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गुना में पटवारी को 15 वर्ष की कैद:किसानों की जमीन के फर्जी दस्तावेज बनाकर दूसरे के नाम कर दी; नायब तहसीलदार के फर्जी हस्ताक्षर भी किये

गुना2 महीने पहले
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प्रतीकात्मक फोटो। - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो।

गुना। जिले के बमोरी इलाके में पटवारी द्वारा फर्जी तरीके से किसानों की जमीन दूसरे के नाम कर दी। उस जमीन की ऋण पुस्तिकाएं भी बना दीं। न्यायालय में चले मामले में आरोपी पटवारी को तीन अलग-अलग धाराओं में 5-5 वर्ष की सजा सुनाई गई है। साथ ही जिसके नाम जमीन की ऋण पुस्तिका बनाई, उस व्यक्ति को भी न्यायालय ने सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपियों पर 3-3 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।

मामला वर्ष 2009 का है। रितुराज रागी बमोरी इलाके के ग्राम पारोदा में पटवारी पद पर पदस्थ थे। उन पर माधोपुरा गांव का भी चार्ज थे। उन्होंने कई किसानों की जमीनों की फर्जी ऋण पुस्तिकाएं तैयार कर उनपर नकली हस्ताक्षर किए। इसी तरह पारोदा गांव की में 4 लोगों की संयुक्त जमीन के भी नकली दस्तावेज तैयार कर उसे रामकिशन धाकड़ के नाम कर दी। कंप्यूटर में भी फर्जी तरीके से दस्तावेज बदल दिए। खसरे में भी जमीन रामबाई सहरिया, रामरतन सहरिया के नाम से हटाकर रामकिशन धाकड़ के नाम कर दी।

पटवारी हलकों की जांच के दौरान पूरा मामला खुला। SDM ने मामले की जांच कराई, जो तहसीलदार और राजस्व निरीक्षक ने की। इसके बाद नायब तहसीलदार के प्रतिवेदन पर पटवारी के खिलाफ फतेहगढ़ थाने में मामला दर्ज किया गया था। पटवारी रितुराज और रामकिशन धाकड़ के खिलाफ फतेहगढ़ थाने में धोखाधड़ी और शासकीय दस्तावेजों में कूटरचना करने की धाराओं में माला दर्ज किया गया। FIR दर्ज होने के बाद पटवारी को गिरफ्तार किया गया। 3 दिन बाद उन्हें जमानत मिल गयी। न्यायालय में लगभग 10 वर्ष चली सुनवाई के बाद मंगलवार को न्यायालय ने दोनों को दोषी माना।

SC-ST एक्ट के विशेष न्यायाधीश रविन्द्र कुमार भद्रसेन ने सुनवाई करते हेमंगलवार को सजा सुनाई। न्यायालय ने आरोपी पटवारी रितुराज रागी और रामकिशन धाकड़ को तीन धाराओं में अलग-अलग 5-5 वर्ष की सजा सुनाई। साथ ही आरोपियों पर 3-3 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। जुर्माना न भरने की स्थिति में 1-1 वर्ष की सजा और भुगतनी होगी। मामले में शासन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक परवेज अहमद ने की।

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