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कोरोना का असर:जिला एक जून से अनलाॅक फिर भी सवारियों का टोटा होने से नहीं चल पा रही हैं कई बसें

नसरुल्लागंजएक महीने पहले
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  • बस संचालकों का मानना है कि डीजल के दोमों में मूल्य वृद्धि ने खर्चों को बढ़ाया

नगर सहित संपूर्ण जिले में 1 जून से अनलॉक के तहत गतिविधियां तो शुरू हो चुकी हैं लेकिन यात्री बसों का संचालन एक पखवाड़े से अधिक का समय बीतने के बाद भी पूरी तरह से शुरू नहीं हो पाया है। इसके चलते कई यात्रियों को अभी भी यात्रा करने के लिए बसों का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

एक अनुमान के मुताबिक बस स्टैंड से इस समय लगभग 30 बसों का संचालन ही हो पा रहा है जिसके कारण बसों के आने जाने के समय में अंतर होने से यात्रियों को सफर करने के लिए बस स्टैंड पर बैठकर ही इंतजार करना पड़ रहा है। पहले नगर के बस स्टैंड से प्रतिदिन 80 से 100 बसों के बीच आवागमन होता था।

लेकिन अब यह स्थिति 25 से 30 बसों पर आकर ही सिमट गई है। बस संचालक डीजल की तेज गति के साथ हुई मूल्य वृद्धि एवं कोरोना कर्फ्यू के चलते यात्री बसों में उम्मीद के मुताबिक सवारी नहीं मिलना सबसे बड़ा कारण बता रहे हैं।

अभी भी सफर करने से डर रहे लोग: कोरोना संक्रमण काल के चलते इस वर्ष सरकार ने तो आवागमन पर प्रतिबंध नहीं लगाया था लेकिन बड़े-बड़े शहरों में विशेषकर इंदौर भोपाल में कोरोना कर्फ्यू का सख्ती से पालन कराने के लिए बाजार पूरी तरह बंद हैं। ऐसी ही स्थिति प्रदेश के अन्य सभी शहरों में देखने को मिल रही थी।

कई लोग अभी सफर करने से भी डर रहे हैं। ऐसे में सवारी नहीं मिलने के चलते बस संचालकों ने अपनी बसों को अभी भी खड़ा कर रखा है। हालांकि कुछ यात्री बसें चल रही हैं लेकिन उन्हें भी मुश्किल से सवारियां मिल पा रही हैं। अनलॉक किए जाने के बावजूद भी अभी भी सामान्य रूप से जिंदगी नहीं लौट सकी है और इसका सीधा असर यात्री बसों के संचालन पर देखने को मिल रहा है।

अभी आधी बसें भी नहीं चलीं: नगर सहित जिले की बात करें तो सभी जगह अभी पहले की तुलना में आधी बसें भी नहीं चल पा रही हैं। कुछ बस संचालकों ने बसें तो शुरू कर दी हैं लेकिन उन्हें अभी भी सामान्य तरह से सवारियां नहीं मिल पा रही हैं जिसके कारण मात्र 30 यात्री बसें ही सड़कों पर देखने को मिल रही हैं।

नगर से इंदौर, सीहोर, हरदा, होशंगाबाद, भोपाल, बैतूल, देवास, उज्जैन मार्ग पर हर घंटे में बस चलती थी लेकिन लेकिन अब स्थिति ठीक इसके उलट हो चुकी है। पहले जहां एक स्टेशन के लिए 12 से 15 बसों का आवागमन होता था वहीं अब 4 से 5 बसें ही सड़कों पर दिखाई दे रही हैं। वर्तमान में अभी भी बसों में यात्रियों का टोटा आसानी से देखा जा सकता है।

इस संबंध में बस संचालक मनोज खंडेलवाल, चंद्रकांत वर्मा, संजय राय, गज्जू सोनी का कहना है कि कोरोना कर्फ्यू के कारण चाहे सरकार ने आवागमन पर रोक नहीं लगाई हो लेकिन यात्रियों के अभाव में उन्हें बसों का संचालन बंद रखना पड़ा है। ऐसे में सरकार द्वारा टैक्स माफ किया जाना चाहिए जिससे उन्हें हो रहे आर्थिक नुकसान सरकार का सहारा मिल सके।

सरकार को कम से कम 6 माह का टैक्स माफ करना चाहिए। डीजल के दामों में लगातार हो रही मूल्यवृद्धि को ध्यान में रखते हुए एक बार फिर किराए में बढ़ोतरी की जाना चाहिए। सरकार के द्वारा जो बढ़ोतरी पिछले दिनों की गई वह नाकाफी है।

डीजल मूल्यवृद्धि ने बिगाड़ा गणित
यात्री बसों का गणित डीजल की लगातार हो रही मूल्य वृद्धि ने भी बिगाड़ दिया है। वैसे ही इस समय सवारियां नहीं मिल रही हैं वहीं डीजल के दामों में वृद्धि होने से बसों के खर्चों में इजाफा हो चुका है। पहले जहां डीजल 68 से 70 रुपए प्रति लीटर के दाम पर चल रहा था तो वहीं अब इसके दाम बढ़कर सीधे 95 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गए हैं। डीजल के दामों में हुई वृद्धि से बसों के खर्चों में तो इजाफा हुआ लेकिन यात्रियों का टोटा होने से उन्हें नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। कई बस संचालकों का मानना है कि अभी भी उनके खर्च पूरी तरह नहीं निकल पा रहे।

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