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  • Three Days Ago The Seized Tractor Was Rescued In Jhanjhun, Now In The Neighboring Village 5 Bullock Carts Filled With Wood Were Caught And Then The Forest Staff Was Beaten Up.

अब दिखे तो काट देंगे:तीन दिन पहले झांझौन में जब्त ट्रैक्टर छुड़ाया, अब पड़ोसी गांव में लकड़ियों से भरीं 5 बैलगाड़ी पकड़ीं तो वन अमले काे पीटा

गुना13 दिन पहले
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  • कुसमान गांव में रेंजर सहित 5 वन रक्षकों को ग्रामीणों की धमकी

आरोन के पास कुसमान गांव में रेंजर सहित वन विभाग के करीब 5 कर्मचारियों के साथ शनिवार शाम मारपीट की गई। यह घटनाक्रम तब हुआ जब विभाग के प्लांटेशन का जायजा लेने के गई इस टीम ने जंगल से काटी गईं लकड़ियों से भरीं 5 बैलगाड़ियों को रोका। इस घटनाक्रम को वन अमले के एक सदस्य ने मोबाइल पर रिकॉर्ड कर लिया था। आरोपियों ने जब यह देखा ताे उन्होंने धमकी देकर वीडियो को डिलीट करवाया।

हालांकि बाद में मोबाइल से यह वीडियो दोबारा रिकवर किया गया। रेंज ऑफिसर सुधीर शर्मा ने समझदारी दिखाते हुए अपनी टीम को वहां से बचाकर निकाला। आरोपियों ने धमकी दी कि अगर उनकी रिपोर्ट दर्ज कराई गई तो यहां आने वाले वन विभाग के कर्मचारियों के छोटे-छाेटे टुकड़े कर दिए जाएंगे। रिपोर्ट के बाद दो दर्जन से ज्यादा वाहनों से पुलिस, राजस्व व वन विभाग की टीम ने उक्त गांव में छापामारी भी की लेकिन ज्यादातर आरोपी फरार हाे चुके थे।
बमोरी के बाद आरोन क्षेत्र में वन अमले पर हमले की घटनाएं बढ़ीं
तीन दिन में ही वन अमले पर दबंगों के हमले की यह दूसरी घटना है। यही नहीं रविवार को जब टीम यहां कार्रवाई करने पहुंची एक ट्रॉली में अवैध सागौन बरामद हुई। वन अमले पर बीते 3-4 साल में दबाव बढ़ा है। खासकर वनभूमि के पट्‌टों को लेकर। बमोरी में 2020 में वन अमले पर हमले, धोंस डपट और जंगल काटने की एक दर्जन से ज्यादा कार्रवाई हुईं, लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते कोई सख्त कार्रवाई नहीं हो पाई।

हिमाकत तो देखिए... पुलिस कार्रवाई के लिए पहुंची सागौन से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली फिर पकड़ी

आप बीती
हम तो प्लांटेशन का जायजा लेने के लिए निकले थे
हम प्रस्तावित और पहले से लगे प्लांटेशन का जायजा लेने के लिए गए थे। दोपहर 2 बजे के आसपास कुसमान के पास हमने 5 बैलगाड़ियां देखीं। उनमें ताजा कटी गई लकड़ियां भरी हुई थीं। हमें देखकर कुछ लोग पहले तो वहां से भाग गए। कुछ ही देर में कई लोग वापस लौटे। उनके पास लाठियां, कुल्हाड़ी आदि थीं। उन्होंने हम पर कुल्हाड़ी तान दी। दो वनकर्मियों को वे जबरन अपने साथ गांव ले गए। हम उनके पीछे-पीछे गए। उन्होंने कुल्हाड़ी तानकर मारपीट भी की।

वे लगातार कह रहे थे कि हमें यहां से नहीं जाने देंगे, क्योंकि हम उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएंगे। इस दौरान एक वनकर्मी ने अपने मोबाइल से वीडियो बनाने की कोशिश की तो लाेग और भड़क गए। एक व्यक्ति कुल्हाड़ी लेकर झपटा। उसने मोबाइल छीन लिया और वीडियो को जबरन डिलीट कराया। करीब डेढ़ से दो घंटे तक हम उन्हें समझाते रहे कि मामला दर्ज नहीं होगा। उन्हाेंने धमकी भी दी कि अगर मामला दर्ज कराया तो यहां प्लांटेशन करने आने वाले अमले को मार दिया जाएगा।
- जैसा कि रेंज ऑफिसर सुधीर शर्मा ने बताया

