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आंकड़ों से खिलवाड़:मौतों के आंकड़े गोलमोल करने के बाद स्वास्थ्य विभाग के आदेश कागजों में से घट रहे संक्रमित

गुनाएक महीने पहले
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  • अब आंकड़ों में हारेगा कोरोना... मई में 85 फीसदी जांच आरएटी से करने पर पाॅजिटिविटी रेट 12 से 7% पर आयाौ

कोरोना से हो रही मौतों को गोलमोल करने के बाद अब संक्रमितों के आंकड़ों से खिलवाड़ करने की तैयारी शुरू हो गई है। 30 अप्रैल को स्वास्थ्य विभाग ने आदेश जारी किया है कि अब रोजाना होने वाली कोरोना जांच में 85 फीसदी आरएटी यानि रेपिड एंटीजन टेस्ट की हिस्सेदारी होगी।

जिले को 1400 जांच रोज करने का टारगेट दिया गया है। इसमें से आरएटी की हिस्सेदारी 1200 जांच की रहेगी। जबकि आरटी-पीसीआर जांच का आंकड़ा 200 तक सीमित कर दिया गया है। हैरानी की बात यह है कि करीब एक माह पहले 28 मार्च को जब स्वास्थ्य विभाग ने जांच के नए लक्ष्य तय किए थे तब आरएटी की हिस्सेदारी 30 फीसदी ही रखी गई थी। दूसरी लहर के खतरनाक होते स्वरूप के बीच गुना को 250 जांच रोज करने के निर्देश मिले थे। इनमें से 175 आर-पीसीआर और 75 आरएटी पद्धति से की जाना थी। जब से ये आदेश जारी हुआ है तब से जिले में संक्रमितों की संख्या लगातार घटती जा रही है। इससे कागजों में तो संक्रमित घटेंगे पर संक्रमण बढ़ेगा।

असर : 30 अप्रैल से पहले और बाद में ओवरऑल पॉजिटिविटी रेट कम हो गई
कोरोना जांच के लक्ष्यों में किए गए बदलाव का असर साफ देखा जा सकता है। 24 से 30 अप्रैल के बीच दोनों पद्धतियों से लिए गए कुल 4585 सैंपल की रिपोर्ट में 541 पॉजिटिव मिले। यानि पॉजिटिविटी रेट 11.79 या करीब 12 फीसदी रही। इसमें आरटीपीसीआर का हिस्सा 1560 था जबकि आरएटी की 3025 जांच रिपोर्ट प्राप्त हुईं। जबकि 1 मई से 5 मई तक कुल जांच (आरएटी + आरटी-पीसीआर ) 5589 हुईं, जिनमें 431 पॉजिटिव मिले। इस तरह पॉजिटिवटी रेट गिरकर 7.71 पर आ गई। इस दौरान प्राप्त कुल जांच रिपोर्ट में आरएटी का हिस्सा 4239 रहा। जबकि 24 से 30 अप्रैल के बीच इन आंकड़ों काे देखा जाए तो अप्रैल के दूसरे पखवाड़े से ही आरटी-पीसीआर के मुकाबले आरएटी पर बहुत ज्यादा जोर दिया जाने लगा था।

असल तस्वीर : आरटी-पीसीआर में पॉजिटिविटी रेट 12 गुना ज्यादा
ओवरऑल आंकड़ों में पूरी तस्वीर सामने नहीं आती। आरटी-पीसीआर और आरएटी जांच में मिलने वाले पॉजिटिव की संख्या से असल तस्वीर दिखती है। 1 से 5 मई तक आरएटी की कुल 4239 रिपोर्ट में मात्र 104 पॉजिटिव निकले। पॉजिटिविटी रेट रही 2.45 फीसदी। दूसरी ओर आरटी-पीसीआर से 1350 सैंपल की जांच हुई, जिनमें 327 पॉजिटिव निकले। यहां पॉजिविटी रेट रही 24.22 फीसदी। 24 से 30 अप्रैल के बीच भी दोनों पद्धतियों की पॉजिटिविटी रेट में दो गुना से ज्यादा अंतर रहा। इस अवधि में आरटी-पीसी आर जांच में 19.74 और आरएटी में 7.30 प्रतिशत पॉजिटिव केस मिले।

आरटीपीसीआर v/s आरएटी... कौन सी ज्यादा विश्वसनीय
आरटी-पीसीआर जांच को ज्यादा विश्वसनीय माना जाता है। वहीं आरएटी जांच में अगर कोई पॉजिटिव निकलता है तो इस बात की संभावना कम रहती है कि उसकी आरटी-पीसीआर जांच रिपोर्ट निगेटिव हो। दूसरी ओर पूर्व में यह निर्देश रहे हैं कि अगर किसी को कोरोना के लक्षण है और आरएटी जांच निगेटिव आती है तो पुष्टि के लिए दोबारा आरटी-पीसीआर जांच भी होनी चाहिए। यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग का मॉडल यही रहा है कि कुल जांच में आरएटी की हिस्सेदारी 30 फीसदी ही रहना चाहिए।

आरएटी पर ही जोर क्यों... सीएमएचओ ने नहीं दिया जवाब
इस मामले में सीएमएचओ डॉ. पी. बुनकर ने बताया कि कोरोना जांच का संशोधित लक्ष्य दिया गया है। इसमें अब 1400 जांच रोजाना करनी हैं। इनमें से 85 फीसदी सैंपल की जांच आरएटी पद्धति से की जाएगी। जब भास्कर ने उनसे पूछा कि आरएटी की जांच को विश्वसनीय नहीं माना जाता है तो उस पर ज्यादा जोर क्यों? इस पर डॉ. बुनकर ने कहा कि अब मैं कोई बात नहीं करूंगा। इसके बाद उन्होंने फोन काट दिया।

सवाल: क्या पॉजिटिविटी रेट कम दिखाने ऐसा हो रहा है!
सवाल यह है कि क्या पाॅजिटिविटी रेट कम दिखााने के लिए आरएटी पर जाेर दिया जा रहा है? स्वास्थ्य विभाग की उपसंचालक डॉ. वीणा सिन्हा के 30 व 28 अप्रैल को जारी पत्रों में ऐसा कोई स्पष्टीकरण नहीं मिलता है कि आरएटी जांच पर इतना जोर क्यों दिया जा रहा है। बस यही संकेत मिलता है कि आरटी-पीसीआर के लिए सैंपल का बोझ बढ़ रहा है।

दोनों जांच में फर्क क्या है
आरटी- पीसीआर टेस्ट : कोरोना वायरस की जांच का तरीका है। इसमें वायरस के आरएनए की जांच की जाती है। आरएनए वायरस का जेनेटिक मेेटेरियल है।
तरीका क्या है : नाक एवं गले के तालू से स्वैब लिया जाता है। ये टेस्ट लैब में ही किए जाते हैं।रिजल्ट आने में कितना समय लगता है : 12 से 16 घंटे

आरएटी : कोरोना संक्रमण के वायरस की जांच की जाती है।
तरीका क्या है : नाक से स्वैब लिया जाता है। वायरस में पाए जाने वाले एंटीजन का पता चलता है।
रिजल्ट आने में कितना समय लगता है : 20 मिनट

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