प्रवासी पक्षियों का आगमन / पहली बार सिंगवासा पर दिखी ग्रेटर फ्लेमिंगाें की टोली, खासियत: एक टांग पर 5 घंटे खड़े रहकर सो भी लेते हैं

Greater flamingo's team seen on Singwasa for the first time, USP: Standing on a leg for 5 hours and sleeping
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Greater flamingo's team seen on Singwasa for the first time, USP: Standing on a leg for 5 hours and sleeping

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:00 AM IST

गुना. सिंगवासा तालाब में इस साल पहली बार ग्रेटर फ्लेमिंगों (राजहंस) की प्रजाति प्रवास पर आई है। आमतौर पर प्रवासी पक्षी सर्दियों में आते हैं। सिंगवासा पर कई बार साइबेरियन सारस देखे गए हैं पर ग्रेटर फ्लेमिंगो अपेक्षाकृत गर्म देशों की प्रजाति है। इनकी कुछ नस्लें भारत के गुजरात व महाराष्ट्र में भी मिलती हैं। इसके अलावा यह दक्षिणी यूरोप के देशों में पाए जाते हैं। जो उत्तरी यूरोप के मुकाबले कम ठंडे देश माने जाते है।

लॉकडाउन और भरपूर पानी के कारण हुआ प्रवास इस बार लॉकडाउन के कारण सिंगवासा के आसपास मानवीय गतिविधियां बहुत कम है। वहीं पिछले साल हुए गहरीकरण के शानदार नतीजे इस बार दिखाई दे रहे हैं। इन दोनों अनुकूल स्थितियों के कारण यह पक्षी पहली बार हमारे यहां आया है। अगर हम तालाब का संरक्षण इसी तरह जारी रखें तो आने वाले सालों में इस जगह को पक्षियों के लिहाज से अनुकूल बना सकते हैं और लोगों के यहां एक आकर्षण का केंद्र रहेंगे।

 राजहंस एक सामाजिक पक्षी, ये अपना जीवनसाथी कभी नहीं बदलते
 इनका अधिकांश शरीर सफेद पंखों से ढंका रहता है लेकिन कुछ गुलाबी शेड भी देखा जा सकता है। इनकी चोच आगे से काली रहती है। जबकि पीछे यह गुलाबी या हल्की पीली रंग की हो सकती है। यह बेहद सामाजिक पक्षी होते हैं और अपना जीवन साथी कभी नहीं बदलते। यह एक पैर पर 4-5 घंटे तक खड़े रह सकते है। इसी अवस्था में यह सो भी जाते हैं।  राजहंस परिवार की इस प्रजाति का मूल ठिकाना यूं तो यूरोपीय देश के साथ ही दक्षिण एशिया में है, लेकिन सर्दियों में यह भारत में कई स्थानों पर प्रवास करता है।

पछियों का आकार 120 से 130 सेमी होता है
इस पक्षी की भव्यता तब दिखती है जब यह उड़ान भरता है। अपने लंबे पंखों को विस्तार देकर यह 2-3 बार पंख फड़फड़ाकर फ्लाइट भरता है। पछियों का आकार 120 से 130 सेमी होता है।  भारत में इसकी दो प्रजाति हैं, ग्रेटर और लेसर फ्लेमिंगो।

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