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  • 6 Thousand Patients Are Coming To The OPD Of The Hospital Every Month, While There Is Not A Single Specialist Doctor Here

अभियान :अस्पताल की ओपीडी में प्रति माह आ रहे हैं 6 हजार मरीज, जबकि यहां नहीं है एक भी विशेषज्ञ डॉक्टर

गुना15 दिन पहले
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  • स्टाफ की कमी के कारण मरीजों को होती है परेशानी
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्टाफ की कमी है। इस कारण अस्पताल में इलाज कराने के लिए आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर के चार पद रिक्त हैं। प्रशासन ने 2008 में स्थानीय अस्पताल का उन्नयन कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाया था। उन्नयन के बाद यहां 30 बिस्तर का अस्पताल बनाने के साथ ही विशेषज्ञ डॉक्टरों सहित कई पद सृजित किए गए थे। लेकिन 12 साल बाद भी अस्पताल में यह पद अभी तक नहीं भरे गए।  हालत यह है कि प्राइमरी हेल्थ सेंटर के स्टाफ से ही यहां के कम्युनिटी हेल्थ सेंटर को चलाया जा रहा है। इसका खामियाजा क्षेत्र की जनता को भुगतना पड़ रहा है। शासन की योजनाओं के बावजूद भी लोग बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित हैं। अस्पताल में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनने के बाद यहां सर्जिकल विशेषज्ञ, शिशुरोग विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ, निश्चेतना विशेषज्ञ, रेडियोग्राफर, नेत्र सहायक, लेखापाल, लैब अटैंडेंट, ओटी अटेंडेंट के एक-एक पद तथा स्टाफ नर्स के 6 पद सृजित किए। इनमें से अधिकांश पद अभी भी खाली पड़े हैं।  अस्पताल में कई पद रिक्त : अस्पताल में स्टाफ नर्स के 4 पद खाली हैं इससे मरीजों के उपचार में परेशानी आती है। अस्पताल में एक्सरे मशीन चालू है लेकिन टेक्नीशियन का पद रिक्त है। मजबूरी में एमपीडब्ल्यू से काम चलाना पड़ रहा है। ओटी अटेंडेंट, बीपीएम, संगणक का पद खाली पड़ा है। इससे कई काम रुके हुए हैं। इससे लोगों को परेशानी होगी है।

200 की ओपीडी फिर भी नहीं है अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर
अस्पताल में चार पद विशेषज्ञ डॉक्टरों के हैं लेकिन इनमें से एक भी विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है। अस्पताल में रोजाना ओपीडी में 200 के आसपास मरीज आते हैं। वहीं महीने से करीब 6 हजार मरीज इलाज कराने आते हैं। महिला विशेषज्ञ के नहीं होने के कारण महिलाओं को इलाज के लिए बाहर जाना पड़ता है। अस्पताल के प्रसूति वार्ड में रोजाना 4 से 5 डिलेवरी होती है। महिला चिकित्सक के नहीं होने से कई बार परेशानी आ जाती है। इमरजेंसी में जच्चा को रैफर करना पड़ता है। ऐसे में कई बार प्रसूता की मौत भी हो जाती है। शिशु रोग विशेषज्ञ के नहीं होने से गंभीर बीमार बच्चों को इलाज के लिए रैफर करना पड़ता है। 

वरिष्ठ कार्यालय काे अवगत करा दिया है
अस्पताल में तमाम पद रिक्त हैं। इस संबंध में कई बार वरिष्ठ कार्यालय को अवगत करा दिया गया है। इसके बाद भी अस्पताल में रिक्त पदों की पूर्ति नहीं हुई।
डॉ. शिवराज सिंह भदौरिया, बीएमओ शाढ़ौरा 

राजपुर अस्पताल को नहीं मिला पीएचसी का दर्जा
ब्लॉक के राजपुर अस्पताल को पीएचसी के रूप में उन्नयन हुए कई साल हो गए हैं। लेकिन विभाग में उसे अभी तक उप स्वास्थ्य केंद्र की ही मान्यता है। इसी कारण अस्पताल में उपस्वास्थ्य केंद्र का ही स्टाफ है। अस्पताल में डॉक्टर तो पदस्थ हैं लेकिन स्टाफ नर्स नहीं है। इससे अस्पताल में अव्यवस्थाओं का आलम है। 

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