नहीं हो रही कार्रवाई:तलाई और तालाब से लेकर सरकारी जमीनों पर हो रहे अवैध कब्जे

जावर22 दिन पहले
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सरकारी जमीनों के अलावा अतिक्रमण कर्ताओं ने तालाबों को भी नहीं छोड़ा  । - Dainik Bhaskar
सरकारी जमीनों के अलावा अतिक्रमण कर्ताओं ने तालाबों को भी नहीं छोड़ा ।
  • आष्टा की तरह स्थानीय प्रशासन सख्ती से सरकारी जमीनों से हटाए अतिक्रमण

क्षेत्र के तालाब, तलाई हो या फिर शासकीय गोहे हो या फिर सड़कों की साइड की जगह सब जगह लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है। कहीं तो अतिक्रमण वाली जमीन पर लोग खेती कर फायदा भी उठा रहे हैं। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में तो चरनोई की भूमि ही नहीं बची है। इस कारण मवेशी फसलों का नुकसान करते हैं। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन के जिम्मेदार इस तरफ ध्यान नहीं देते हैं। जबकि पिछले दिनों ही आष्टा में प्रशासन ने सख्ती से कार्रवाई करते हुए करोड़ों की भूमि को माफियाओं से मुक्त कराया है। इसी तरह यहां पर भी अतिक्रमणकारियों पर भी कार्रवाई होना चाहिए।
इसके अलावा जहां भी लोगों को खाली शासकीय जमीन दिखती है उसे कब्जे में लेकर अतिक्रमण कर लेते हैं। कुछ लोगों ने तो धंधा तक बना लिया है। पहले जमीन पर कब्जा करते हैं फिर कुछ दिन कब्जा रखते हैं और फिर कब्जे वाली जमीन को बेच देते हैं। लोगों का कहना है कि जिस तरह प्रशासन ने आष्टा के नगर व ग्रामीण क्षेत्र में अतिक्रमण के खिलाफ मुहिम चलाकर शासकीय जमीन को खाली करवाया है। उसी तरह की मुहिम क्षेत्र में भी चलना चाहिए। क्योंकि नगर की सरकारी जमीनों के अलावा तालाबों पर भी अतिक्रमण कर्ताओं ने कब्जा करने से पीछे नहीं हटे हैं। नगर का प्राचीन तालाब लंबे समय से शासन-प्रशासन की उपेक्षा का शिकार हो रहा है। जिसकी जमीन पर हर साल कुछ लोग अतिक्रमण कर खाली जमीन पर फसल की बोवनी कर देते हैं। इस साल भी तालाब की खाली जमीन पर बोवनी कर दी गई है। इसी तरह सरकारी जमीन पर भी खेती की जा रही है। यदि प्रशासन इसकी जांच करें तो करोड़ों की भूमि अतिक्रमण से मुक्त हो सकती है।
करोड़ों की सरकारी जमीन हो सकती है मुक्त : अगर प्रशासन गंभीरता तथा सख्ती से मुहिम चलाए तो नगर व ग्रामीण क्षेत्रों से करोड़ों की कीमत की सरकारी जमीन अवैध कब्जे से मुक्त हो सकती है। गोए की जमीन का रिकॉर्ड खंगाले तो स्थिति स्पष्ट सामने आ जाएगी। इस संबंध में किसान खुमान सिंह का कहना है कि एक समय नगर में सैकड़ों एकड़ शासकीय भूमि हुआ करती थी लेकिन आज हालात उल्टे हैं।
खेत व जंगल के रास्ते भी नहीं छोड़े : शासकीय काकड़ हो या गोए या फिर शासकीय कार्यालयों की जमीन सभी जगह लोगों ने अतिक्रमण कर कच्चे-पक्के निर्माण तक कर लिए हैं। हालत यह हो गई है कि अतिक्रमण करने वालों ने य खेतों या जंगल में जाने तक के रास्ते नहीं छोड़े हैं।
मवेशियों के लिए नहीं बची चरनोई भूमि
इसी तरह नगर में सैकड़ों एकड़ के सरकारी गोए थे। जहां से लोग अपने खेतों वह मवेशियों को जंगल में लाते ले जाते थे, लेकिन आज हालात यह है कि खेतों पर जाने के ठीक से रास्ते नहीं बचे हैं। कई जगह तो शासकीय गोए की जमीन पर लोगों ने अतिक्रमण कर पक्के मकान तक बना लिए हैं।

नोटिस जारी किए हैं
शासकीय जमीन पर कब्जा करने वाले कुछ लोगों को तो नोटिस जारी किए गए हैं और उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है। इसके अलावा क्षेत्र में जल्दी ही अतिक्रमण हटाओ मुहिम शुरू की जाएगी।
रत्नेश श्रीवास्तव, तहसीलदार जावर

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