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हाल-ए-बेहाल जिला अस्पताल ...:मेडिकल वार्ड का मुख्य गेट बंद, टूटे दरवाजे के दो फुट के छेद में से निकलने को मजबूर मरीज; पूछताछ केंद्र पर 5 महीनों से कोई स्टाफ नहीं बैठा

गुना3 महीने पहले
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मेडिकल वार्ड के टूटे दरवाजे से इस तरह बाहर निकलते हैं मरीज। - Dainik Bhaskar
मेडिकल वार्ड के टूटे दरवाजे से इस तरह बाहर निकलते हैं मरीज।

गुना। पहले से ही परेशानियों का सामना करते हुए अस्पताल पहुँचने वाले मरीजों को जिला अस्पताल में भी परेशानियों से ही गुजरना पड़ रहा है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा मेडिकल वार्ड का दरवाजा बंद कर दिया गया है। इस वजह से मरीजों को टूटे हुए दरवाजे के बीच में से निकलना पड़ रहा है। गेट में एक ढाई फ़ीट का छेद है जिसमे से मरीज बाहर निकलते हैं और अंदर जाते हैं। प्रशासनिक और मंत्रियों के दौरे के समय तो यह गेट खुला हुआ रहता है, लेकिन उसके बाद बंद कर दिया जाता है।

इस समय अस्पताल की OPD में काफी भीड़ है। वायरल बुखार से पीड़ित मरीज बड़ी संख्या में अस्पताल पहुँच रहे हैं। इस कारण अस्पताल में काफी भीड़ है। लगभग सभी वार्ड मरीजों से भरे हुए हैं। कोरोना के लिए बनाया गया वार्ड अभी बंद है। उसका इस्तेमाल न होने से अस्पताल में पलंगों की संख्या काफी कम हो गयी है। कई मरीजों को तो गैलरी में इलाज कराना पड़ रहा है। डेंगू और मलेरिया के लिए मानसून की शुरुआत में ही टास्क फाॅर्स बनायीं गयी थी, जो शहर के इलाकों में फोगिंग का काम करवा रही है।

सोमवार को दैनिक भास्कर की टीम जब जिला अस्पताल में पहुंची तो मेडिकल वार्ड का गेट बंद मिला। इसी वार्ड में अंदर ही माइनर ऑपरेशन थिएटर भी बना हुआ है, जहाँ छोटे ऑपरेशन किये जाते हैं। मेडिकल वार्ड का मुख्य दरवाजा बंद था। इसमें एक बड़ा सा छेद हो गया है। मरीज इसी में से निकलते हुए दिखाई दिए। मरीज और उनके साथ आये परिवार वाले इसी छोटे से छेद में से आना-जाना कर रहे थे। मेडिकल वार्ड के लिए दूसरा रास्ता अस्पताल की मुख्य बिल्डिंग में से है जो काफी लम्बा है। मेडिकल वार्ड का मुख्य दरवाजा अस्पताल प्रबंधन द्वारा बंद कर दिया गया है।

पूछताछ केंद्र पर सन्नाटा
कोरोना काल के दौरान अस्पताल में एक पूछताछ केंद्र भी बनाया गया था। मरीजों को किसी प्रकार की जानकारी लेने में कोई दिक्कत न आये, इसलिए यहाँ दो लोगों की ड्यूटी लगायी गयी थी। कुछ दिन तो यहाँ अस्पताल का स्टाफ बैठा, लेकिन उसके बाद यहाँ स्टाफ का बैठना बंद हो गया। 5 महीनो से तो इस पूछताछ केंद्र में कोई नहीं बैठा। इस कारण मरीजों को जानकारी लेने में दिक्कत आती है। सोमवार को भी यह पूछताछ केनंद्र खाली था। उसमे कोई भी स्टाफ नहीं बैठा था।

अस्पताल में बना पूछताछ केंद्र महीनों से पड़ा है बंद
अस्पताल में बना पूछताछ केंद्र महीनों से पड़ा है बंद

नहीं सुधर रहीं व्यवस्थाएं
पिछले दो महीनों में यहाँ प्रभारी मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, पंचायत मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया सहित प्रशासनिक अधिकारी जायजा लेने पहुँच चुके हैं। दो दिन पहले ही कलेक्टर फ्रैंक नोबल भी अस्पताल के निरीक्षण के लिए पहुंचे थे। इन सबके दौरे के समय तो साड़ी व्यवस्थाएं दुरुस्त नजर आती हैं, लेकिन बाद में हालात उसी स्थिति में पहुँच जाते हैं। मेडिकल वार्ड का दरवाजा भी इनके दौरे के समय खोल दिया जाता है, लेकिन उसके बाद फिर बंद कर दिया जाता है। इस मामले में सिविल सर्जन डॉ हर्षवर्धन जैन का कहना है की OT अभी बंद है। अभी वहां काम चल रहा है। गेट टूट गया होगा तो मरीज उसी में से रास्ता बना लिए होंगे। इसे अभी दिखवा लेते हैं।

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