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पर्यावरण दिवस:मनुष्य प्राकृतिक संतुलन का ध्यान रखे तो बिना किसी आपदा के पूरी पृथ्वी स्वर्ग है

गुनाएक वर्ष पहले
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  • पर्यावरण दिवस : कोरोना काल मनुष्य समुदाय को भविष्य का एक संकेत है कि हमें प्रकृति की मर्यादाओं को नहीं लांघना है

यदि मनुष्य समुदाय संपूर्ण प्राकृतिक संतुलन का ध्यान रखे तो बिना किसी आपदा के पूरी पृथ्वी स्वर्ग है। प्राकृतिक संसाधनों का असंतुलित दोहन और जीवों के प्रति अमानवीय व्यवहार ही मनुष्य के लिए कई प्रकार की आपदाओं बाढ़, तूफान, सूखा, बीमारी और महामारी जैसे हालातों का कारण है। जिसके कारण मनुष्य जाति हमेशा खतरे में है। यह बात कुलदीपिका सिंह मेमोरियल पर्यावरण जागरुकता अभियान के तहत पर्यावरण कार्यकर्ता सुचेताहंबीर सिंह ने लोगों से कही। उन्होंने कहा कि इस वर्ष पर्यावरण दिवस की थीम प्रकृति को समय दें है। प्रकृति की मर्यादाओं को लांघना, भयानक त्रासदी को निमंत्रण देना हैं। जिसका वर्तमान उदाहरण कोरोना महामारी है। इसके बचाव के लिए किए जा रहे विश्वव्यापी लाॅकडाउन व्यवस्था से प्रकृति में चारों और शुद्वता की एक झलक सभी को नजर आ रही है आकाश साफ है, तारे भी साफ दिख रहे हैं, नदियां भी साफ हैं, ओजोन परत भी स्वस्थ है। इसलिए विश्व समुदाय को आर्थिक संतुलन, जीवन संरक्षण व आवोहवा के संरक्षण के लिए यथार्थ रुप से अपनी विलासिता की जिंदगी के लिए संसाधनों का संतुलित उपयोग ही पर्यावरण और जैवविविधता संरक्षण के लिए कारगर हैं। वृक्ष हमें फल-औषधि, प्रकृति संतुलन, संपदा, प्राणवायु, जैवविविधता आदि अमृत देते हैं। इसलिए प्रत्येक मनुष्य को जीवन संरक्षण के लिए एक जिंदगी एक वृक्षारोपण का लक्ष्य तय करें। यदि प्रदूषण व ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन इसी प्रकार बढ़ता रहा तो ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव से बढ़ता वैश्विक तापमान, मौसम चक्र में अस्थिरता, पानी की कमी आदि कई आपदाओं को लाने के संकेत भी हैं। ग्लोबल वार्मिंग अगले 10 वर्ष के अंदर विश्व समुदाय के लिए बहुत ही खतरनाक साबित होने के भी संकेत हैं।

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