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गुना में नायब तहसीलदार पर कोर्ट आगबबूला:कहा- आपको ज्ञान ही नहीं दुष्कर्म में बच्ची से आरोपी की पहचान कैसे कराई जाती है, मासूम का बचपन उजाड़ दिया

गुना8 महीने पहले

मध्यप्रदेश में एक अधिकारी को संवेदनशील मामले में लापरवाही पर कोर्ट ने जमकर फटकार लगाई। मामला गुना का है। यहां 8 साल की बच्ची से रेप के मामले में कोर्ट ने गुना के नायब तहसीलदार पर सख्त टिप्पणी की है। नायब तहसीलदार ने बच्ची की शिनाख्त परेड में लापरवाही बरती थी। कोर्ट ने कहा- नायब तहसीलदार जैसे पद पर बैठे व्यक्ति को इतनी भी समझ नहीं कि दुष्कर्म के मामले में बच्ची से आरोपी की पहचान कैसे कराई जाती है।

कोर्ट ने कहा कि बच्ची के शारीरिक जख्म तो भर जाएंगे, लेकिन बच्ची का बचपन उजाड़ दिया। उसे पहुंचे मानसिक आघात की भरपाई नहीं की जा सकती। मामले की सुनवाई सोमवार को विशेष न्यायाधीश वर्षा शर्मा की कोर्ट में हुई। इस मामले में कोर्ट ने आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

आरोपी ने दो साल पहले की थी वारदात

मामला 2020 का है। गुना के सिरसी इलाके में 13 सितंबर को 8 साल की बच्ची खेत पर खीरा खाने गई थी। इसी दौरान आरोपी अरुण बारेला (22) उसे जबरदस्ती पास के खेत में ले गया, जहां बच्ची के साथ रेप किया। बच्ची ने चिल्लाने की कोशिश की, तो आरोपी ने उसका गला दबा दिया। फिर बच्ची को बेहोशी की हालत में छोड़कर भाग गया। दूसरे व्यक्ति ने बच्ची को देख परिवार वालों को सूचना दी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। जांच के बाद पुलिस ने अभियोग पत्र कोर्ट में पेश किया। करीब डेढ़ वर्ष चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने अरुण बारेला (22) को उम्रकैद सुनाई।

नायब तहसीलदार पर सख्त टिप्पणी

तत्कालीन नायब तहसीलदार भारतेंदु यादव ने मामले में बच्ची से आरोपी की पहचान करवाई।
तत्कालीन नायब तहसीलदार भारतेंदु यादव ने मामले में बच्ची से आरोपी की पहचान करवाई।

तत्कालीन नायब तहसीलदार भारतेंदु यादव ने मामले में बच्ची से आरोपी की पहचान करवाई। इसमें उन्होंने दोनों का आमना-सामना करवाते हुए आरोपी के सिर पर हाथ रखकर पहचान करवाई। नियमानुसार ऐसे मामलों में आरोपी का आमना-सामना सीधे रूप से नहीं कराने का नियम है। पीड़िता की पहचान समस्त बिंदुओं पर छिपाई जाती है। इस करतूत पर कोर्ट ने कहा कि 'नायब तहसीलदार जैसे पद पर आसीन अफसर को इतना भी ज्ञान नहीं है कि पॉक्सो एक्ट के मामले में छोटी बच्ची से किस प्रकार आरोपी की शिनाख्त कराई जाती है।’

कोर्ट ने कहा- बच्ची का बचपन छीन लिया

न्यायालय ने अपने निर्णय में यह भी कहा कि 'आरोपी का कृत्य पशु की मानसिकता का प्रतीक है। चूंकि लड़की, जो किशोरावस्था भी प्राप्त नहीं कर पाई थी। आरोपी ने उसका बचपन छीन लिया। समय के साथ बच्ची शारीरिक क्षति को तो भुला सकती है, लेकिन उसके साथ हुई घटना से उसे जो मानसिक आघात लगा है, उसकी पूर्ति नहीं हो सकती। आरोपी का अपराध समाज के विरुद्ध है। ऐसे में उसे रियायत नहीं दी जा सकती।

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