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विरोध में टूटे नियम:बाल्मिकी समाज ने हाथरस और रघुवंशी महासभा ने आरोन घटना पर किया विरोध

गुना2 महीने पहले
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  • कोविड गाइड लाइन और धारा 144 लागू फिर भी 2 संगठनों के हजारों लोग सड़कों पर आए, कलेक्टोरेट में धरना भी दिया

लोगों के जमावड़े के खिलाफ कोविड गाइड लाइन के अलावा जिले में चुनाव के चलते धारा 144 लागू है। यही नहीं दो दिन पहले हाईकोर्ट की ग्वालियर बैंच ने भी महामारी एक्ट के उल्लंघन पर अपनी नाराजगी जताते हुए गुना सहित 9 जिले के कलेक्टर व एसपी को सख्ती बरतने के आदेश दिए। इसके बावजूद सोमवार को दो अलग-अलग जुलूस में 1500 से ज्यादा लोग सड़कों पर उतरे। यही नहीं खुद एसडीएम अंकिता जैन ने कहा कि दोनों आंदोलनों के लिए उनकी ओर से कोई अनुमति नहीं दी गई। हालांकि दोनों आंदोलनों की पूर्व सूचना विभिन्न मीडिया स्रोतों से जारी हो रही थीं।

ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि प्रशासन का खुफिया तंत्र इतने लोगों के जमावड़े का पूर्वानुमान क्यों नहीं लगा पाया। पहला आंदोलन बाल्मिकी संगठन का था। इसमें तकरीबन एक हजार लोग जुटे। यह आंदोलन हाथरस की घटना के विरोध में हुआ था। वहीं रघुवंशी महासभा के बैनर तले 500 से ज्यादा लोग जुटे। आरोन थाने के मूडराखुर्द में एक रघुवंशी परिवार के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत हुई कार्रवाई के विरोध में जुलूस निकालकर ज्ञापन दिया। इस दौरान कलेक्टोरेट में करीब आधा घंटे ड्रामा भी चला कि ज्ञापन एसडीएम काे नहीं सिर्फ कलेक्टर को सौंपा जाएगा।

खुफिया तंत्र फेल : एसडीएम ने कहा-दोनों आंदोलनों की अनुमति नहीं ली गई, जबकि प्रदर्शन की सूचना सोशल मीडिया पर कई दिनों से चल रही थी

  • रूट : आंदोलन प्रताप छात्रावास से शुरू होकर हाट रोड होते हुए कलेक्टोरेट तक पहुंचा। यहां राज्यपाल के नाम ज्ञापन दिया गया।
  • मुद्दा और मांग : मुद्दा था आरोन के मूडराखुर्द में विगत दिनों एक रघुवंशी परिवार के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा। संगठन का दावा है कि जिस परिवार के कहने पर यह मुकदमा कायम हुआ, उसने ही मारपीट की।
  • क्या हुआ : कलेक्टोरेट में आंदोलनकारी इस बात को लेकर अड़ गए कि वे कलेक्टर को ही ज्ञापन देंगे। इस दौरान पहले डिप्टी कलेक्टर सोनम जैन और बाद में दो बार एसडीएम अंकिता जैन भी आईं। पर प्रदर्शनकारियों ने उन्हें ज्ञापन नहीं दिया।

आंदोलन कर रहे लोगों में से कुछ ने कलेक्टर को बाहर निकालो नारे भी लगाए। लोग धरने पर बैठ गए। वे भजन भी गाने लगे।

रूट : शास्त्री पार्क से रैली शुरू हुई। यह सदर बाजार, हाट रोड होते हुए कलेक्टोरेट तक पहुंची।

मुद्दा और मांग : यह आंदाेलन उप्र के हाथरस कांड के विरोध में किया गया था। इसमें समाज संगठन की मांग थी कि हाथरस के कलेक्टर को बर्खास्त किया जाए। वहीं परिवार की अनुमति के बिना पीड़िता का दाह संस्कार करने वाले सभी अधिकारियों पर एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज हो।

क्या हुआ : रैली में करीब एक हजार से ज्यादा लोग थे। इसमें महिलाओं व बालिकाओं की संख्या बहुत थी। कई महिलाएं तो छोटे बच्चों को भी लेकर पहुंची थी। ज्यादातर लोगों ने मास्क नहीं लगाया था और आंदोलन की रूपरेखा ऐसी थी कि उसमें सोशल डिस्टेंसिंग का पालन तो संभव ही नहीं था।

कलेक्टोरेट पहुंचकर समाज संगठन के लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से ज्ञापन दिया।

व्यवस्थाओं का उल्लंघन

कोविड गाइड लाइन: अनलॉक 5 के तहत जारी गाइड लाइन में सामाजिक, राजनीतिक व सांस्कृतिक आयोजनों में 100 से ज्यादा लोगों के एकत्रित होने पर रोक है। इसमें भी शर्त यह है कि सभी मास्क पहनेंगे और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करेंगे।

धारा 144 : बमोरी उपचुनाव के चलते धारा 144 लागू है। इसमें बिना अनुमति जुलूस आदि निकालने पर रोक है। बिना अनुमति 4 से ज्यादा लोग एकत्रित नहीं हो सकते हैं। अगर कोई राजनीतिक या सामाजिक सभा आंदोलन करता है तो उसे एसडीएम से अनुमति लेना होगी।

महामारी अधिनियम : महामारी अधिनियम तो बीते 6 माह से लागू है। इसके तहत व्यक्ति या समूह की ओर से ऐसी कोई भी गतिविधि जिससे संक्रामक बीमारी फैलने का खतरा हो सकता हो, उस पर कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन ने पूरे प्रदर्शन की वीडियाग्राफी कराई है।

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