किसान को खाद की परेशानी:दो बोरी यूरिया के लिए सुबह 4 बजे से ही लाइन में लगे किसान, फिर भी हाथ खाली

मुंगावलीएक महीने पहले
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शाम 6 बजे के बाद भी खाद नहीं मिलने की बात कहते किसान। - Dainik Bhaskar
शाम 6 बजे के बाद भी खाद नहीं मिलने की बात कहते किसान।
  • 15 दिन से रोजाना आ रहे गोदाम , सुबह 11 बजे रसीद कटती है, शाम 6 बजे के बाद सर्वर डाउन

खरीफ सीजन की फसल बर्बाद होने के बाद अब किसान रबी सीजन की फसल में खाद के लिए परेशान हो रहे हैं। दो बोरी खाद के लिए किसान सुबह 4 बजे से गोदाम पर आकर लाइन में लग जाते हैं। इसके बाद भी कई किसानों को शाम तक खाद नहीं मिल पाती है। इससे भूखे प्यासे किसान मायूस होकर वापस अपने घरों को लौट जाते हैं। क्षेत्र में इस साल पिछले साल की अपेक्षा अधिक खाद आने के बाद भी किसान खाद के लिए परेशान हैं। आज भी दो बोरी खाद के लिए किसान घंटों लाइन में लग रहे हैं। खाद के लिए क्षेत्र के ग्रामीण अंचल से किसान सुबह 4 बजे से आकर लाइन में लग जाते हैं। इसके बाद सुबह 11 बजे रसीद कटना शुरू होने के बाद उन्हें खाद मिल पाती है। शाम 6 बजे के बाद सर्वर डाउन हो जाता है और खाद बंटना बंद हो जाता है। इससे कई किसान खाद मिलने से वंचित रह जाते हैं। और मायूस होकर वापस अपने गावं लौट जाते हैं।

दोपहर 12:30 बजे से खाद बंटना शुरू होती है
ग्राम गीला रोपा के सरदार सिंह ने बताया कि सुबह से लाइन में लगा हूं आज पहली बार खाद लेने आया हूं सुबह से लाइन में खड़ा हूं कमर भी दर्द कर रही है यह लोग 12:30 बजे के बाद आकर खाद बांटना चालू करते हैं। इससे शाम हो जाती है शाम होते होते खिड़कियां बंद हो जाती हैं। कई किसानों ने बताया कि सुबह 11 बजे से खाद बांटना शुरू करना चाहिए। ग्राम गीला रोपा के सरदार सिंह ने बताया कि सुबह से लाइन में लगा हूं आज पहली बार खाद लेने आया हूं सुबह से लाइन में खड़ा हूं कमर भी दर्द कर रही है यह लोग 12:30 बजे के बाद आकर खाद बांटना चालू करते हैं। इससे शाम हो जाती है शाम होते होते खिड़कियां बंद हो जाती हैं। कई किसानों ने बताया कि सुबह 11 बजे से खाद बांटना शुरू करना चाहिए।

सुबह 4:30 बजे से आग जलाकर ताप रहे हैं
खाद लेने के लिए आए बृजमोहन अहिरवार ने बताया कि सुबह 4:30 से ठंड में यहां आग जलाकर ताप रहे हैं। दिन भर से भूखे प्यासे बैठे हैं घर से कलेऊ तक करके नहीं आए ना खाना खाया है शाम 6:00 बजे 60 व्यक्ति शेष रह गए थे। जहां सरवर का बहाना बनाकर खिड़कियां बंद कर दी। इससे किसानों को खाद के लिए परेशान होना पड़ा।

किसानों ने सुनाई व्यथा
जाखलौन पठारी के किसान राम सिंह कटारिया ने बताया कि सुबह से लाइन में लगे हैं। लेकिन दो बोरी भी खाद नहीं मिली। ग्राम बिजली के गजराम सिंह ने बताया कि सुबह से खाना नहीं खाया है। यूरिया खाद वितरण सुबह 11 बजे से चालू कर देना चाहिए। दिन छोटे होते हैं। 6 बजे तक अंधेरा होने लगता है। वितरण खिड़कियां बंद हो जाती है। इससे किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। ग्राम लप्तोरा के अरविंद दांगी ने बताया कि मेरे पास 48 बीघा जमीन है सुबह 8:00 से लाइन में लगे हैं। कई लोग बीच में लग जाते हैं वो कुछ वितरण करने वालों के परिचित लोग आ जाते हैं जो इधर उधर से पर्ची बनवा कर अपने खाद ले जाते हैं और हम लाइन में धक्का खाते रहते हैं। ग्राम साजन मऊ के राजेंद्र सिंह यादव ने बताया कि 12 बीघा जमीन है आज तक 2 बोरी यूरिया भी नहीं मिल पाई है लगभग 15 दिनों से लगातार आ रहे हैं।

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