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कोरोनाकाल में नवरात्र:एक माह में प्रतिमाओं को तैयार करने के लिए मिट्टी की पतली परत का करेंगे इस्तेमाल

गुना10 दिन पहले
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  • बंगाल से हर साल आने वाले कारीगर इस बार नहीं आ रहे, जबलपुर से भी नहीं मंगाई जा रही हैं प्रतिमाएं

कोरोनाकाल में अब तक होली के अलावा सारे पर्व फीके ही रहे हैं। अब सबसे बड़े त्यौहार सीजन को लेकर भी अनिश्चितता है। प्रदेश सरकार ने कुछ शर्तों के साथ नवरात्र उत्सव सार्वजनिक रूप से मनाने की अनुमति दे दी है लेकिन इसे लेकर आज तक गाइड लाइन जारी नहीं हुई है। इसे लेकर मूर्तिकार और झांकी समितियों के लोग दुविधा में हैं। इस बार बंगाल के कारीगर भी नहीं आए हैं। स्थानीय 7-8 मूर्तिकार ही काम कर रहे हैं। इनमें से एक कमलेश कुमार इटोरिया ने बताया कि पहले उत्सव के लिए प्रतिमा तैयार करने का काम 4 माह पहले शुरू हो जाता था। एक सीजन में एक कलाकार कम से कम 100 प्रतिमा बना लेता था। इस बार 20 से 30 प्रतिमाएं ही बन पाएंगी।

बंगाली समाज ने तय किया सार्वजनिक दुर्गा पूजा नहीं होगी
आमजन की सुरक्षा को लेकर बंगाली समाज ने अहम फैसला किया है। काली बाड़ी समिति बंगाली समाज ने बैठक बुलाई। जिसकी अध्यक्षता शम्मू नाथ मुखर्जी ने की। सर्वसम्मति से तय हुआ है कि पूरे देश में कोरोना महामारी फैली हुई है। इस वजह से गुना में बंगाली समाज सार्वजनिक दुर्गा पूजा नहीं करेगा। लोग घरों में ही पूजा, उपासना करेंगे। देश-विदेश में हुई लाखों लोगों की मौत को लेकर भी दुख जताया और आत्मा की शांति को लेकर मौन रखकर प्रार्थना की इस रोग से दुर्गा मां मुक्ती दिलाएं।

बदलाव : मूर्ति तैयार करने के लिए शॉर्टकट
ज्यादातर मूर्तिकारों ने बीते 15 दिन से तैयारी शुरू की है। कमलेश बताते हैं कि मूर्ति तैयार करने के पुराने तरीके को बदलना पड़ रिहा है। पहले मूर्तियों में मिट्टी की मोटी परत लगाई जाती थी। उसमें भूसा मिलाया जाता था जिससे कि दरार न आए। इस बार मिट्टी की दो पतली परत ही लगाएंगे। दरारें रोकने के लिए टाट का इस्तेमाल होगा। फिनिशिंग के लिए चॉक मिट्टी का भी इस्तेमाल करना पड़ेगा।

मांग : छोटे स्तर की झांकियां कम नहीं होंगी, बड़ी पंडाल नहीं लगेंगे
मूर्तिकारों का कहना है कि ज्यादातर झांकी समितियों की ओर से डिमांड आ रही है। अभी प्रतिमा की ऊंचाई को लेकर कोई गाइड लाइन नहीं आई है लेकिन ज्यादातर लोग 4-5 फीट से ज्यादा ऊंची प्रतिमा की मांग नहीं कर रहे हैं। वहीं बड़े पंडाल इस बार नहीं लगेंगी। कारण इनकी तैयारी एक माह पहले से शुरू हो जाती है। प्रतिमाएं जबलपुर से आती हैं। जाे इस बार संभव नहीं हो पाएगा।

चिंता : प्लास्टर ऑफ पेरिस की प्रतिमाओं से पूरी होगी डिमांड
मिट्‌टी की प्रतिमा बनाने की प्रक्रिया लंबी रहती है और उसके लिए समय भी नहीं है। ऐसे में प्लास्टर ऑफ पेरिस की प्रतिमाएं ज्यादा संख्या में आ सकती हैं। इन्हें आनन-फानन में तैयार किया जा सकता है। पर यह पर्यावरण के लिहाज से ठीक नहीं रहती है। ऐसे समय में जब परंपरागत मूर्तिकारों के पास समय नहीं है तो यह शॉर्टकट ही अपनाया जाएगा।

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