को भर्ती कर शासन तक गलत जानकारी देकर मनमाने ऑक्सीजन सिलेण्डर मांगने, मरीजों से इलाज के नाम पर मनमाना पैसा मांगने की शिकायत शहर के बालाजी हॉस्पिटल के संचालक के लिए गले की फांस बन सकती है। संभावना ये है कि इस हॉस्पिटल पर प्रशासन गुरुवार को बड़ी कार्रवाई भी कर सकता है। फिलहाल कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम ने मनमाना पैसा वसूलने और कोरोना मरीजों की सही जानकारी न देकर गलत देने आदि की लगातार शिकायतें पहुंच रही थी। इसी बीच देर शाम बालाजी हॉस्पिटल में ऑक्सीजन खत्म बताकर मरीजों से अस्पताल खाली कराए जाने खबर सोशल मीडिया पर चली। इसको भी कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम ने गंभीरता से लिया और जांच के लिए दो सदस्यीय कमेटी बनाई है। इस पूरे मामले में गुरुवार को कलेक्टर ने जांच कमेटी से रिपोर्ट मांगी है।

बालाजी हॉस्पिटल में ऑक्सीजन खत्म का मामला सोशल मीडया पर चलने पर कलेक्टर ने एसडीएम अंकिता जैन को मौके पर भेजा तो मालूम पड़ा कि उस हॉस्पिटल के पास ऑक्सीजन पर्याप्त है। वहां शासकीय आंकड़ों के अनुसार तीन कोरोना मरीज भर्ती है, लेकिन हॉस्पिटल प्रबंधन द्वारा तीन की जगह 12 मरीजों के हिसाब से ऑक्सीजन सिलेण्डर की मांग कर रहा था। इस तरह का मामला सामने आने पर कलेक्टर ने नाराजगी जाहिर की और एसडीएम अंकिता जैन और सीएमएचओ की एक जांच कमेटी बनाकर रिपोर्ट देने को कहा है।