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मौसम की मार:19 साल में सबसे सूखा रहा जुलाई, सिर्फ 50 मिमी हुई बारिश, 2002 में 37.9 मिमी बरसा था पानी

गुना14 दिन पहले
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  • 6 में से 4 बांधों का जलस्तर डेड स्टोरेज पर, 1 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बोवनी नहीं हो पाई
  • 1970 से अब तक सिर्फ 2002 के जुलाई में 100 मिमी से कम बारिश हुई

2002 के बाद जुलाई 2021 सबसे सूखा साबित होने जा रहा है। औसतन 303 मिमी बारिश वाले इस माह में अब तक सिर्फ 50 मिमी बारिश हुई है। 1970 से अब तक सिर्फ एक ही (2002 में) ऐसा मौका आया है, जब 100 मिमी से कम बारिश हुई। अगर अगले 9 दिन में तेज बारिश न हुई ताे इस सूची में 2021 की जुलाई भी शामिल हो जाएगी।

अभी 867 मिमी बारिश की और दरकार
जिले में जून से सितंबर के बीच होने वाली औसत बारिश 1054 मिमी है। 21 जुलाई तक इसमें से सिर्फ 187 मिमी बारिश ही हुई है यानि बचे हुए 2 माह 10 दिन में 867 मिमी बारिश की और दरकार है। अगर जून और जुलाई में कम बारिश हो तो अगस्त-सितंबर में भी औसत के करीब बारिश ही हो पाती है।

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शहर और आसपास के पांच तालाब में एक भी ऐसा नहीं है जिसमें डेड स्टोरेज से ज्यादा पानी हो। यह फोटो गोपालपुरा तालाब का है, जिसके एक छोटे से गहरे हिस्से में ही पानी बचा है। 2018 के बाद दूसरी बार यह स्थिति बनी है। सिंगवासा तालाब में भी 20 फीसदी से कम हिस्से में पानी है। भुजरिया तालाब के गहरे हिस्से कुछ भरे हुए हैं। हिलगना का तालाब पूरा सूख गया है। बचा मकरावदा, जिसका जलस्तर भी डेड स्टोरेज से नीचे है।

पेयजल : पहली बार जुलाई में चल रहे हैं पेयजल के लिए टैंकर
शहर के कई इलाकों में जलसंकट गहरा गया है। जुलाई में पहली बार टैंकरों से पानी की सप्लाई की जा रही है। माथुर, सोनी कालोनी जैसे इलाकों में अभी टैंकर से पानी भेजा जा रहा है। तीन दिन पहले तक तो इन इलाकों में 4 से 5 टैंकर रोजाना भेजना पड़ रहे थे। शहर के कई दूसरे इलाकों में भी यही हालत हैं।

राघौगढ़ नल-जल योजना पर संकट
राघौगढ़ की निर्माणाधीन नल-जल योजना का मुख्य स्रोत गोपीसागर डेम है। इस साल से इसके चालू होने की संभावना थी। अगर बारिश कम हुई तो यह योजना टालना पड़ सकती है। क्योंकि बांध से एनएफएल और गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया को प्राथमिकता के आधार पर सप्लाई करना होती है। यही नहीं गुना और बमोरी के करीब 150 गांवों में भी इसी बांध से सप्लाई की योजना बन रही है। मौजूदा हालात देखकर लगता है कि इस योजना पर पुनर्विचार करना होगा।

असर दिखना शुरू
खरीफ सीजन :
जुलाई के बचे हुए दिनों में अगर तेज बारिश हो भी गई तो खरीफ सीजन में हुए नुकसान की भरपाई अब नहीं हो पाएगी। इस बार 1 लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में बोवनी नहीं हो पाई। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान सोयाबीन की फसल को हुआ है। इस बार इसका लक्ष्य 2.51 लाख हेक्टेयर था लेकिन बोवनी 50 हजार हेक्टेयर में ही सिमट गई। इस बार खरीफ सीजन में किसान को मक्का, दलहन जैसी फसलों पर निर्भर रहना होगा।

बांधों के हालात : 6 में से 4 बांध डेड स्टोरेज पर हैं। सिर्फ गोपीसागर डेम और राजीव सागर बांध में ही जलस्तर इससे ज्यादा है। गोपीसागर डेम के कुछ उथले हिस्से दिखाई देने लगे हैं। 2018 में यह बांध पहली बार पूरी तरह सूख गया था। अगर बारिश न हुई तो दुबारा से यही हालात देखने मिल सकते हैं। राजीव सागर बांध में भी डेड स्टोरेज से सिर्फ 12 फीसदी अधिक पानी है।

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