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वर्ल्ड एंटीबायोटिक अवेयरनेस वीक:एंटीबाॅयोटिक के अधिक उपयोग से जा सकती है जान

गुना2 महीने पहले
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  • एंटीबायोटिक बेअसर, अधिक इस्तेमाल से इसका बैक्टीरिया पर हो रहा है कम

एंटीबायोटिक्स का बैक्टीरिया पर कम होते असर को लेकर चिकित्सा जगत में चिंताएं गहरा गई हैं। चिंतित विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस तरफ जागरुकता को लेकर कदम उठाने के लिए कहा है। इसी के तहत पूरे सप्ताह भर तक इसके खतरनाक प्रभावों के बारे में आम लोगों तक जागरुक किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने वर्ल्ड एंटीबायोटिक अवेयरनेस वीक के तहत एक मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया। इससे पहले डॉक्टरों को भी सलाह दीं गई। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने जो बातें रखीं वह हैरान कर देने वाली थीं। सिविल सर्जन डॉ. हर्षवर्धन जैन ने कहा कि एंटीबायोटिक्स के कम होते असर के कारण जिंदगी खतरे में पड़ रही है। क्योंकि इसके अधिक उपयोग से हैवी एंटीबायोटिक का भी असर गंभीर बीमारी में नहीं होता है। इससे मरीज को बचाना मुश्किल हो जाता है। इसलिए सावधानी रखें, विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह पर ही इसे लें। अभी वर्तमान में जगह-जगह दुकान खोलकर बैठे क्लीनिक संचालक यह दवाएं दे रहे हैं। जबकि इसके लिए पूरी एक गाइड लाइन है। कब एंटीबायोटिक्स दी जाती है। इसका पूरा एक डोज होता है, कम दिन उपयोग करने से भी खतरा रहता है। इस दौरान सीएमएचओ डॉ. पी बुनकर, डॉ. अनिल विजयवर्गीय, डॉ. एसओ भोला, डॉ. राजेंद्र सिंह भाटी और डॉ. शिल्पा टाटिया ने भी अपनी बात रखी।
इंसानों के बाद पशु और कृषि में भी बड़ा उपयोग : डॉ. अनिल विजयवर्गीय ने कहा एंटीबायोटिक दवाएं पशुओं को भी अधिक मात्रा में दी जा रही हैं, वहीं कृषि क्षेत्र में भी इनका उपयोग चिंता का विषय है। जब सब्जी खाते हैं तो यह हमारे शरीर में पहुंचकर नुकसान पहुंचाते हैं। डॉ. एसओ भोला ने बताया कि प्रतिबंधित एंटीबायोटिक की सूची सार्वजनिक होनी चाहिए। दुष्प्रभावों के बारे में जागरुकता की जरूरत है।
7 लाख मौतें हर वर्ष : सीएमएचओ ने कहा कि पूरे विश्व में एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध के कारण 7 लाख मौतें प्रतिवर्ष होती है। अगर इस दिशा में कदम नहीं उठाए तो यह आंकड़ा वर्ष 2050 तक 1 करोड़ तक पहुंच जाएगा। सिविल सर्जन ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग ने वर्ष 2018 में ही एंटीबायोटिक पॉलिसी का निर्माण किया है। इसलिए अब इसी के तहत कदम उठाए जाएंगे। इसके लिए जनसमुदाय को जागरुक करेंगे, ताकि वह खुद भी सावधान रहें। डॉ. शिल्पा टाटिया ने कार्यक्रम की प्रस्तुति दी।
यह सावधानी रखें
सिविल सर्जन डॉक्टर हर्षवर्धन ने कहा कि जिस पद्धति में डॉक्टर ने डिग्री ली है, वह उसी की दवाएं लिखें तो बड़े स्तर पर एंटीबायोटिक्स का दुरुपयोग रोका जा सकता है। डॉ. राजेश भाटी ने कहा कि एंटीबायोटिक बच्चे, बुजुर्ग और उम्र, वजन के आधार पर दी जाती हैं। लेकिन कई जगह यह सावधानी नहीं रखी जाती है। बिना जांच के भी एंटीबायोटिक देने से खतरा होता है। पता चलता है कि यूरीन में इंफेक्शन है, लेकिन सांस, बुखार और खांसी के लिए उपयोग होने वाली एंटीबायोटिक दे दी, जो खतरा पैदा करती है।

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