खाद की किल्लत:टोकन वितरण 30 मिनट में, लेकिन खाद लेने के लिए किसानों को लाइन में लगकर करना पड़ रहा इंतजार

चांचौड़ाएक महीने पहले
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खाद लेने के लिए यूरिया वितरण केंद्र पर इस तरह किसानों को भटकना पड़ रहा है। - Dainik Bhaskar
खाद लेने के लिए यूरिया वितरण केंद्र पर इस तरह किसानों को भटकना पड़ रहा है।
  • सोमवार को चांचौड़ा में बीआरसी भवन में यूरिया लेने किसान रात से ही लाइन में लगे फिर भी कई बैरंग लौटे

रबी फसल की बोवनी के लिए किसान खाद के लिए परेशान हो रहे हैं। रोजाना खाद वितरण केंद्रों पर सैकड़ों किसानों की भीड़ लग रही है। चांचौड़ा तहसील में यूरिया खरीदने के लिए किसानों को खासी मशक्कत करना पड़ रहा है। रबी फसलों की बाेवनी के बाद यूरिया के लिए किसानों को परेशान होना पड़ रहा है। धरातल पर किसानों को अभी भी डीएपी खाद पाने के लिए कई-कई दिनों तक जूझना पड़ रहा है। हालात इस कदर अभी तक बदहाल बने हुए हैं कि किसी केंद्र या समिति पर डीएपी खाद होने की भनक लगते ही वहां काफी संख्या में किसानों की भीड़ जमा हो जाती है। भीड़ में महिलाएं भी धक्के खा रही हैं। पुलिस के साए में टोकन वितरण कराए जाने के बाद खाद के इंतजार में किसानों घंटों लाइन में लगे रहते हैं। एक किसान को चार कट्‌टी यूरिया : चांचौड़ा में खाद का वितरण बीआरसी भवन से किया जा रहा है। यहां किसानों के लिए छाया, पानी की भी व्यवस्था नहीं है। एक किसान को चार कट्‌टी यूरिया दिया जा रहा है। किसान निरंजन मीना ने बताया कि यूरिया के कट्‌टी पर दाम 266 रुपए लिखा हुआ है, वहीं इसके 275 रुपए प्रति कट्‌टी के हिसाब से पैसे लिए जा रहे हैं। एक किसान को मात्र चार कट्‌टी दी जा रही। वितरण केंद्रों में पुरुषों के साथ ही महिलाओं की भी यूरिया लेने के लिए पहुंच रही हैं।

बेतहाशा भीड़ उमड़ रही
सोमवार को चांचौड़ा में बीआरसी भवन में यूरिया लेने किसान देर रात से ही पहुंचकर लाइन में लग रहे हैं। यूरिया लेने के लिए वहां किसानों की बेतहाशा भीड़ उमड़ी। धीमी गति से वितरण होने को लेकर अधिकांश किसान से सुबह से अपराह्न तक लाइन में खड़े रहे इनमें कई किसान बगैर खाद पाए वापस लौटे जो सीधे तौर सरकार को कोसते नजर आए।

खेतों में पानी देने के बाद सुबह खाद की लाइन में लग रहे हैं किसान
रबी बाेवनी के सीजन में खाद की किल्लत नासूर बन चुकी है। किसानों में खाद को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। किसान किसी भी हालत में खाद प्राप्तकर बितते सीजन में गेंहूं, सरसाे, बोवनी करने को लेकर सभी स्थिति झेलने को तैयार हैं। किसान खाद के लिए दुकानों एवं वितरण केंद्रों पर देर रात को पहुंचे जाते हैं। सुबह से शाम तक लाइन में लगकर खाद प्राप्त करने के लिए भूखे-प्यासे जूझ रहे हैं। बावजूद किसान को खाली हाथ वापस घर लौटना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि वह 30-30 किमी दूर गांवों से सुबह 5 बजे उठकर खेत के कुओं से उठकर आकर खाद के लिए लाइन में लग जाते हैं।

जान-पहचान वालों को ही दी जा रही है ज्यादा खाद
खाद वितरण केंद्र पर आए किसानों ने बताया कि पुलिस की मौजूदगी में टोकन 30 मिनट में बांट दिए जाते हैं और पुलिस वाले चले जाते हैं। वहीं जान पहचान वालों को प्राथमिकता के आधार ज्यादा कट्‌टे भी दे दिए जाते हैं। किसानों का कहना है कि उन्हें बिजली भी रात में मिलती है। इसलिए देर रात तक जागकर खेतों में से काम करने के बाद सीधे खाद लेने जाना पड़ता है। इधर खादों की ब्लैक मार्केटिंग के साथ ही मिलावटी खाद एवं डुप्लीकेट खाद भी बाजार में बेचे जाने की सूचना से किसान घबराए हुए हैं। किसानों की पीड़ा सर चढ़ कर बोल रही है। किसान बदहवास है। बावजूद प्रशासन मौन है। इस बार जैसी खाद की किल्लत कभी नहीं हुई है। इस संबंध में कृषि अधिकारी केबी सक्सेना ने बताया कि किसान अधिक है और खाद की उपलब्धता कम होने के कारण वितरण में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

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