पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Mp
  • Bhopal
  • Guna
  • The Fight Took Place From The District Court To The Supreme Court, But Still Could Not Be Settled; The Case Ended In 1987 By Mutual Conciliation In Lok Adalat

34 साल बाद आखिर राजीनामे से निपटा केस:जिला अदालत से सुप्रीम कोर्ट तक हुई लड़ाई, फिर भी नहीं हो पाया निपटारा; लोक अदालत में आपसी सुलह से खत्म हुआ 1987 में लगा केस

गुना10 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
राजीनामे के बाद पक्षकारों को पौधा देते जिला प्रधान न्यायाधीश। - Dainik Bhaskar
राजीनामे के बाद पक्षकारों को पौधा देते जिला प्रधान न्यायाधीश।

गुना। पैसे के लेन-देन का जो विवाद सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद भी नहीं सुलझा, उसे लोक अदालत ने आपसी सहमति से सुलझा लिया। मामला वर्ष 1987 में दर्ज किया गया था जो जिला अदालत, हाई कोर्ट होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। वर्ष 2000 में सुप्रीम कोर्ट में भी निर्णय हो गया, लेकिन उसका पालन नहीं हो पाया। शनिवार को आयोजित की गई लोक अदालत में आपसी राजीनामे से यह मामला सुलझा लिया गया।

दरअसल, गुना जिले में 1984 में नेशनल फर्टिलाइजर लिमिटेड(NFL) के नींव रखी गयी। वर्ष 1987 तक उसका काम लगभग पूरा हुआ और लोकार्पण किया गया। इस इलाके में सड़क बनाने का काम दिल्ली की निजी एजेंसी नागिया कंस्ट्रक्शन ने किया। उन्होंने काम तो पूरा कर दिया लेकिन उन्हें भुगतान नहीं किया गया। भुगतान को लेकर NFL और निर्माण एजेंसी में ठन गयी। भुगतान न होने पर सड़क निर्माण एजेंसी ने जिला अदालत में सिविल केस दर्ज करा दिया।

जिला अदालत ने इस मामले में एक पंच नियुक्त किया। पंच ने सड़क निर्माण एजेंसी के पक्ष को सही मानते हुए भुगतान करने को कहा। NFL में इस फैसले से असंतुष्ट होकर हाई कोर्ट में अपील की। वहां से भी एजेंसी के पक्ष में निर्णय हुआ जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। वर्ष 2000 में सुप्रीम कोर्ट ने भी एजेंसी के पक्ष में ही निर्णय दिया। कोर्ट ने NFL को निर्देश दिए कि वह कंपनी को 92 लाख रुपये का भुगतान करे। बाकी राशि के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने जिला अदालत को डिक्री पारित करने को कहा।

जिला अदालत में मामला वापस आते ही फिर पेंच फंस गया। NFL प्रबंधन ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्देशित की गई राशि का भुगतान नहीं किया। जिला अदालत में फिर मामला खींचता चला गया। दोनों ही पक्ष मानने को तैयार नहीं थे। इस कारण मामला लगातार बढ़ता चला जा रहा था। 15 साल की लंबी लड़ाई के बाद आखिरकार शनिवार को मामला सुलझा लिया गया। 92 लाख की राशि बढ़ते हुए 1.23 करोड़ पहुंच गई।

लोक अदालत में मामला रखा गया और आपसी समझौते से ही मामले को निपटाने के प्रयास किये गए। लोक अदालत के जज की यह कोशिश रंग लाई और एक पॉइंट पर आकर दोनों पक्ष राजीनामे के लिए सहमत हो गए। लोक अदालत ने 1.23 करोड़ की राशि मे से 57 प्रतिशत राशि निर्माण एजेंसी और 43 फीसदी राशि NFL प्रबंधन को देने के लिए कहा। इस पर दोनों पक्ष सहमत हो गए। निर्माण एजेंसी के वकील पदमचंद जैन ने बताया कि मामले को सुलझने में 34 साल लग गए। आखिरकार शनिवार को मामला सुलझ गया। कोर्ट ने बीच का रास्ता निकाला, जिससे दोनों ही पक्ष सहमत हुए।

खबरें और भी हैं...