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BJP की जिला कार्यकारिणी घोषित होने में देरी:गुना में सिंधिया समर्थक, अशोकनगर में जातीय समीकरण, शिवपुरी में यशोधरा राजे बड़ा फैक्टर

गुना6 महीने पहले
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गुना स्थित BJP कार्यालय। - Dainik Bhaskar
गुना स्थित BJP कार्यालय।

गुना, शिवपुरी और अशोकनगर में लंबे समय से BJP की जिला कार्यकारिणी घोषित नहीं हो पाई है। तीनों ही जिले में बिना कार्यकारिणी के संगठन की गतिविधियां चल रही हैं। 3 दिन पहले भोपाल में हुई संगठन की बैठक में जिलाध्यक्षों को जल्द कार्यकारिणी घोषित करने के निर्देश मिले हैं। इन सभी जिलों में अब दावेदार भी सक्रिय हो गए हैं। पार्टी सूत्रों की मानें तो जिलाध्यक्षों ने कार्यकारिणी की सूची प्रदेश कार्यालय भेज भी दी है, लेकिन वहां से फाइनल नहीं हो पा रहा है।

कार्यकारिणी घोषित होने में हो रही देरी से कई कार्यकर्ताओं के सब्र का बांध भी टूटने लगा है। पार्टी की कई बैठकों में वह ये मुद्दा उठा भी चुके हैं। गुना में तो कार्यकर्ताओं ने यहां तक कह दिया कि यहां पार्टी वन मैन आर्मी के रूप में चल रही है। घोषणा में हो रही देरी का कारण BJP कार्यकर्ता सिंधिया समर्थकों को मानते हैं। उनका मानना है कि इन्ही को एडजस्ट करने की वजह से अभी तक कार्यकारिणी की घोषणा नहीं हो पाई है। हालांकि, उनके आने के पहले भी गुना ने कार्यकारिणी घोषित नहीं हुई थी। जिलाध्यक्ष एक वर्ष तक बिना कार्यकारिणी के ही काम चला रहे थे। तीनों जिलों में अलग-अलग समीकरणों के चलते अभी तक कार्यकारिणी नहीं बन पाई है।

गुना जिलाध्यक्ष ने भेजी सूची

BJP जिलाध्यक्ष का यह दूसरा टर्म है। 2018 के विधानसभा चुनावों से पहले उन्हें जिले में संगठन की कमान सौंपी गई थी। हालांकि जिलाध्यक्ष एक वर्ष बाद चुने जाने थे, लेकिन उन्हें एक वर्ष पहले ही पार्टी की कमान सौंपी दी गयी। उसके एक वर्ष बाद कार्यकारिणी का कार्यकाल पूरा हुआ। चूंकि सिकरवार एक वर्ष ही जिलाध्यक्ष रह पाए थे, इसलिए उन्हें दूसरा टर्म भी दे दिया गया। तभी से वह पुरानी कार्यकारिणी के साथ ही काम कर रहे हैं।

पार्टी सूत्रों के अनुसार कई महीनों तक चले विचार-विमर्श के बाद उन्होंने एक सूची प्रदेश पदाधिकारियों को भेजी है। इस सूची में एक-एक पद के लिए 4 से 6 नाम हैं। यही वजह है कि किसी एक के नाम पर प्रदेश भी मोहर नहीं लगा पा रहा है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ उनके कई समर्थक भी BJP में आये। सिंधिया उन्हें भी पूरा सम्मान दिलाना चाहते हैं। BJP और मोर्चों की प्रदेश कार्यकारिणी में सिंधिया ने अपने कई समर्थकों को एडजस्ट करवाया। गुना में तो अधिकतर में उनके समर्थकों का ही दबदबा रहा है। जिले की कार्यकारिणी में भी सिंधिया समर्थक पद की लाइन में लगे हुए हैं। यही वजह है कि घोषणा में देरी हो रही है। कुछ मूल BJP के कार्यकर्ता तो दबी जुबान से यह भी कहने लगे हैं कि जिलाध्यक्ष खुद ही नहीं चाहते कि कार्यकारिणी की घोषणा जल्द हो। वे अकेले ही संगठन चलाना चाहते हैं।

अशोकनगर में जातीय समीकरण बड़ा फैक्टर

अशोकनगर में कार्यकारिणी में दो बड़े फैक्टर काम कर रहे हैं। यहां सिंधिया समर्थकों को एडजस्ट करने के साथ-साथ जातीय समीकरण भी बैठाना होगा। इसी जद्दोजहद में अभी तक कार्यकारिणी लटकी हुई है। वहां यादव और रघुवंशी बड़ी संख्या में हैं। दोनों ही समाजों के कार्यकर्ता उचित सम्मान के लिए लगे हुए हैं। वहीं सांसद केपी यादव की दखल भी काफी हद तक रहेगी। उनके समर्थकों को भी एडजस्ट करने की चुनौती BJP के सामने होगी। सिंधिया समर्थकों और उनके समर्थकों में अभी तक स्थिति सामान्य नहीं हो पाई है। गुना में तो BJP विधायक तक के जन्मदिन के बैनरों से सांसद यादव को गायब कर दिया गया था।

शिवपुरी में त्रिकोणीय मामला

यहां ज्योतिरादित्य सिंधिया और BJP के साथ-साथ यशोधरा राजे सिंधिया भी बड़ा फैक्टर मानी जाती हैं। उनके समर्थकों को भी वे अच्छा पद दिलाना चाहती हैं। अभी तक मामला एकतरफा होने से उनके समर्थक आसानी से कार्यकारिणी में अच्छे पदों पर पहुंच जाते थे, लेकिन सिंधिया के आने के बाद मामला त्रिकोणीय हो गया है। हालांकि अभी तक दोनों चुनावों में एक-दूसरे के क्षेत्र में ज्यादा दखल नहीं देते थे। कई मामलों में दोनों की एक-दूसरे से नाराजगी सामने आ चुकी है। पर अब दोनों एक ही पार्टी में साथ-साथ हैं। ऐसे में BJP को दोनों को खुश करना आसान नहीं होगा।