बेखौफ जंगल माफिया

  • तीन दिन पहले झांझौन में सरपंच प्रतिनिधि जबरन छुड़ा ले गया था ट्रैक्टर-ट्रॉली : आरोन क्षेत्र में जंगल माफिया की गतिविधि पिछले दिनों से अचानक से बढ़ गई है। तीन दिन पहले झांझौन में भी वन अमले को दबंगों का सामना करना पड़ा। विभाग की टीम ने एक ट्रैक्टर-ट्रॉली पकड़ी थी। इसमें वन क्षेत्र से अवैध उत्खनन करके मुरम आदि लाई जा रही थी। इसे जब्त कर लिया गया, लेकिन कुछ ही घंटों में गांव के सरपंच प्रतिनिधि कई लोगों के साथ वन चौकी पहुंचा और ट्रैक्टर छुड़ा लिया।
  • कुसमान में ही पकड़ी गई सागौन से भरी ट्रॉली : वन अमले पर हमले के बाद आरोपियों की धरपकड़ करने जब संयुक्त बल कुसमान जा रहा था तो गांव के पास ही एक ट्रैक्टर-ट्रॉली मिली। उसमें सागौन की बल्लियां भरी हुई थीं। यह भी जंगल कटाई का ताजा मामला ही था।
  • चिंता : इसी गांव के पास 40 एकड़ में प्लांटेशन करना है, अमले की सुरक्षा कौन करेगा

वन विभाग की चिंता यह है कि इसी गांव के पास उसे 40 एकड़ जमीन पर प्लांटेशन करना है। इस काम के दौरान ज्यादातर एक-दो बीट गार्ड ही काम पर भेजे जाएंगे। डर यह है कि कहीं उन पर किसी तरह का हमला न हो जाए। रेंज ऑफिसर का कहना है कि इस तरह के काम में हमेशा बहुत ज्यादा सुरक्षा नहीं दी जा सकती है। हमारे पास भी अमले की कमी है।

2020 : वन विभाग के लिए सबसे ज्यादा विवादों का साल
वन विभाग के लिए 2020 का साल सबसे ज्यादा विवादों का रहा। इस दौरान बमोरी में एक दर्जन से ज्यादा घटनाओं में वन अमले पर हमला, घेराबंदी, बंधक बनाने और धमकाने जैसी घटनाएं हुईं। यह सारा खेल वन अधिकार पट्‌टों को लेकर चला। इसमें वन माफिया ने जंगल की जमीन पर कब्जे के लिए आदिवासी समुदाय को आगे करके पूरा खेल रचा। संयोग से इसी दौरान लोगों के बीच जंगल की जमीन को कब्जे में लेने की होड़ मची। उन्हें यह यकीन था कि इससे उक्त जमीन का पट्‌टा उन्हें हासिल हो जाएगा।

तीन तरह से काम कर रहा है वन माफिया

1. सागौन की तस्करी ... यह माफिया चांचौड़ा, राघौगढ़ के अलावा आरोन, दक्षिणी गुना वन क्षेत्र में सक्रिय है। यहां से सागौन को राजस्थान और विदिशा जिले के इलाकों में ले जाया जाता है। हर साल करीब 2 दर्जन से ज्यादा बार माफिया और वन अमले की भिड़ंत होती है।
2. जंगल की जमीन पर कब्जे : यह समस्या सबसे ज्यादा बमोरी में सामने आ रही है। वनभूमि पर पट्‌टे के कानून की गलत समझ के चलते यह गतिविधियां बीते दो साल से तेज हुईं। यहां दबंग माफिया आदिवासियों व कमजोर तबके के लोगों को आगे करके जंगल की जमीन हथिया रहा है।
3. वन भूमि पर अवैध काम : तीसरी गतिविधि वन भूमि पर अवैध काम की है। यहां पर तालाब, सड़क आदि बना दी जाती हैं। सरकारी कामों के लिए जंगल की जमीन से मुरम, पत्थर आदि की खुदाई भी खूब होती है। इसमें भी राजनीतिक संरक्षण खुलकर मिलता है। ज्यादातर मामले रफा दफा हो जाते हैं।

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