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  • For The First Time In 75 Years, The Effigy Combustion Was Ahead Of Schedule, The Ram Ravana War Also Ended In 15 Minutes.

ऐसे मना दशहरा:75 साल में पहली बार पुतला दहन तय समय से पहले, राम-रावण युद्ध भी 15 मिनट में ही खत्म

गुनाएक वर्ष पहले
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  • आमने-सामने नहीं आईं सेनाएं, पुतला भी पूरा नहीं जल पाया, मूल ढांचा बचा रह गया

कोविड संकट के चलते इस बार दशहरा समारोह आनन-फानन में निबटा दिया गया। 75 साल में पहली बार रावण के पुतले का दहन शाम 7 बजे से पहले ही कर दिया गया। इसी तरह पहली बार राम-रावण के युद्ध का दृश्य व संवाद भी शॉर्ट कट में निबटाए गए। आयोजन की अनिश्चितता के चलते इस बार रावण का पुतला बनाने में भी गड़बड़ी हो गई।

जब उसका दहन किया गया तो उसका बांस का ढांचा पूरी तरह नष्ट नहीं हो पाया। वह खड़ा रह गया। उसके चार सिर भी अपनी जगह बने रहे। दूसरी ओर आयोजन में कम से कम भीड़ एकत्रित होने से रोकने के लिए की गई कोशिशें खास कामयाब नहीं हो पाई। करीब तीन हजार लोग इस समारोह को देखने के लिए पहुंच ही गए।

सोशल डिस्टेंसिंग का धज्जियां : आयोजन समिति ने सिर्फ 25 कुर्सियां लगाने की बात कही थी लेकिन मौके पर 200 से ज्यादा कुर्सियां लगा दी गईं। आम लोगों के लिए सोशल डिस्टेंसिंग वाले गोले बनाए गए थे लेकिन खास लोगों की कुर्सियां सटाकर रखी गईं।

रावण के 4 सिर, तलवार नहीं जली

इस बार रावण के पुतले को भी संभवत: हड़बड़ी में बनाया गया। पहले ताे यह तय ही नहीं था कि पुतला दहन हो पाएगा भी या नहीं। फिर अनुमति मिली तो इसकी ऊंचाई को लेकर गफलत बनी रही। इसी वजह से दहन के दौरान पुतला पूरा नहीं जला। रावण के चार सिर और उसकी तलवार जस की तस बनी रही।

संवाद और युद्ध 15 मिनट में निबटे

राम-रावण संवाद और उनकी सेनाओं का युद्ध इस आयोजन का बड़ा आकर्षण रहता है। इसमें करीब 30 से 35 मिनट लगते हैं। पर इस बार यह प्रक्रिया 15 मिनट में खत्म हो गई। संक्षिप्त संवाद के बाद सिर्फ राम-रावण की सीधी जंग हुई। वानर सेना नहीं दिखाई दी। न ही रावण दल ही मैदान में आया।

आधे घंटे का जुलूस : पिछले साल राम-रावण और उनकी सेना का जुलूस पुरानी गल्ला मंडी से शुरू होकर सदर बाजार, लक्ष्मीगंज, एबी रोड होते हुए आयोजन स्थल तक जाता था। इस बार यह सीधे हाट रोड से होकर दशहरा मैदान पहुंचा। इसमें आधे घंटे से भी कम समय लगा।

रावण का घोड़ा बिदका

नगर पालिका के सामने से गुजरते हुए रावण के रथ का घोड़ा अचानक ही बिदक गया। हालांकि दो घुड़सवार उसे संभालकर ले जा रहे थे। इसके बावजूद न जाने क्यों वह अचानक बेकाबू हो गया। उसने अपने आगे के दोनो पैर हवा में उठा लिए। बड़ी मशक्कत के बाद उसे काबू में लाया जा सका।

मधुसूदनगढ़ में पुतला नहीं बन पाया तो फ्लैक्स बनाकर किया दहन

कोविड संकट के दौरान सामाजिक धार्मिक आयोजन गड़बड़ा रहे हैं। मधुसूदनगढ़ में तो रावण के पुतले की जगह उसका फ्लैक्स लगाया गया। आयोजन समिति के रामस्वरूप शर्मा ने कहा कि कोविड गाइड लाइन को लेकर कुछ तय नहीं था। बाद में कारीगरों ने हाथ खड़े कर दिए।

उन्होंने कहा कि इतने कम समय में हम पुतला नहीं बना पाएंगे। इसलिए हमने फ्लैक्स बनवा दिया। इस बार किसी तरह आयोजन की परंपरा को जारी रखना था। हमने फ्लैक्स बनाकर रावण का प्रतीकात्मक दहन किया।

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