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जिंदगी जिंदाबाद!:दंपती की उम्र 82 और 75 साल, अस्थमा-बीपी भी है; फुटबॉलर पोते को टीवी पर देखने की चाह और जीने की ललक से कोरोना को हराया

आशीष रघुवंशी/ गुना14 दिन पहले
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चंपालाल और उनकी पत्नी ने हाल में कोरोना को मात दी है। - Dainik Bhaskar
चंपालाल और उनकी पत्नी ने हाल में कोरोना को मात दी है।

82 साल के चंपालाल सुमन। उनकी 75 वर्षीय पत्नी जानकी देवी। गुना की गुर्जर कॉलोनी में रहते हैं। चंपालाल खुद अस्थमा और जानकी देवी बीपी से पीड़ित हैं। बावजूद जीने की ललक, परिवार का साथ, नियमित रूटीन और फुटबॉलर पोते को टीवी पर देखने की चाहत की बदौलत दोनों ने कोरोना को हरा दिया। हां, इस दौरान उन्हें सरकारी सिस्टम से निराशा मिली, लेकिन फिर भी वर्तमान हालातों को देखकर स्वीकार कर लिया।

दंपती को 15 अप्रैल से पहले हल्का बुखार आया था। परिवार ने कोविड टेस्ट कराने की बात कही। 15 तारीख से कई प्रयासों के बाद सिविल अस्पताल में तीन दिन बाद 18 अप्रैल को बमुश्किल टेस्ट के लिए नंबर आया। रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद घर में सूचना बोर्ड लगाकर सील कर दिया गया।

सीएम हेल्पलाइन में शिकायत के बाद मिली दवा

प्रशासन ने घर तो सील कर दिया। दवाई भी नहीं दी गई। दो दिन बाद सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत की। उसके बाद किट उपलब्ध कराई गई। चंपालाल का कहना है कि ‘ मैं समझता हूं कि प्रशासन पर दबाव है, लेकिन फिर भी ये बड़ी चूक है। दंपती ने तय कि जिंदा रहना है और बीमारी से जीतना है। एक ही इच्छा है, फुटबॉलर पोते को टीवी पर खेलते हुए देखना है। पोता कोलकाता चार साल से कई मैच खेल चुका है।

अस्पताल जाने से डर लगा

सीटी स्कैन कराया, तो उसमें 25/25 संक्रमण आया। चंपालाल बताते हैं कि चूंकि मुझे अस्थमा और पत्नी ब्लडप्रेशर की बीमारी है। इस कारण भी हम घबरा रहे थे। अस्पताल में देखा, तो जगह नहीं मिली। हालत देखकर हॉस्पिटल जाने से भी डर लगने लगा था। फिर घर पर ही डॉक्टरों के मार्गदर्शन में कोरोना को हराने का निर्णय किया।

रूटीन में किया सुधार

दोनों ने डेली रूटीन सुधारा। सुबह जल्दी उठना। दिन में चार बार भाप लेना, सुबह-शाम छाती के बल उल्टा लेना, दूध हल्दी और गुड़ का दूध, काढ़ा, गरम पानी साथ ही गरारे करना शुरू कर दिया। खाने में प्रोटीनयुक्त चीजें ज्यादा खाईं। इन सबके साथ नियमित दवाई। इस दौरान बहू समेत पूरे परिवार ने हिम्मत बंधाई और सेवा की। आत्मबल से परिणाम 10 दिन में दोनों ही कोरोना को हराकर नॉर्मल जिंदगी में लॉट आए।

दोनों ही एक-दूसरे का संबल बने

दोनों पति -पत्नी एक-दूसरे के सम्बल बने। साथ मिलकर कोरोना से लड़े। वह बताते हैं, सबसे बड़ी आस यही थी कि अपने पोते को टीवी पर देख पाएं। इसी उम्मीद ने हमें सबसे ज्यादा आशा दी और कोरोना से जीत पाए। वह कहते हैं कि डॉक्टर की सलाह और आत्मबल के साथ इसे हराया जा सकता है। हर स्थिति में सकारात्मक बने रहें , ये सबसे ज्यादा जरूरी है।

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