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बकस्वाहा जंगल:गुना के सामाजिक कार्यकर्ता की याचिका एनजीटी में मंजूर

गुनाएक महीने पहले
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  • छतरपुर का मामला, पेड़ काटने वाली कंपनी को 30 जून तक जवाब देना होगा

प्रदेश के छतरपुर जिले के बकस्वाहा जंगल को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानि एनजीटी में गुना के वकील एवं सामाजिक कार्यकर्ता पुष्पराग की ओर से दायर याचिका मंजूर कर ली गई है। इससे पहले भी एनजीटी में इस मुद्दे पर एक याचिका दायर हो चुकी है।

पुष्पराग ने बताया कि हीरा खनन के लिए ठेका लेने वाली कंपनी एस्सेल माइनिंग एंड इंडस्ट्रीज की ओर से इस याचिका का यह कहकर विरोध किया गया था कि उसे अब तक पेड़ काटने की अनुमति नहीं मिली है। इसलिए इस तरह की याचिकाओं के दायर किए जाने की कोई वजह भी नहीं है।

हालांकि पीठ की ओर से यह कहा गया कि जब आपको अनुमति मिल जाएगी तब तो पेड़ काटे जाएंगे। खनन कंपनी को कहा गया है कि 30 जून को वह अपना जवाब मय हलफनामा के पेश करे। उन्होंने कहा कि याचिका को सुनवाई के मंजूर किया जाना एक बड़ी कामयाबी है।

बकस्वाहा जंगल बचाने के लिए राष्ट्रीय समिति बनी : उन्होंने बताया कि बकस्वाहा जंगल को बचाने के लिए कई स्तरों पर लोग काम कर रहे हैं। विभिन्न कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई हैं। आंदोलन भी हो रहे हैं। इसलिए इन सभी प्रयासों के बीच समन्वय बनाने के लिए एक समिति बनाई जा रही है। फिलहाल 15 लोगों की तदर्थ समिति बन गई है। इसमें मेधा पाटकर, डॉ. सुनीलम जैसे नाम शामिल हैं।

कांग्रेस के शासनकाल में हुआ था ठेका : मजे की बात यह है कि बकस्वाहा जंगल में हीरा खनन के लिए आदित्य बिड़ला ग्रुप की कंपनी को ठेका जुलाई 2019 में कमलनाथ सरकार के कार्यकाल में दिया गया था। जबकि यहां हीरे की संभावना को लेकर सर्वे का काम 2008 में भाजपा की तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में कराया गया था।

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