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बिग इंपैक्ट:डेंगू प्लान... फीवर सर्वे होगा, प्राइवेट डॉक्टरों को संदिग्धों की जांच जिला अस्पताल में करानी होगी

गुना8 दिन पहले
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  • भास्कर ने 5 इलाकों में डेंगू मरीज मिलने की खबर दी तब अलर्ट हुआ विभाग

कोराेना संकट के बीच डेंगू की दस्तक को लेकर स्वास्थ्य विभाग आखिरकार अलर्ट हो गया। हैरानी की बात यह है कि जिला अस्पताल में ही डेंगू पीड़ित भर्ती हुए इसके बावजूद विभाग तब जागा जब इस पर भास्कर ने विस्तृत रिपोर्ट की। रविवार को ही स्वास्थ्य विभाग से कागजी घोड़े दौड़ना शुरू हो गए। आनन-फानन में योजना बनी। यह कोरोना की तरह ही होगी। यानि वार्डवार सर्वे व संदिग्ध मरीजों की ज्यादा से ज्यादा से जांच।

स्वास्थ्य विभाग ने तो कार्ययोजना बना ली है लेकिन इस रोग की रोकथाम में दूसरी अहम कड़ी नगर पालिका है। नपा सीएमओ तेज सिंह का कहना है कि अलग-अलग जगहों पर फॉगिंग मशीन भेजी जा रही है। वहीं जानकारों का कहना है कि यह नाकाफी होगा। नपा अमले को लार्वा सर्वे मेें लगाना पड़ेगा। तभी इसकी रोकथाम हो पाएगी। अगर इस पर तेजी से काम नहीं हुआ तो 2019 की तरह शहर को डेंगू की महामारी से भी जूझना पड़ सकता है।

स्वास्थ्य विभाग व आंगनवाड़ी कार्यकर्ता साथ करेंगे काम, नपा को भी मिलेगी जिम्मेदारी

क्या है प्लान : तीन चरणों में करेंगे डेंगू का खात्मा

सर्वे : सीएमएचओ डॉ. पी. बुनकर ने बताया कि इसके तहत सभी वार्डों में स्वास्थ्य व आंगनवाड़ी कार्यकर्ता मिलकर सर्वे करेंगे। कोरोना की वजह से स्वास्थ्य विभाग के पास पर्याप्त थर्मोमीटर हैं और डेंगू में भी मुख्य लक्षण बुखार ही रहता है। इसलिए मरीज की पहचान आसानी से हो सकेगी।

जांच : भास्कर ने शनिवार को जब अपनी खबर के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से बातचीत शुरू की तो कुछ स्तरों पर काम तभी शुरू हो गया। मसलन डेंगू की जांच के लिए एलाइजा टेस्ट का इंतजाम अब जिला अस्पताल में ही हो गया है। इससे मरीजों के पैसे भी बचेंगे।

हिदायत : कोरोना की तरह डेंगू के मामले में भी निजी व सरकारी डॉक्टरों से कहा गया है कि वे संदिग्धों की जानकारी तुरंत जिला अस्पताल में दें। इसके अलावा प्राइवेट पैथालॉजी संचालकों को भी कहा गया है कि वे एलाइजा टेस्ट कराने आने वाले मरीज को जिला अस्पताल भेजें।

बात सितंबर 2019 की... जब श्रीराम काॅलोनी डेंगू गली के नाम से फेमस हुई

2019 में सितंबर से दिसंबर के बीच लोग डेंंगू से वैसे ही आतंकित थे, जैसे कि इस बार कोरोना से। इस दौरान एक दिलचस्प मामला सामने आया था। श्रीराम कालोनी की एक गली में करीब 10 परिवारों में से 8 के यहां डेंगू के मरीज मिले थे। इनमें से कई घरों में 2 से 3 सदस्य बीमार थे। तब ज्यादातर लोग कोटा जाकर इलाज करा रहे थे। निजी अस्पताल इस बीमारी के नाम पर लोगों को खूब लूट रहे थे। जबकि 90 फीसदी मामलों में इसका इलाज सरकारी अस्पताल में आसानी से हो सकता है। इस पर मामूली खर्च आता है। गंभीर मामलों में ही मरीज को बाहर ले जाने की जरूरत पड़ती है।

डेंगू भी बन जाता है महामारी

अगर समय रहते सिस्टम तैयार न हो तो डेंगू भी महामारी की तरह फैलता है। हालांकि कोरोना की तरह इसका वायरस हवा या किसी सतह पर जीवित नहीं रह सकता। इसके लिए किसी शरीर की जरूरत होती है। यह मच्छर से हमारे शरीर में आता है। संक्रमित व्यक्ति से यह वायरस दूसरे मच्छरों में भी चला जाता है। फिर यह मच्छर लोगों को काटकर इस रोग का प्रसार बढ़ाते जाते हैं। इस तरह यह चक्र बनता जाता है। हालांकि किसी संक्रमित व्यक्ति को छूने या उसके संपर्क में आने से किसी अन्य को यह रोग नहीं होता।

शहरों में सबसे ज्यादा खतरा

इस बीमारी से सबसे ज्यादा खतरा शहरी इलाकों में रहता है। पूर्व सीएमएचओ डॉ. रामवीर सिंह रघुवंशी ने बताया कि इस रोग को फैलाने वाला मच्छर साफ पानी में अंडे देता है। 7 दिन के भीतर इन अंडों से लार्वा बन जाते हैं और कुछ दिन में यह मच्छर का रूप ले लेते हैं। शहरों में टंकियों, कूलर, गमलों में साफ पानी खूब मिल जाता है। इसलिए यह मच्छर बढ़ते जाते हैं।

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