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प्लाज्मा डोनेट:गंभीर कोरोना संक्रमण होने के बावजूद अपनी लोगों की मदद करने वालों की जांबाज कहानी

गुना2 महीने पहले
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विश्वास तारे - Dainik Bhaskar
विश्वास तारे
  • कोरोना से माता-पिता को खोया, खुद आईसीयू में रहे, स्वस्थ होने के बाद प्लाज्मा देकर दो की बचाई जानौ

कोरोना की दूसरी लहर पहला संकेत कैंट के लूशन बगीचा में रहने वाले तारे परिवार के यहां से मिला था। तब किसी ने कल्पना नहीं की थी कि अगले कुछ ही दिनों में यह इतने भयंकर रूप लेकर हमारे सामने आ जाएगी। उस परिवार के बुजुर्ग दंपती की मृत्यु हो गई और उनका बेटा, बहू की हालत भी गंभीर स्थिति तक पहुंच गई।

दोनों आईसीयू में भर्ती रहे। दंपती के बेटे विश्वास तारे व उनकी पत्नी ने कोरोना को अंतत: मात दी। वहीं विश्वास ने दो दिन पहले ही ग्वालियर जाकर प्लाज्मा दान कर कोरोना से जूझ रहे दो गंभीर मरीजों की जीवनदान दिया। वे खुद के खर्च पर टैक्सी लेकर ग्वालियर गए थे।

विश्वास बताते हैं कि उन्हें सूचना मिली थी कि गुना के युवक बृजेश दुबे का इलाज ग्वालियर के सिम्स हॉस्पिटल में चल रहा है। उनको ए पॉजिटिव प्लाज्मा की सख्त जरूरत है। सोशल मीडिया के जरिए उन्हें जब इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने तुरंत ही अपनी पत्नी और दोनों बहनों से बात की। हालांकि कोरोना से इतने गंभीर रूप से पीड़ित होने के बाद वे खुद भी रिकवरी की स्टेज में हैं। उनकी पत्नी ने भी इस बीमारी को बहुत करीब से झेला था।

इसके बावजूद परिवार के लोगों ने उनसे कहा कि अगर तुम्हारी वजह से किसी की जान बच सकती है तो यह मौका मत गंवाओ। इसके बाद वे उन्होंने किराए पर टैक्सी की और वे ग्वालियर जाकर गुना के युवक को अपना प्लाज्मा डोनेट किया। वहीं उन्हें एक और महिला मिली। उस महिला के पति को भी प्लाज्मा डोनेट किया। विश्वास ने बताया कि न तो उस महिला का पता है न उसके पति का।

संक्रमण होने के बाद तीन दिन में माता-पिता गुजर गए फिर उनकी और पत्नी की तबीयत बिगड़ गई विश्वास तारे, उनकी पत्नी और माता-पिता को कोरोना का संक्रमण तब हुआ जब यह परिवार भोपाल गया था। वहां विश्वास के बेटे का जनेऊ संस्कार था। उस कार्यक्रम में महाराष्ट्र से कुछ रिश्तेदार शामिल हुए थे। तब तक महाराष्ट्र में कोरोना की दूसरी लहर अपना असर दिखाना शुरू कर चुकी थी। कार्यक्रम से लौटने के दो दिन बाद ही उनके माता-पिता की हालत अचानक खराब होने लगी।

उन्हें ठीक वही लक्षण थे, जो आज कोरोना के गंभीरतम रूप की आम पहचान बन चुके हैं। पूरा परिवार भोपाल के एक निजी अस्पताल में भर्ती हुआ। देखते ही देखते विश्वास व उनकी पत्नी की हालत भी खराब होने लगी। तीन दिन के भीतर ही उनके माता-पिता गुजर गए। वहीं विश्वास व उनकी पत्नी जिंदगी और मौत के संघर्ष से उबरने में कामयाब रहे।

सिंधियाजी से मिली प्रेरणा

उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले उन्हें पता चला था कि कोरोना संक्रमण के बाद राज्यसभा सांसद ने स्वस्थ होने पर प्लाज्मा डोनेट किया था। श्री सिंधिया ने सोशल मीडिया पर लोगों से अपील भी की थी कि कोरोना से स्वस्थ होने के बाद लोग प्लाज्मा डोनेट करें, जिससे कि दूसरों की जान बचाई जा सके। विश्वास ने कहा कि उन्हें यह बात याद रही। इसलिए जब उनके पास यह मौका आया तो उन्होंने ठीक वैसा ही किया। प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री महेंद्र सिंह सिसौदिया ने भी श्री तारे का अभिनंदन किया।

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