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ऐतिहासिक धरोहर बदहाल:देवी अहिल्या बाई ने स्टेट के जमाने में बनवाया था घाट, अनदेखी के चलते खस्ताहाल, लोग भी नहीं आते

जीरापुर2 महीने पहले
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  • शिव भक्त देवी अहिल्या बाई ने स्थापित किया था शिव मन्दिर

आजादी के पहले होल्कर स्टेट के शासन के दौरान निर्मित घाट अनदेखी के चलते अपना अस्तित्व ही खो चुके हैं। इन्हें संवारने के लिए न तों प्रशासन आगे आया और न ही जनप्रतिनिधियों ने सुध ली। किसी समय कस्बे की आधी से ज्यादा आबादी इन घाटों पर पहुंचती थी। जीरापुर आजादी के पूर्व होल्कर स्टेट के अधीन था। परम शिव भक्त देवी अहिल्या बाई द्वारा नगर में शिव मन्दिर स्थापित किया। था जो वर्तमान में चौपड़ा बाजार में त्रंयबकेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है। उसी दौरान नगर के पिपल्दा मार्ग पर गागोरनी घाट व खाडी मंदिर के समीप घाट का निर्माण कराया गया था। उस दौरान उक्त घाटो का अपना विशेष महत्व था। नगर के सैकड़ों लोग महिला पुरुष प्रतिदिन इन घाटों पर स्नान करने पहुंचते थे। नदी का पानी वर्षभर भरा रहता था। तीन दशक पहले तक इन घाटों पर चहल-पहल रहतीं थीं। अब वीरान हों गए इन घाटों का अस्तित्व ही समाप्त हो रहा है। नदी में पानी न हाे ने अाैर घाटों पर मिट्टी का भराव होने से उथले हाे गए हैं। इन धरोहरों के विकास की ओर आज तक कोई योजना नहीं बनाई गई। प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों ने इन्हें अस्तित्व में लाने की पहल नहीं की। नगर से छापी नदी गुजरी है जिस पर डेम का निर्माण किया गया। खाडी वाले बालाजी मंदिर के नीचे निर्मित घाट आज भी अपने होने का प्रमाण दें रहा है। धरोहर की सुरक्षा पर नहीं दिया ध्यान जिन प्राचीन घाट पर वर्ष भर पानी जमा रहता था। वह धीरे-धीरे मिट्टी का भराव होता रहा इनके गहरी करण खुदाई मरम्मत पर ध्यान नहीं दिया गया। जिससे घाटो पर मिट्टी जमा हो गई। जिससे इनका वजूद ही समाप्त हो गया। जिन स्थानों पर साल भर बारिश का पानी जमा रहता। वह अब दल दल कीचड़ से सराबोर रहता छापी नदी के इन घाटो के आगे पानी रोकने के लिए स्टाप डेम का निर्माण भी नहीं होने से पानी बहकर निकल जाता है। पिपल्दा रोड पर बने घाट पर अंकित है शिलालेख पिपल्दा रोड पर बने घाट पर आज भी शिलालेख अंकित है। इसके भी जीर्णोद्धार की आवश्यकता है। जबकि‍ गागोरनी घाट, पीली की खदान के पास, पटपड़ा घाट का तों अस्तित्व ही समाप्त हो गया है। पहले नगर में पानी की समस्या होने के कारण लोग स्नान सहित अन्य कार्यों के लिए घाटो पर पहुंचते थें। पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष दिनेश पुरोहित ने अपने कार्यकाल के दौरान घाटों पर वर्ष भर पानी जमा रहे इस उद्देश्य से नगर परिषद द्वारा दो छोटे स्टाप डेम बनाने के लिए प्रस्ताव पारित किया गया था। इसमें खिलचीपुर रोड पर पुलिया के नजदीक व दूसरा गागोरनी घाट के नीचे की आैर परंतु उक्त प्रस्ताव पर अमल नही हो सका। इसी प्रकार डग रोड बालाजी मंदिर के समीप स्थित प्राचीन तालाव पर भी परिषद द्वारा घाट निर्माण की योजना बनाई थी। धार्मिक आस्था का केंद्र है खाड़ी मंदिर खाडी वाले घाट पर स्थित प्राचीन लक्ष्मीनारायण मंदिर, बालाजी मंदिर, शिव मंदिर लोगों की आस्था के केन्द्र हैं। इनमें प्रतिदिन बडी संख्या में दर्शनार्थी पहुंचते है। चारों ओर छाई हुई हरियाली से यह स्थान सुंद हैं। पास ही बने इस प्राचीन घाट के विकास की दरकार है। पूर्व में उक्त घाट पर सामाजिक संगठनों के द्वारा साफ़ सफाई कर गहरी करण ज़रुर किया गया था, परंतु सरकारी प्रयासों के अभाव में जीर्णोद्धार की बडी योजना नहीं बन सकी।

ध्यान देने की जरूरत
प्राचीन काल में बने इन घाटों के कायाकल्प की जरूरत है। इनके रखरखाव पर ध्यान नहीं देने से इनका नामोनिशान मिट गया है लोगों को भी इसमें सहयोग प्रदान करना चाहिए।
-राकेश गुप्ता व्यवसायी

बीस पच्चीस साल पहले तक इन घाटों पर जीरापुर की आधी आबादी स्नान सहित अन्य कार्यों के लिए पहुंचती थी। परन्तु धीरे-धीरे यहां पानी की कमी के कारण लोगों का आना कम हो गया। रखरखाव नही होने से केवल नाम शेष रह गया।
-मोहनलाल वर्मा, सेवानिवृत्त शिक्षक

निश्चित रूप से प्राचीन समय के घाटों का अस्तित्व धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है एक मात्र खाड़ी वाला घाट शेष बचा हुआ है इसके जीर्णोद्धार और कायाकल्प विकास के कार्य वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर परिषद द्वारा योजना बनाई जाएगी।
-हरिओम शर्मा, सीएमओ नगर परिषद

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