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गुना की 20 कॉलोनियों में नुकसान:बाढ़ के बाद... राशन भी बहा ले गया पानी, मदद नहीं पहुंची तो पड़ोसी दे रहे एक-दूसरे का आसरा

गुना2 महीने पहले
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रशीद काॅलोनी में लोगों के पास खाने-पीने के साथ कपड़ों की भी समस्या हो गई। - Dainik Bhaskar
रशीद काॅलोनी में लोगों के पास खाने-पीने के साथ कपड़ों की भी समस्या हो गई।
  • 20 से 30 मिनट तक ही रहा बाढ़ का जोर, इतने में ही सब कुछ तबाह हुआ, 24 घंटे बाद भी लोगों तक नहीं पहुंची मदद

शहर के कई इलाकों में शुक्रवार को आई बाढ़ एक रहस्य बनी हुई है। कई लोगों ने 1993 के हालात भी देखे थे। तब पानी अचानक नहीं आया था बल्कि धीरे-धीरे बढ़ा। इस बार तो बाढ़ सुनामी की तरह लहरों के रूप में आई। 20-30 मिनट के दौरान हर लहर के साथ जलस्तर बढ़ता गया और फिर जिस तेजी से पानी आया था उतनी ही जल्दी उतरता भी चला गया। हालांकि घरों के सामान और अन्य चीजों का बर्बाद करने के लिए इतना वक्त काफी था। शहर के सबसे प्रभावित इलाकों में से एक रशीद काॅलोनी में शनिवार को पहुंचने पर यह विश्वास करना मुश्किल हो रहा था कि 24 घंटे पहले ही वहां 8 से 15 फीट तक पानी भरा हुआ था। सड़कों पर उस तबाही की कोई निशानी नहीं दिखाई देती लेकिन घरों के भीतर बाढ़ ने गहरे जख्म दिए। बाहरी दीवारों पर सीलन की एक लाइन बनी दिखाई देती है, जो बताती है कि शुक्रवार को कौन सा घर कितना डूब गया था। पूरे 24 घंटे बाद भी लोगों तक कोई मदद नहीं पहुंची। कुछ परिवारों के पास खाने-पीने का सामान तक नहीं बचा था।

अभी हम राहत के काम में लगे हैं

अभी हमारा पूरा जोर लोगों को बचाने पर था। इसके साथ-साथ प्रशासन की एक पूरी टीम राहत के काम में भी लगी है। अब हम नुकसान का आकलन करेंगे, जिससे पता चल सके कि किसको किस तरह की मदद की जरूरत है। यह काम तेजी से कराया जाएगा
-फ्रेंक नोबल ए, कलेक्टर

आंसू से भरी आंखें... लोग बोले- 1993 की बाढ़ ने तो संभलने का मौका भी दिया, इस बार पानी आया और घरों में घुस गया

रशीद काॅलोनी... परिवार 500, 200 घराें में घुसा पानी

हर कोई चाहता था उनके घर जाकर देखें हालात

रेलवे लाइन के पास बसी इस बस्ती में हर कोई यह चाहता था कि उसके घर के भीतर के हालात के फोटो लिए जाएं। उनका नाम लिखा जाए। श्रीराम काॅलोनी की माता पुलिया के आसपास के ही 50 घरों के हालात बहुत खराब थे। कुछ मकान पुलिया की बाढ़ से प्रभावित हुए तो बाकी दूसरी ओर से आई पानी की लहर की चपेट में आए। नाले के ठीक पास गोविंद शर्मा का मकान है। उन्होंने बताया कि दोपहर 12 बजे तक तो लग ही नहीं रहा था कि हमें घर छोड़ना पड़ जाएगा। देखते ही देखते हम सभी पानी में घिर गए। परिवार की एक महिला सदस्य 8 माह से गर्भवती थी। बचाव के लिए किसी का इंतजार नहीं किया जा सकता था। जाट परिवार के लोगों ने रस्सी बांधकर घर में फंसे लोगों को निकला।

रशीद खां के परिवार को भरत सिंह ने दिया आसरा

80 साल के रशीद खान का कच्चा घर और उसका पूरा सामान बारिश से तबाह हो गया। वे रोते हुए बताते हैं कि उनके नन्हे नाती-पोतों, गर्भवती बेटी सहित अन्य महिला सदस्यों को पड़ोस में रहने वाले भरत सिंह धाकड़ ने बचाया। वे बताते हैं कि अचानक ही पानी की एक लहर आई और घर में कमर तक पानी भर गया। घर में 4 माह के शिशु से लेकर 3-4 अन्य बच्चे भी थे। जवान बेटा बाहर मजदूरी पर गया था। रशीद खां में इतनी ताकत नहीं थी कि वे खुद को भी बचा पाएं। ऐसे में पड़ोसी भरत व उनके परिवार के अन्य सदस्यों ने उन्हें बचाया।

50 से ज्यादा घर, प्रभावित हुए 25 परिवार

न्यूसिटी कालोनी : कारें डूब गईं, घरों में टीवी, फ्रीज सब बर्बाद

बाढ़ ने पॉश मानी जाने वाली कालोनियों में भी कम तबाही नहीं मचाई। वह चाहे गोविंद गार्डन कालोनी हो या न्यूसिटी कालोनी, जहां कई घरों के ग्राउंड फ्लोर पूरी तरह डूब गए थे। लोगों ने बताया कि अचानक जब पानी आया तो हमने सबसे पहले आटा, दाल, मसाले आदि ऊंची जगहों पर रखे। यहां इतना पानी भरा कि कारें डूब गईं और बहती चली गईं। घरों में रखे टीवी, फ्रीज, वॉशिंग मशीन में पानी भर गया। लोगों का कहना था कि किसी तरह की सरकारी मदद भी नहीं मिली।

कई परिवारों का सबकुछ तबाह

सामान तो छोड़ो रोटी बनाने के लिए एक भी बर्तन तक नहीं बचा

कई परिवारों की हालत तो इतनी खराब थी कि उनके यहां खाना बनाने के बर्तन तक नहीं बचे। ऊषा शर्मा के परिवार को पास में रहने वाले लोगों ने बर्तन दिए, जिससे कि वे खाना बना सकें। उनकी बहु निशा शर्मा के पति 2 साल पहले गुजर गए थे। बाढ़ से उनका पूरा सामान बर्बाद हो गया। उन्होंने कहा कि हमारे पास अब कुछ नहीं बचा। संकट ने हर किसी को एक सी स्थिति में ला दिया था। वह चाहें धर्मेंंद्र रजक हों या सलीम पेंटर, दोनों ही पूछ रहे थे कि भोजन के पैकेट कब आ रहे हैं? घर में कुछ नहीं बचा है। ​​​​​​​

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