इस तरह गोदाम के सामने खाद के लिए लगी लोगों:प्रवेश के 4 माह गुजरे,पर छात्रों को किन किताबों से पढ़ना है, पता नहीं

गुनाएक महीने पहले
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छात्रों को उच्च शिक्षा में प्रवेश लिए लगभग 4 माह गुजर चुके हैं, लेकिन अभी तक छात्रों को पढ़ाई के लिए कॉलेज प्रशासन से मिलने वाली किताबों एवं स्टेशनरी का वितरण नहीं किया गया है। किताबें नहीं मिलने से कालेज में अध्यापन कार्य प्रभावित हो रहा है। प्राध्यापक बिना किताब कॉलेज में क्लास में लेने को मजबूर हैं और पुरानी किताबों से पढ़ाने को मजबूर हैं। वहीं अनुसूचित जाति-जनजाति के छात्रों को शासन की तरफ से निशुल्क स्टेशनरी का वितरण नहीं किया है। छात्राें की इन समस्याओं को लेकर छात्र संगठन एआईडीएसओ ने कलेक्टर को ज्ञापन देकर समस्या के निवारण की मांग की। कॉलेज इकाई अध्यक्ष राधेश्याम चंदेल ने का कहना था कि कि जब छात्रों से प्रवेश शुल्क व परीक्षा शुल्क पूरा जमा किया जाता है तो छात्रों को पढ़ने के लिए किताबें क्यों उपलब्ध नहीं कराई जाती जो कि कॉलेज प्रशासन की ही जिम्मेदारी है। अगर छात्र परीक्षा फॉर्म भरने में 1 दिन भी लेट हो जाता है तो छात्र से विलंब शुल्क वसूल किया जाता है लेकिन जब कॉलेज प्रशासन किताबें उपलब्ध कराने में 4 माह लेट हो तब इसके खामियाजा कौन भुगत रहा है? \"नई शिक्षा नीति-2020\" में विषय चुनने की सीमा समाप्त कर दी है।

पसंद के विषय की उपलब्ध नहीं है किताबें अब छात्र अपनी पसंद की कोई भी विषय पढ़ सकता है लेकिन जब पढ़ने के लिए कॉलेज में आता है अब उसे मालूम चलता है कि जो विषय उसने पढ़ने के लिए चुने हैं वो किताबें पुस्तकालय में ही उपलब्ध नहीं है तब पढ़े कैसे? अनुसूचित जाति जनजाति के छात्रों को शासन की तरफ से निशुल्क स्टेशनरी का वितरण किया जाता रहा है लेकिन अभी पिछले 2 वर्षों से नहीं किया गया है लेकिन छात्रों से जरूर पूरी वसूल की जाती रही है। अभी 2 महीने बाद छात्रों की परीक्षाएं आ जाएंगी लेकिन किताबें अभी तक नहीं आई है तब छात्रों के सामने किताबों के अभाव में पढ़ाई करने का संकट खड़ा हो गया है। जिला प्रशासन के द्वारा ज्ञापन प्राप्त कर जब कॉलेज प्राचार्य से बात की गई तब पता चला की अजाजजा के छात्रों को किताबें वितरित करने के निर्देश शासन ने जारी नहीं किए हैं। एआईडीएसओ ने कहा है कि अगर जल्द ही उक्त समस्या का समाधान नहीं हुआ तो छात्र तेज आंदोलन करने पर बाध्य होंगे।

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