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34 फीसदी कम बारिश:गेहूं का रकबा 60% घटेगा, कारण 5 बार सिंचाई की जरूरत, इस बार चना-सरसों की अधिक बोवनी

गुना2 महीने पहले
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  • ट्यूबवेल में पानी कम, कुएं, तालाब भी नहीं भरे, इसलिए भू-जल स्तर में गिरावट

बारिश कम होने पर इसका सीधा असर रबी की फसल पर पड़ा है, गेहूं का रकबा घट गया है, पिछले साल के मुकाबले अब तक सिर्फ 46 फीसदी की गेहूं की बुवाई हो पाई है। कम पानी में पैदा होने वाली फसल चना और सरसों की तरफ किसानों का रुझान बड़ा है। पहली बार चने की बोवनी 1.20 लाख और सरसो की 26 हजार हैक्टेयर में हो चुकी है। पिछले साल यह सिर्फ 74 हजार और 9 हजार हैक्टेयर से ज्यादा नहीं थी। कृषि विभाग का कहना है कि बारिश कम हुई है, इस वजह से किसानों ने फैसला लिया है वह सही है। अभी 40 फीसदी बोवनी शेष है, इसलिए चने के लिए अभी अनुकूल समय है। इस बारिश 34 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है, इस वजह से कुएं, तालाब नहीं भरे हैं। भू-जल स्तर गिरा हुआ है। ट्यूबवेल से भी अधिक सिंचाई हो पाएगी। इसलिए कम सिंचाई से पैदा होने वाली उपज से ही किसान लाभ उठा सकते हैं।

700 मिमी बारिश पिछले साल औसत से अधिक दर्ज हुई थी
इस बार कुल औसत बारिश 1053 के मुकाबले 700 मिमी बारिश दर्ज हुई है। यानी 34 फीसदी कम बारिश हुई है। इससे तालाब में भरपूर पानी नहीं है। कुएं भी साथ नहीं दे पाएंगे। यही स्थिति ट्यूबवेल को लेकर होगी। नहरों से भी कई क्षेत्र में सिंचाई होती है। लेकिन डेम खाली होने से इस पर भी असर पड़ेगा। बांधों में कम पानी होने से सिंचाई का रकबा भी घटेगा। इसमें किसी जगह पलेवा के बाद एक या दो पानी ही सिंचाई के लिए मिल सकेगा। सिंचाई विभाग पानी की उपलब्धता के आधार पर ही नहरों में पानी छोड़ेगा। वहीं नदी और तालाबों में पानी न होने से किसान भी सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं।

अभी से हवा फेंकने लगे ट्यूबवेल
गांवों में सिंचाई के दौरान समस्या खड़ी होने लगी है। कई जगह पानी की समस्या है। किसानों का कहना है कि जल स्तर गिरा हुआ है। इस वजह से रुक-रुक का ट्यूबवेल से पानी आता है। वह हवा फेंकने लगे हैं। यही वजह है कि ज्यादातर किसान जिनके क्षेत्र में पानी की समस्या हो सकती है, उन्होंने चने और सरसों की ही बोवनी की है।

इस वजह से चने का बढ़ा रकबा
कृषि उपसंचालक अशोक उपाध्याय का कहना है कि चना और सरसों की फसल में 2 से 3 बार ही सिंचाई की जरूरत पड़ती है। इसी में फसल पककर तैयार हो जाती है। जबकि गेहूं में 5 से 6 बार पानी देना पड़ता है। कम बारिश की वजह से ज्यादा सिंचाई करना मुश्किल है। इसलिए किसानों का गेहूं की जगह चने की तरफ रुझान बढ़ा है। धनिया का भी इस बार रकबा घटा है। इससे गेहूं का रकबा गतवर्ष के 2.10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र के मुकाबले 1 से सवा लाख हेक्टेयर क्षेत्र तक होने का अनुमान है। इस तरह गेहूं का रकबा लगभग 55 से 60 हेक्टेयर घटेगा।

60 फीसदी बोवनी, चने का सबसे ज्यादा रकबा
जिले में इस बार 3 लाख 25 हजार हैक्टेयर में बोवनी का लक्ष्य रखा था। अब तक 60 फीसदी बोवनी हो चुकी है। जिसमें से पिछले साल की तरह इस बार भी 2.10 लाख के लगभग हैक्टेयर में गेहूं की बोवनी का लक्ष्य रखा था। इसके मुकाबले सिर्फ 45 हजार हैक्टेयर में ही गेहूं बोया गया है। इसी तरह पिछले साल के आधार पर देखें तो चना सिर्फ 74 हजार हैक्टेयर में बोया गया था। लेकिन अब तक की स्थिति में यह बढ़कर 1.20 लाख हैक्टेयर बोया जा चुका है। सरसों भी पिछली बार 9 हजार हैक्टेयर में बोई गई थी, जो बढ़कर 26 हजार हैक्टेयर हो चुकी है। अभी 40 फीसदी बोवनी शेष है, इसमें भी किसानों का रुझान चने की तरफ ही है, क्योंकि पानी की कमी देखी जा रही है।

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