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हादसों से सबक नहीं:बिना सुरक्षा उपकरण के हाईटेंशन लाइन की मरम्मत कर रहे कर्मचारी, ट्रांसफार्मर रखते हैं

चांचौड़ाएक महीने पहले
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  • खंभे पर चढ़कर बिना दस्ताने के फाल्ट सुधारते हैं कर्मचारी
  • अधिकारी बोले जिले से नहीं मिलते उपकरण तो हम कहां से उपलब्ध करा दें

विद्युत विभाग कस्बे में कई दिनों से बिजली लाइन को दुरुस्त करने का कार्य किया जा रहा है। इस दौरान अमला बिना सुरक्षा उपकरणों के लाइन पर काम करने को मजबूर हैं। विद्युत ट्रांसफार्मर शिफ्टिंग के अलावा अन्य जोखिम भरे कार्य किए जा रहे हैं। इन कार्यों को करने वाले मजदूरों को सुरक्षा के साधन मुहैया नहीं कराने से उन्हें अपनी जान जोखिम में डाल कर काम करना पड़ रहा है। विडंबना यह है कि विद्युत दुर्घटना के बाद भी इन कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए विद्युत वितरण कंपनी के ठेकेदार गंभीर नहीं है। लिहाजा सुरक्षा संसाधनों के अभाव में कर्मचारियों को काम करने की मजबूरी है। जान जोखिम में डालना इनकी मजबूरी है या फिर शौक। इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है। लेकिन कुछ भी हो हादसा हुआ तो किसकी जिम्मेदारी बनेगी।

अक्सर चलता है काम

कस्बे में जगह-जगह बिजली कंपनी ने लाइन पर काम करती है। कभी डीपी को ठीक करने या लाइन बदलने तक का कार्य होता है। दुर्घटना का न्योता देने वाले खंभे का शिफ्टिंग कार्य भी चलता है। कुछ कार्य कंपनी खुद कराती है और कुछ ठेकेदार मजदूरों से कराते हैं। ठेकेदार के अंतर्गत दर्जनों की संख्या मे उपस्थित मजदूर खंभा लगाने, तार फैलाने और ट्रांसफार्मर लगाने का कार्य कर रहे हैं।

बिना किसी सुरक्षा प्रबंध के खंभा पर चढ़कर तार खींचते देखे जा रहे है। इन मजदूरों के पास न तो टोपी थी और नहीं उंचाई पर चढ़े इन मजदूरों की सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम। नगर पंचायत के कुछ कर्मचारियों को स्ट्रीट पोल पर लगे ट्यूब लाइट, बल्ब को सुधारने का जिम्मा मिला हुआ है परंतु उन कर्मचारियों द्वारा भी बिना सुरक्षा संसाधनों के चालू लाईन मे ही सुधार कार्य किया जाता है। जिससे कर्मचारियों को करंट लगने का खतरा बना रहता है।

यह संसाधन मिले हैं लेकिन इसकी कमी है

विद्युत सुधार कार्य, स्ट्रीट लाइट बदलने के लिए एक सीढी, पेचिस आदि सामान ही मिले हैं। जबकि विद्युत रोधी ग्लब्स, जूते, पीवीसी टोपी आदि सुरक्षा उपकरण दिए जाने चाहिए थे। सबसे महत्वपूर्ण और खास बात यह है कि विद्युत सुधार कार्य में लगे कर्मचारियों के पास कोई डिग्री, कोई प्रशिक्षण प्रमाण पत्र भी नहीं है। कर्मचारियों को कार्य में सावधानी बरतने का प्रशिक्षण भी नहीं दिया गया है। यहां तक कि संबंधी कर्मचारियों का बीमा तक नहीं कराया गया है।

होते रहे हैं हादसे

जिले में देखा गया है कि पूर्व मे कई बार ठेकेदार के अंतर्गत काम कर रहे वर्कर बिना सुरक्षा उपकरणों के चलते खंभे पर चढ़कर बिजली मरम्मत कार्य करने के दौरान हादसे का शिकार हो चुके हैं। इसके बाद भी मनमानी पर अंकुश नहीं लग पाया है।

क्या बोले कर्मचारी

जब मैदानी अमले से फील्ड पर काम करने वाले कर्मचारियों से चर्चा की तो पाया कि उन्हें सुरक्षा सामग्री प्राप्त ही नहीं होती है। जिनमें गम बूट,स्क्रू डायवर,हैंड ग्लब्स, हेलमेट व प्लास्टिक डिस्चार्ज सर्किट, टार्च आदि शामिल हैं। कर्मचारियों को कई बार करंट के खुले के खुले तारो को छूकर काम करना पड़ता है इसलिए सबसे ज्यादा जरूरी सुरक्षा उपकरणों में हैंड ग्लब्स हैं। कर्मचारियों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि पूरे जिले में ही कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर उपकरण नहीं दिए जाते हैं। लेकिन जिला अस्पताल पर बिजली कंपनी के अधिकारी इसके नाम पर भी खर्च डालते हैं।

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