लॉकडाउन में लगे ताले अनलॉक में भी नहीं खुले / कई वार्डों में खाली है पलंग फिर भी जमीन पर कर रहे इलाज

The bed is empty in many wards, yet treatment is being done on the ground
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The bed is empty in many wards, yet treatment is being done on the ground

दैनिक भास्कर

Jun 30, 2020, 04:00 AM IST

गुना. कोरोना संक्रमण  से  लॉकडाउन में अस्पतालों की ओपीडी तक बंद कर दी गई थी। वहीं वार्डों में ताले जड़ दिए थे, सिर्फ इमरजेंसी सेवाएं दी जा रही थीं। अब अनलॉक हो चुका है, इसके बावजूद भी 3 माह पहले वार्डों में लगाए गए तालों को नहीं खोला गया है। ऐसे ही हालात जिला अस्पताल के हैं। यहां पर कई वार्डों में पलंग खाली हैं पर वे ताले में बंद हैं जिससे मरीजों का इलाज स्ट्रेचर और जमीन पर लिटाकर किया जा रहा है।  
ज्यादातर वार्ड इंचार्ज ने अस्पताल प्रबंधक को पलंग की कमी होने की सूचना दे दी है, इसके बाद भी बंद वार्डों को नहीं खोला जा रहा है। मरीज गर्मी से भी परेशान हैं, एक हॉल में सिर्फ 3 या 4 पंखे लगे हैं, इससे हवा तक नहीं मिल पा रही है। इसलिए मजबूरी में लोगों को घर से ही पंखे लाना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि कई वार्ड में तो हर मरीज के पलंग के पास एक घर का पंखा रखा हुआ है। जिला अस्पताल की नई इमारत की मेडिकल विंग में एक वार्ड पूरा खाली पड़ा है। इसके अलावा शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र की इमारत में भी मेडिकल वार्ड खाली पड़ा है। इसके अलावा यहीं पर फीमेल वार्ड भी खाली पड़ा है।  इन सभी जगहों पर पलंग खाली पड़े हैं पर यहां मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। 

पैसे ठिकाने लगाने का तरीका:  मेडिकल वार्ड की नई बिल्डिंग में तोड़फोड़ शुरू
जिला अस्पताल के मेटरनिटी विंग के पास मेडिसिन, डायलिसिस और शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र की विंग संचालित होती हैं। यह बिल्डिंग करीब 2 साल पहले ही जिला अस्पताल को तैयार कर सौंपी गई थीं। यह बिल्डिंग नई हैं, लेकिन कोरोना काल में इसमें भी  काम निकाल लिया गया है। इसके भवन को तोड़ा जा रहा है। इसके पास ही एक पूरा का पूरा वार्ड भी बंद पड़ा है। इन नई बिल्डिंग में फिर से काम चल रहा है, बताया जाता है कि इसे माइनर ओटी के लिए तैयार किया जा रहा है। अब सवाल पैदा होता है कि जब इस बिल्डिंग के निर्माण से पहले जो प्लानिंग की गई थी, अब उसमें ही बदलाव किया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि यह पैसे की बर्बादी है, पहले ही सोच-समझ कर काम होने चाहिए थे। सिर्फ सरकारी फंड को ठिकाने लगाने के लिए नई तरह की प्लानिंग की जाती हैं।

हैरत... मरीज को जिस स्ट्रेचर से इधर उधर लाया जाता है, उसी पर चल रहा इलाज
 जिला अस्पताल में ओपीडी से लेकर अन्य स्वास्थ्य सेवाएं चालू कर दी गई हैं लेकिन वार्डों में अब भी अव्यवस्थाएं फैली हुई हैं। कई वार्ड ऐसे हैं जहां मरीजों के लिए पलंग तक नहीं मिल रहे हैं, उन्हें जमीन पर ही जगह दी जा रही है। मरीज को जिस स्ट्रेचर से इधर से उधर ले जाया जाता है। इसी पर लिटा कर ड्रिप तक लगाई जा रही है। 

शिकायत करना बेमानी क्योंकि कोई सुनने वाला नहीं
जिला अस्पतालों के कई वार्ड में मरीज उमस और गर्मी से बेहाल हैं, कई ऐसे वार्ड हैं, जहां कूलर तक नहीं लगाए गए हैं। इस वजह से लोगों को घरों से पंखे लाने पड़ रहे हैं। बर्न वार्ड के सामने वाले वार्ड में तो यह स्थिति थी कि हर ज्यादातर पलंगों पर मरीजों के अटेंडरों ने पंखे लाकर रखे थे।  मरीजों का कहना था कि मजबूरी में घर से पंखे लाना पड़ रहे हैं, कई बार शिकायत कर चुके हैं कि कम से कम 3 से 4 कूलर हॉल में रखे जाएं, तब गर्मी से राहत मिलेगी। लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।

जिला अस्पताल में कई वार्ड में मरीजों को जमीन पर लिटा का इलाज किया जा रहा है, इस मामले में आपका क्या कहना है?
-ऐसा नहीं है सभी मरीजों को पलंग पर ही जगह दी जाती है, अस्पताल प्रबंधक लगातार नजर रखता है।
मरीज जमीन पर लेटे हैं, इसके हमारे पास फोटाे हैं, स्ट्रेचर पर ही इलाज किया जा रहा है ?
-कहां की बात हैं, वैसे ऐसा नहीं होना चाहिए, हमने तो अस्पताल में निरीक्षण किया था, उस समय तो सब ठीक था, हमारे निरीक्षण के बाद हो सकता है कि कुछ ऐसा हुआ हो।
कई वार्ड में पलंग खाली हैं, इसके बाद भी जमीन पर इलाज देना क्या ठीक है?
-वैसे तो कोशिश की जाती है सभी को पलंग मिलें अगर पलंग होने के बाद भी सुविधा नहीं मिल रही है तो इसे ठीक कराएंगे।
अस्पताल के वार्डों में गर्मी से मरीज परेशान हैं, उन्हें पंखे, कूलर तक घरों से लाना पड़ रहे हैं?
-ऐसा नहीं है, हमने कई वार्ड में कूलर रखवाएं हैं, अगर मरीज पंखे ला रहे हैं तो यह गलत बात है?
जब मरीजों गर्मी से परेशान हैं, कूलर नहीं है तो वह मजबूरी में ही तो घर से पंखे लाएंगे?
-मेरे हिसाब से तो ऐसा कोई मरीज नहीं है जो पंखे घर से लाया हो, सिविल सर्जन और हम निरीक्षण करते हैं?
मेडिसिन वार्ड की नई बिल्डिंग में तोड़फोड़ हो रही है
- यहां पर माइनर ओटी बनाई जा रही है।
 2 से 3 साल पहले जब बिल्डिंग बनी थी, उस समय प्लानिंग नहीं हुई थी कहां पर क्या बनना है। 
- मुझे से सिविल सर्जन ने प्लानिंग बताई थी, कहा था माइनर ओटी यहां बनाएं।

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