ये तो हद है:सिंध नदी के ब्रिज के पास रेत खनन के लिए 3 से 4 फीट गहरे गड्‌ढे किए

गुना2 वर्ष पहले
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नदी से रेत उठाने के तौर-तरीके हैं, लेकिन इसका कभी पालन ही नहीं होता है। अवैध खनन की बात तो अलग ही है, अगर वैध तरीके से रेत उठाने के तरीके को देख लिया जाए तो पैरों तले जमीन खिसक जाएगी। शहर से मात्र 20 किमी दूर स्थित सिंध नदी पर बने ब्रिज से अगर नदी की स्थिति देखें तो हैरान कर देने वाली है।

इसके दोनों तरफ रेत की खुदाई चल रही है। रेत को छन्ने से छानकर एकत्रित की जा रही है। नियमानुसार ब्रिज के पास पास खुदाई नहीं की जा सकती है, क्योंकि इससे इसके ढांचे को नुकसान हो सकता है। दूसरा नियम है कि रेत सिर्फ उठाई जा सकती है, नदी में गड्‌ढे नहीं किए जा सकते हैं।

शहर से मात्र 20 किमी दूर ही ऐसे हालात...तो सोचो ग्रामीण क्षेत्रों में क्या हाल होगा

नियम: ब्रिज के पास खुदाई नहीं कर सकते, ढांचे को नुकसान पहुंच सकता है
रेत खदानों की नीलामी के बाद रेत उठाने के नियम स्पष्ट हैं। मानव संसाधन लगाकर ही इसे निकाला जा सकता है लेकिन जिले में नदियों की स्थिति से साफ होता है कि किस तरीके से खुदाई की गई है। पनडुब्बी, जेसीबी तक पकड़ी गई हैं। वहीं ब्रिज के आसपास तो रेत उठाई ही नहीं जा सकती है, क्योंकि इससे ढांचे को नुकसान हो सकता है।
जगह-जगह रेत एकत्रित

ब्रिज के आसपास ही जगह-जगह रेत एकत्रित कर रेत की ट्रैक्टर-ट्राली से ढुलाई हो रही है। दिन के समय कुछ लोग इसे हाथों से उठाते हुए दिख जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात में मशीनरी से खुदाई की जाती है और सुबह दिखाने के लिए मानव संसाधन लगाया जाता है।

नियम: ब्रिज के पास खुदाई नहीं कर सकते, ढांचे को नुकसान पहुंच सकता है
रेत खदानों की नीलामी के बाद रेत उठाने के नियम स्पष्ट हैं। मानव संसाधन लगाकर ही इसे निकाला जा सकता है लेकिन जिले में नदियों की स्थिति से साफ होता है कि किस तरीके से खुदाई की गई है। पनडुब्बी, जेसीबी तक पकड़ी गई हैं। वहीं ब्रिज के आसपास तो रेत उठाई ही नहीं जा सकती है, क्योंकि इससे ढांचे को नुकसान हो सकता है।
जगह-जगह रेत एकत्रित

ब्रिज के आसपास ही जगह-जगह रेत एकत्रित कर रेत की ट्रैक्टर-ट्राली से ढुलाई हो रही है। दिन के समय कुछ लोग इसे हाथों से उठाते हुए दिख जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात में मशीनरी से खुदाई की जाती है और सुबह दिखाने के लिए मानव संसाधन लगाया जाता है।

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