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  • Even After Removing 14 Lakhs Of Four Ponds, Not A Single Pond Was Built, The Sarpanch employed Assistant Fell On Him; Instructions For Termination Of Services

चांचौड़ा में भ्रष्टाचार का खुला खेल:चार तालाबों के 14 लाख निकालने के बाद भी नहीं बनाया एक भी तालाब, सरपंच-रोजगार सहायक पर गिरी गाज; सेवाएं समाप्त करने के दिए निर्देश

गुना6 दिन पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो

गुना। जिले के चांचौड़ा क्षेत्र में सरपंच-रोजगार सहायक की मिलीभगत से तालाबों के नाम पर 14 लाख से ज्यादा रूपये निकाल लेने का मामला सामने आया है। दोनों ने मिलकर चार तालाबों के लिए स्वीकृत हुई राशि निकाल ली और तालाबों का निर्माण नहीं कराया। मामले सामने आने के बाद कलेक्टर ने सरपंच को बर्खास्त करने और रोजगार सहायक की सेवा समाप्त करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही इन सब से गबन की गयी राशि बसूलने के भी निर्देश दिए हैं। हालाँकि इसमें पूरे मामले में एक बात और निकलकर आयी है की सरपंच कोई और है और सरपंची कुछ दबंग व्यक्तियों द्वारा की जा रही है। निर्वाचित सरपंच तो केवल हस्ताक्षर करने के लिए रह गया है।

दरअसल मामला यह है की चांचौड़ा क्षेत्र के नारायणपुरा गांव में चार तालाब बनाये जाने थे। इनके लिए 14 लाख 70 हजार की राशि स्वीकृत की गयी थी। ग्रामपंचायत के उप सरंपच द्वारा इस संबंध में कलेक्टर को शिकायत की गयी थी। कलेक्टर के पास यह मामला पहुंचा की सरपंच और रोजगार सहायक ने यह राशि निकाल ली है लेकिन मौके पर तालाबों का निर्माण नहीं किया गया है। कलेक्टर ने आरईएस के कार्यपालय यंत्री दिलीप देशमुख, नरेगा के कार्यपालन यंत्री अर्चना भास्कर को इस मामले की जांच सौंपी। जाँच में यह सामने आया की ग्राम पंचायत में तालाब बनाये नहीं गए। जबकि 14 लाख 70 हजार रुपए की राशि निकाल ली गयी है। निर्माण कार्य की राशि रोजगार सहायक संजय मीणा और ग्राम पंचायत सरपंच शीला राजेन्द्र सहरिया के हस्ताक्षर से निकाली गयी है। जबकि ग्राम पंचायत सचिव ने इसमें ऊपर जानकारी नहीं दी।

जांच के बाद टीम ने अपना प्रतिवेदन कलेक्टर को सौंपा। इसमें ये तीन लोग दोषी पाए गए हैं। कलेक्टर ने मिले प्रतिवेदन के आधार पर जिला पंचायत CEO को मामले में कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं। सरपंच को पद से हटाने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं सचिव को निलंबित करने तथा रोजगार सहायक की सेवाएं समाप्त के निर्देश दिए हैं। साथ ही गबन किये गए 14 लाख 70 हजार रूपये की वसूली इन सभी से करने के भी निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने कहा कि किसी भी कार्य में लापरवाही और अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जायेगी। जो भी दोषी होगा उसके विरूद्ध सख्त कार्यवाही होगी।

दबंग कर रहे सरपंची
ग्राम पंचायतों में लागू नियम के अनुसार किसी भी निर्माण कार्य की राशि सरपंच और रोजगार सहायक ही निकाल सकते हैं। दोनों के संयुक्त हस्ताक्षर से ही निकाली जा सकती है। इसलिए इस मामले में इन दोनों की ही मुख्य भूमिका मानी गयी है। इस मामले में एक और बात निकलकर सामने आयी है की निर्वाचित सरपंच तो शीला सहरिया है, लेकिन सरपंची गांव का ही एक दबंग व्यक्ति पुरुषोत्तम मीणा कर रहा है। वह जहाँ कहता है वहां सरपंच द्वारा हस्ताक्षर कर दिए जाते हैं। आदिवासी इलाकों में यह समस्या अक्सर सामने आती है। आरक्षित सीट होने के कारण सरपंच तो किसी आरक्षित वर्ग के व्यक्ति को ही बनाना पड़ता है, लेकिन परदे के पीछे से सरपंची कोई दबंग ही करता है। वर्तमान सरपंच शीला सहरिया भी इस दबंग व्यक्ति के यहाँ काम करती थी। सीट आरक्षित हुई तो उसे चुनाव लाडवा दिया।

रोजगार सहायक पर दवाब डालकर ले लिए आईडी-पासवर्ड
ग्राम रोजगार सहायक संजय मीणा ने बताया की उसके ऊपर दवाब बनाकर आईडी पासवर्ड लिए गए। सारा काम आईडी-पासवर्ड से ही होता है। इसी दबंग व्यक्ति द्वारा धमकी तक दी जाती है। बात न मानने पर मारपीट और जान से मारने तक की धमकी दी जाती है। इस मामले में भी ऐसा ही हुआ है। आईडी-पासवर्ड न देने पर जान से मारने तक की धमकी दी गयी। वहीं इस मामले में कलेक्टर का कहना है की ये बहुत गंभीर मामला है। इतनी ज्यादा राशि निकाल ली गयी और जरा सा भी काम नहीं किया गया। सरपंच और रोजगार सहायक को उस व्यक्ति का नाम भी बताना चाहिए जो जोर-जबरजस्ती करता है ताकि उस पर भी कार्यवाही कर सकें।

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