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आंकड़ों में हेराफेरी:नपा ने कोविड प्रोटोकॉल से कराए 5 अंतिम संस्कार, कोविड वार्ड इंचार्ज बोले-1 की मौत

गुना2 महीने पहले
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नपा को शवों को ले जाने के लिए निजी संस्थान की दो जीप मिली। - Dainik Bhaskar
नपा को शवों को ले जाने के लिए निजी संस्थान की दो जीप मिली।
  • कोविड बुलेटिन तक नियमित रूप से जारी नहीं हो रहा है जबकि अन्य जिलों में ऐसा नहीं है
  • स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में अप्रैल में सिर्फ 8 मौत
  • जबकि 4 दिन पहले बूढ़े बालाजी श्मशान में इतने शव जले कि परिक्रमा तक की जगह नहीं बची थी

कोविड से अप्रैल माह के दौरान कितनी मौत हुईं? यह सवाल स्वास्थ्य विभाग से पूछा जाए जवाब मिलेगा 21 अप्रैल तक कुल 8 मौत। वहीं अनाधिकृत रूप से यह संख्या बहुत ज्यादा हो सकती है। मसलन बुधवार को ही नपा के रिकाॅर्ड के मुताबिक कुल 13 लोगों की मौत हुई। इनमें से 5 का अंतिम संस्कार कोविड प्रोटोकॉल से किया गया। जबकि कोविड वार्ड के इंचार्ज डॉक्टर सिर्फ एक मौत की बात कर रहे हैं।

बुधवार को सोशल मीडिया पर सुबह से लेकर शाम तक शहर के कई जाने माने लोगों की मौत की खबरें चलती रहीं। सुबह सबसे पहले खबर आई हायर सेकंडरी क्रमांक 2 के प्राचार्य जयपाल भगत की मौत की। 20-21 अप्रैल की रात को उनको लगभग वही समस्या हुई जो कोविड के मरीजों को होती है।

उनके पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि समय पर इलाज न मिलने से उन्होंने दम तोड़ दिया। उनके बाद शिक्षा विभाग के ही डालचंद कश्यप, आजाद खां और अशफाक खां के निधन की खबर आई। इससे पहले मंगलवार को शिक्षक डालचंद कश्यप का निधन हुआ था। इनके अलावा भाजपा के वरिष्ठ नेता नरेश अग्रवाल के निधन की खबर ने सबको चौंका दिया। कैंट के बड़े कालोनाइजर अय्युब खां के निधन की खबर भी इसी दौरान मिली।

3 वजहों से मौतों का आंकड़ा गड़बड़ाया

1. संदिग्ध मरीज : कोविड से मौत में उन लोगों को शामिल नहीं किया जाता, जो आधिकारिक रूप से कोरोना संक्रमित नहीं हुए हैं। हालांकि उनके लक्षण बिल्कुल कोरोना जैसे थे और इसी वजह से उन्हें कोविड वार्ड में भर्ती किया गया था। बुधवार को ही कोविड वार्ड में ऐसे 13 मरीज थे, जिनकी रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं आई थी। अगर ऐसे मरीज की मौत हो जाती है तो स्वास्थ्य विभाग उसे कोविड से मौत नहीं मानता।

2. बाहर मौत : अगर किसी मरीज की मौत ग्वालियर, भोपाल या इंदौर सहित अन्य जगह पर हुई है तो उसकी मौत भी दर्ज नहीं होती। ऐसे लोगों की भोपाल या इंदौर में इसलिए गिनती नहीं होती, क्योंकि वे गुना के हैं। वहीं गुना में वे इसलिए दर्ज नहीं होते, क्योंकि उनकी मौत बाहर हुई। यह आंकड़ा बहुत ज्यादा हो सकता है।

3. छिपाना : ऐसे संकटकाल में सरकारी तंत्र पर अक्सर आरोप लगते हैं कि वह सच्चाई को छिपाने की कोशिश कर रहा है। संकट को जानबूझकर कम करके बताया जा रहा है। हाल के दिनों में कोविड संबंधी जानकारी सार्वजनिक करने को लेकर पारदर्शिता में गिरावट आ रही है। कोविड बुलेटिन तक नियमित रूप से जारी नहीं हो रहा है। जबकि अन्य जिलों में ऐसा नहीं है।

व्यवस्था पहले से ही तय है

पॉजिटिव व मृतकों के आंकड़े के लिए एक व्यवस्था तय है। आंकड़े कोविड वार्ड से जारी होते हैं। रोजाना का हेल्थ बुलेटिन जनसंपर्क अधिकारी को ही जारी होता है।
- पी. बुनकर, सीएमएचओ

5 का अंतिम संस्कार हुआ

बुधवार को पांच लोगों का अंतिम संस्कार कोविड गाइड लाइन के मुताबिक किया गया।
- तेज सिंह, सीएमओ नपा गुना

हालात के दो गवाह

शव वाहन : नपा ने पहली बार दो अतिरिक्त वाहन जुटाए : कोविड गाइड लाइन से अंतिम संस्कार करानी की जिम्मेदारी नगर पालिका की है। बीते कुछ दिनों में यह काम इतना बढ़ गया है कि नपा को दो शव वाहनों का इंतजाम करना पड़ा। इसके लिए दो लोड वाहनों की सेवाएं ली जा रही हैं। इसके अलावा एक वैन है ।

यह पहली बार है जब नपा इतने शव वाहनों का इंतजाम करना पड़ रहा है। सवाल यह है कि क्या यह तथ्य इस बात को साबित करता है कि कोविड से मौतों की संख्या उससे कहीं ज्यादा है, जो कोविड बुलेटिन में बताई जाती है।

मुक्तिधाम

नपा को शवों को ले जाने के लिए निजी संस्थान की दो जीप मिली।यहां पहली बार ऐसे हालात बनते देखे गए कि जब अंतिम संस्कार लिए जगह ही न बची हो। 4 दिन पहले बूढ़े बालाजी वाले मुक्तिधाम के दोनों शेड में अंतिम संस्कार के इतने अवशेष पहले से ही मौजूद थे कि नए शव दाह के लिए जगह नहीं थी। हालात ये थे कि चिता की परिक्रमा करना संभव नहीं हो रहा था।

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