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ऑक्सीजन समसस्या:उद्योगों को 4 टन की जरूरत है और मिल रही है ढाई से 3 टन ऑक्सीजन

मंडीदीप2 महीने पहले
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  • ऑक्सीजन की किल्लत खत्म: फिर भी दोगुने दाम पर खरीद रहे हैं

कोरोना महामारी की दूसरी लहर शांत पढ़ने से भले ही अस्पतालों में ऑक्सीजन गैस की मांग कम हो गई हो, परंतु क्षेत्र के उद्योगों को अभी भी गैस की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें जरूरत के अनुसार गैस उपलब्ध नहीं हो पा रही है।

और जितनी गैस मिल रही है वह भी दोगुने दाम पर मिल रही है। गैस की कमी से एक और जहां उद्योग प्रबंधक अपनी क्षमता के अनुसार उत्पादन नहीं कर पा रहे हैं।वहीं दूसरी तरफ ऑक्सीजन महंगी मिलने से उनके प्रोडक्शन कास्ट में भी बढ़ोतरी हो रही है। जिससे उन्हें प्रतिदिन बडी आर्थिक चपत तो लग ही रही है।समय पर ऑर्डर भी पूरा नहीं कर पा रहे हैं।

औद्योगिक क्षेत्र में प्रतिदिन 4 टन ऑक्सीजन गैस की मांग है, परंतु ढाई से तीन टन गैस की पूर्ति ही हो पा रही है। बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर में सबसे अधिक नुकसान ऑक्सीजन आधारित उद्योगों को उठाना पड़ा। कोरोना महामारी में सरकार ने मरीजों को प्राथमिकता देते हुए ऑक्सीजन गैस सप्लायरों को उद्योगों को गैस आपूर्ति बंद कर दी। इसके चलते यहां के प्लांटों से उद्योगों ऑक्सीजन की आपूर्ति पूरी तरह से रोक दी गई। इसका सीधा प्रभाव स्थानीय उद्योगों पर पड़ा।

डीजल के दाम बढ़ने से पड़ा असर: भार्गव कार्बोनिक गैस प्लांट के संचालक सौरभ भार्गव बताते हैं कि ऑक्सीजन गैस के रेट बढ़ने का मुख्य कारण डीजल के दाम बढ़ना है। पिछले साल तक डीजल का रेट 65 रुपए लीटर था जो अब बढ़कर 100 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गया है। ऐसे में जो ऑटो चालक 800 रुपए के डीजल में गैस सिलेंडर सप्लाई कर लिया करते थे, अब उन्हें इसी काम के लिए दो से ढाई हजार रुपए प्रतिदिन खर्च करने पड़ रहे हैं। इसका सीधा प्रभाव ऑक्सीजन के रेट पर पड़ा है।

जरुरत के मुताबिक नहीं मिल रही आक्सीजन: एसोसिएशन ऑफ ऑल इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल का कहना है कि सरकार द्वारा अब तक उद्योगों को पूरी तरह से ऑक्सीजन गैस देने की अनुमति नहीं दी है। इस कारण उद्योगों को थोड़ी बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

21 रुपए की गैस मिल रही 41 रुपए में
फेब्रिकेशन से जुड़े उद्योगों को ऑक्सीजन गैस की कमी का सामना तो करना ही पड़ रहा है, उन्हें इसके लिए दोगुने दाम भी चुकाने पड़ रहे हैं। श्री गंगा इंटरनेशनल कंपनी के डायरेक्टर एके सक्सेना का कहना है कि कोरोना काल के पहले हमें जो गैस 21 रुपए प्रति लीटर मिलती थी, वही गैस आज हमें 41 रुपए प्रति लीटर की कीमत में मिल रही है।

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