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  • The Road Was Built By Digging The Mountain, The Tehsildar station In charge Caught And Left After Paying A Fine, The Court Took Cognizance, Then After 3 Months FIR Was Registered

सीजेएम कोर्ट नाराज, तब दबी फाइल खुली:पहाड़ को खोदकर सड़क बनाई, तहसीलदार-थाना प्रभारी ने पकड़ा और जुर्माना लगाकर छोड़ा, कोर्ट नेे लिया संज्ञान तब 3 माह बाद एफआईआर दर्ज

गुनाएक महीने पहले
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  • कुंभराज के बिरयाई गांव से राजस्थान तक बन रही सड़क में अवैध खनन कर मिट्‌टी, मुरम का उपयोग किया, अफसरों की मिलीभगत तो देखिए, जब्त पोकलेन कंपनी को वापस दे दी

खनिज माफिया किस कदर पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारियों पर हावी है, इसका एक नमूना कुंभराज क्षेत्र में देखा जा सकता है। खुलेआम किए गए खनन की 3 माह तक एफआईआर नहीं हो सकी। यही वजह है कि एक मामले में कोर्ट नाराज हुई और चेतावनी भरा पत्र पुलिस और कलेक्टर को भी लिख दिया।

दैनिक भास्कर के 4 मार्च के अंक में अवैध खनन के मामले से जुड़ी खबर प्रकाशित की थी। इस पर संज्ञान लेते हुए सीजेएम कौशलेंद्र सिंह भदौरिया ने कलेक्टर को पत्र लिखा है। इसमें कहा है कि पुलिस और राजस्व अधिकारी अवैध खनन के मामले में कार्रवाई न कर एक दूसरे की और टेनिस बॉल की तरफ फेंक रहे हैं, इसलिए आपसे अपेक्षा की जाती है कि इस पर संज्ञान ले ताकि पुनरावृत्ति न हो।

जुर्माने के बाद डायरी सीजेएम कोर्ट नहीं पहुंची तो कोर्ट ने लिया संज्ञान :
कुंभराज में शासकीय भूमि से 2 मार्च को अवैध खनन कर बिरयाई से राजस्थान तक बन रही सड़क में मिट्‌टी-मुरम बिछाई जा रही थी। तहसीलदार मोहित जैन, थाना प्रभारी राम शर्मा एवं अन्य अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की। 1 पोकलेन, 3 डंपर जब्त किए। इसके बाद 98 लाख के जुर्माने का प्रस्ताव कलेक्टर के पास भेज दिया। यह काम जीएसडी बिल्डर्स द्वारा किया जा रहा था।

जब्ती के बाद भी कंपनी के कर्ताधर्ता पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई। जब इस केस से जुड़ी डायरी सीजेएम कोर्ट नहीं पहुंची तो उन्होंने संज्ञान लिया और थाना प्रभारी कुंभराज को 17 जून को पत्र जारी कर आदेश दिया है कि तब कंपी के प्रोजेक्ट मैनेजर सुनील पराची निवासी शाजापुर एवं ठेकेदार गोवर्धन दांगी निवासी राजगढ़ के पर मामाला दर्ज किया गया।

सीजेएम की टिप्पणी... पुलिस और राजस्व अधिकारी कार्रवाई न कर एक दूसरे की और टेनिस बॉल की तरह फेंक रहे हैं

तहसीलदार और थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली शंका के घेरे में
इस पूरे मामले में कुंभराज तहसीलदार मोहित जैन की कार्यप्रणाली शंका में घेरे में आ गई है। अवैध खनन के मामले में जब्त किए पोकलेन और डंपर कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर को ही सुपुर्दगी कर दिए, जबकि थाने में रखे जाने चाहिए।

उच्च न्यायालय के निर्देश हैं कि ऐसे प्रकरण में थाने में खनिज चोरी की धारा में मामला दर्ज कराएं, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। पुलिस भी स्वत: प्रकरण दर्ज कर सकती है, लेकिन थाना प्रभारी कुंभराज राम शर्मा कार्रवाई के दौरान मौजूद थे, लेकिन उन्होंने भी एफआईआर दर्ज नहीं की।

तहसीलदार ने पुलिस के पाले में डाली बात
इस मामले में एफआईआर दर्ज न होने पर सीजेएम ने तहसीलदार मोहित जैन को नोटिस जारी किया तो उन्होंने अपने जवाब में कहा कि अवैध खनन के मामले में कार्रवाई कर दायित्व निभाया, लेकिन मौके पर थाना प्रभारी राम शर्मा, चौकी प्रभारी अजित कुजूर भी थे, उन्हें अपने अधिकारों का प्रयोग कर एफआईआर दर्ज करनी चाहिए थी।

98 लाख के अर्थदंड का प्रस्ताव भेजकर खानापूर्ति
संबंधित कंपनी ने शासकीय भूमि से 6120 घनमीटर खनन किया, जिसकी रॉयल्टी 3 लाख 6 हजार रुपए जमा नहीं की। इस वजह से 50 रुपए के मान से 30 गुना जुर्माना 98 लाख के लगभग अर्थदंड लगना चाहिए थे। खनिज विभाग ने तत्कालीन कलेक्टर के पास प्रस्ताव भेज दिया था, कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं नवागत कलेक्टर को अब आगे की कार्रवाई करनी है।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सीजेएम कौशलेंद्र सिंह भदौरिया ने कलेक्टर फ्रेंक नोबल ए को पत्र लिखा है। इसमें कहा है कि एसडीएम वीरेंद्र सिंह बघेल के निर्देंश पर यह कार्रवाई हुई लेकिन न तो पुलिस ने एफआईआर दर्ज की और न ही तहसीलदार ने संज्ञान लिया। राजस्व एवं पुलिस के अधिकारी मामले को टेनिस बॉल की तरह फेंकते हैं।

वहीं कलेक्टर से अपेक्षा है कि वह उच्च न्यायालय के आदेश अनुसार संबंधित अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी करें। इस तरह पुनरावृत्ति न हो, इससे न्यायालय का अनावश्यक समय व्यय होता है।

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