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जहां पानी ही नहीं रुकेगा वहां तालाब, 5 काे नाेटिस:खेतों में 2 किमी तक पैदल चलकर जल संरचनाएं देखने पहुंचे

गुना17 दिन पहले
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मनरेगा के अधिकांश कामों की अगर मौके पर पड़ताल की जाए तो उनमें कोई न कोई घपला निकल ही आता है। बुधवार को कलेक्टर फ्रेंक नोबल ए. राघौगढ़ की सबसे दूर दराज स्थित पंचायत नागनखेड़ी के गांव सोनखेड़ी पहुंचे। वहां उन्होंने 8 लाख रुपए लागत वाले तालाब को देखा।

पहली नजर में यह बात सामने आ गई कि तालाब ऐसी जगह बना दिया गया, जहां पानी रुकने की संभावना ही नहीं बन रही थी। गुणवत्ता तो खैर खराब थी ही। कलेक्टर ने गांव के लोगों से कहा कि आप लोग चुपचाप क्यों बैठे रहते हैं। यह तालाब आप लोगों के लिए ही बन रहा है। अगर इसमें पानी ही नहीं रुका तो सब बेकार साबित होगा।

आधे से ज्यादा पैसा खर्च
एक ऐसे तालाब जिसमें पानी रुकने की उम्मीद भी न हो, उस पर लागत का 50 फीसदी से ज्यादा खर्च भी हो चुका था। कागज जांचे गए तो पता चला कि 8 में से 5 लाख रुपए तो खर्च ही किए जा चुके हैं। कलेक्टर ने जिला पंचायत सीईओ निलेश पारीख से कहा कि वह तालाब की तकनीकी निगरानी करने वाले आरईएस के एई और सब इंजीनियर के अलावा सरपंच, सचिव और ग्राम रोजगार सहायक को नोटिस जारी करें।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गायब : कलेक्टर भगवतीपुरा गांव भी पहुंचे। वहां पर आंगनबाड़ी केंद्र बंद मिला। पता चला कि गांव में पोषण आहार वितरण भी ठप है। उन्होंने कार्यकर्ता को नोटिस देने को कहा। बाद में वे बारोद पंचायत के बरना गांव भी गए और वहां स्टाप डेम का काम देखा।

आदेश के बाद भी 4 फीट से कम ऊंचे पौधे लगाए
कलेक्टर ने बुधवार को सिंगवासा के सौदर्यीकरण के लिए चल रहे 59 लाख के कामों का जायजा भी लिया। कुछ दिन पहले कलेक्टर ने इस योजना की समीक्षा के दौरान आदेश दिया था कि यहां 4 फीट से कम ऊंचाई वाले पौधे न लगाए जाएं। जब उन्होंने मौके पर जाकर देखा तो पता चला कि वहां ठेकेदार ने छोटे-छोटे पौधे लगा रखे हैं। इस पर कलेक्टर बहुत नाराज हुए।

उन्होंने काम कर रही एजेंसी एसकेएस कंस्ट्रक्शन के जिम्मेदार व्यक्ति को नोटिस जारी करने को कहा। नपा के इंजीनियरों से भी सवाल जवाब किया कि आखिर वे काम की निगरानी क्यों नहीं कर रहे हैं। सिंगवासा पर 4 हजार पौधे लगाए जाने हैं। इनमें से 2200 पौधे अब तक आ चुके हैं और वे सभी मानक के मुताबिक नहीं थे।

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