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यह तो हद हो गई...:7 बच्चे संक्रमित पर जिला अस्पताल में बच्चों की ओपीडी डेढ़ माह से बंद

गुना13 दिन पहले
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  • कलेक्टर ने संक्रमित बच्चों के अभिभावकों से कॉल कर हालचाल पूछे

7 बच्चों के कोरोना पॉजिटिव आने के बाद से ही स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया, वहीं इन बच्चों की घर पर ही देखभाल की जा रही है। कलेक्टर फ्रेंक नोबल ए ने भी इनके अभिभावकों से मोबाइल पर चर्चा कर हालचाल पूछे, वहीं बूढ़ेबालाजी क्षेत्र में पहुंचकर भी पूरी जानकारी जुटाई।

इतना सब कुछ होने के बाद ही एक बड़ी अनदेखी यह है कि पिछले डेढ़ माह से जिला अस्पताल में बच्चों की ओपीडी बंद है। इस समय तीसरी लहर की आशंका गहराई हुई है। बच्चों को लेकर अभिभावक चिंतित हैं। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों की ओपीडी तक चालू नहीं कराई है।
18 बेड का वार्ड :

जिला अस्पताल में बच्चों के लिए एक अलग से 18 बेड का वार्ड आरक्षित किया है। पहले बने कोविड सेंटर में से ही कुछ बेड बच्चों के लिए अलग कर दिए हैं। ताकि बच्चों का इलाज शुरु किया जा सके।
सभी बच्चे ठीक हैं, घर पर ही दवाएं चालू कराईं
कलेक्टर ने संक्रमित हुए सभी 7 बच्चों में से 6 के अभिभावकों से कॉल कर पूरी जानकारी ली। उसने पूछा कि कैसे वह संक्रमित हुए। वहीं इलाज और कॉल सेंटर से निगरानी रखी जा रही है या नही? इस बारे में भी जानकारी ली गई।
ओपीडी बंद होने से निजी क्लीनिक पर पहुंच रहे
जिला अस्पताल की सामान्य ओपीडी के साथ-साथ बच्चों की ओपीडी भी डेढ़ माह से बंद है। ऐसी स्थिति में बच्चों की ओपीडी भी बंद है। आपातकालीन सेवाएं ही बच्चों को लेकर चालू हैं। इससे लोग निजी अस्पताल जा रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग से चर्चा करेंगे
बच्चों की ओपीडी बंद है, इस बारे में स्वास्थ्य विभाग से चर्चा करेंगे। बच्चों को इलाज और चेकअप हो सके। इसके लिए हम इंतजाम कराएंगे। जो बच्चे संक्रमित मिले हैं, वह पूरी तरह ठीक है। पूरी निगरानी रखी जा रही है।
-फ्रेंक नोबल ए, कलेक्टर

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