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कोरोना काल में कहां रहे आपके सांसद-विधायक:सिंधिया को हराने वाले सांसद केपी सिंह और MLA गोपीलाल गायब, मंत्री सिसोदिया और जयवर्द्धन जनता के बीच; लक्ष्मण सिंह ऑनलाइन लेते रहे हालचाल

गुना5 महीने पहले
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वेंटीलेटर की व्यवस्था को परखते मंत्री सिसोदिया। - Dainik Bhaskar
वेंटीलेटर की व्यवस्था को परखते मंत्री सिसोदिया।

कोरोना की दूसरी लहर में लोग अस्पतालों में बेड, रेमडेसिविर इंजेक्शन और ऑक्सीजन के लिए दर-दर भटक रहे थे। इस दौरान सबसे ज्यादा जरुरत उन्हें जनप्रतिनिधियों के सहयोग की थी। ऐसे में कुछ ने तो अपनी जिम्मेदारी निभाई, लेकिन ज्यादातर के चेहरे देखने के लिए जनता तरस गई। गुना में ज्योतिरादित्य सिंधिया को हराने वाले सांसद केपी सिंह और विधायक गोपीलाल जाटव पूरी तरह नदारद रहे। दोनों के गुमशुदा वाले पोस्टर वायरल होने के बाद गोपीलाल कुछ कार्यक्रमों और क्राइसिस मैनेजमेंट की बैठकों में जरूर दिखे।

चांचौड़ा विधायक लक्ष्मण सिंह भी ऑनलाइन ही बैठकों में शामिल होकर हालचाल लेते रहे। हां, प्रदेश सरकार में मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया और राघौगढ़ विधायक जयवर्द्धन सिंह जरूर जनता के बीच रहे। समय-समय पर व्यवस्थाओं को देखते रहे। आपको बताते हैं कि कोरोना काल में जनप्रतिनिधयों का क्या हाल रहा।

महेंद्र सिंह सिसोदिया (मंत्री)

बमोरी विधानसभा सीट से विधायक व प्रदेश सरकार में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया जिले के कोविड प्रभारी मंत्री भी रहे। कोरोना काल में ये आमजन के बीच उपलब्ध रहे। जिले में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का मामला हो या इंजेक्शन, ऑक्सीजन आदि की आपूर्ति के लिए प्रयास करना, मंत्री सिसोदिया सक्रिय नजर आए। जिला अस्पताल के साथ ही अपने विधानसभा क्षेत्र में बमोरी और झागर के स्वास्थ्य केंद्रों पर 50 बेड ऑक्सीजन युक्त शुरू कराए। जिला मुख्यालय से भी मरीज यहां जाकर भर्ती हुए। संभावित तीसरी लहर को देखते हुए बमोरी में ऑक्सीजन प्लांट की व्यवस्था कराई। जिला अस्पताल में सीटी स्कैन मशीनें शुरू कराने और कई वर्षों से बंद पड़े वेंटीलेटर शुरू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका। आपदा प्रबंधन की बैठकों में भी फ्रंटफुट पर काम किया।

डॉ. केपी सिंह यादव (सांसद )

दूसरी लहर में जनता इन्हें देखने के लिए तरसती रही। आमजन के बीच अप्रैल में तो नजर ही नहीं आए। गुना में केवल स्वास्थ्य विभाग के साथ दो बैठकों में ऑनलाइन शामिल हुए। मई में इनके गुमशुदा के पोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल हुए। इसके बाद ये दो बार दिखे। वह भी दूसरी लहर में केसों में जब गिरावट होना शुरू हुई। हाल में एक बार बमोरी और एक बार आरोन क्षेत्र में पहुंचे। सांसद यादव को लेकर जनता में नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि ऑक्सीजन, रेमडेसिविर और अस्पताल में बेड्स की व्यवस्था को लेकर सांसद की ओर से प्रयास नहीं किए गए।

सोशल मीडिया पर वायरल सांसद के गुमशुदा के पोस्टर
सोशल मीडिया पर वायरल सांसद के गुमशुदा के पोस्टर

गोपीलाल जाटव (विधायक गुना)

गुना विधानसभा सीट से विधायक गोपीलाल जाटव का भी कमोबेश यही हाल रहा। इनके भी गुमशुदा के पोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल हुए। इसके बाद से ये विभिन्न कार्यक्रमों ने दिखे। पोस्टर वायरल होने के बाद ही दो-तीन बार जिला अस्पताल में पहुंचे। पुलिस के खाना बांटने के कार्यक्रम में भी दिखे। इन्हें लेकर जनता के बीच नाराजगी है। लोगों का कहना है, विधायक जी को इंजेक्शन के लिए कई बार फ़ोन किए गए। ऑक्सीजन की व्यवस्था के लिए प्रयास किए, लेकिन सहायता नहीं मिली। गोपीलाल आपदा प्रबंधन की बैठकों में जरूर शामिल होते रहे।

जयवर्धन सिंह (विधायक, राघौगढ़ )

राघौगढ़ विधानसभा सीट से विधायक और पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ऑक्सीजन की व्यवस्था को लेकर चर्चा में रहे। जिले में पहला लिक्विड ऑक्सीजन सिलेंडर को रिसीव करने वह गुना पहुंचे। उन्होंने ही इस सिलेंडर को यहां प्रशासन को सौंपा। इस सिलेंडर को लेकर राजनीति भी हुई। भाजपा का कहना था कि मुख्यमंत्री के कहने पर जिंदल ने सिलेंडर भेजा, जबकि कांग्रेस का कहना था कि दिग्विजय सिंह और जयवर्धन सिंह के प्रयासों से इसे लाया गया है। राघौगढ़ क्षेत्र में वह सक्रिय रहे। वहां के लोगों के लिए इंजेक्शन, ऑक्सीजन आदि की उपलब्धता के लिए प्रयास किए। जिला आपदा प्रबंधन समिति के सदस्य रहे, लेकिन समिति की बैठक में शामिल नहीं हुए।

ऑक्सीजन सिलेंडर को प्रशासन को सौंपते विधायक जयवर्धन सिंह।
ऑक्सीजन सिलेंडर को प्रशासन को सौंपते विधायक जयवर्धन सिंह।

लक्ष्मण सिंह (विधायक, चांचौड़ा)

चांचौड़ा विधानसभा सीट से विधायक लक्ष्मण सिंह ऑनलाइन माध्यमों से जनता से संवाद करते नजर आए। केवल कुछ ही मौके थे, जब वे क्षेत्र में जनता के बीच में दिखे। लक्ष्मण सिंह तब चर्चा में आए, जब उन्होंने निजी कार एम्बुलेंस बनाकर जनता को समर्पित कर दी। इसके जरिए उन्होंने सरकार पर निशाना भी साधा। उनका कहना था कि अगर शासन और प्रशासन जनता को एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं करा रहा, इसलिए वे खुद ही अपनी कार एम्बुलेंस के रूप में उपयोग करने के लिए दे देंगे। वे भी जिला आपदा प्रबंधन समिति की बैठक में नजर नहीं आए।

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