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स्वच्छता सर्वे होल्ड:तैयारियों पर खर्च 100 करोड़ से ट्रांसफर स्टेशन जैसे कई काम हुए

भोपालएक महीने पहले
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9 महीने से तैयारी में लगे थे निगम के 8000 अधिकारी और कर्मचारी। - Dainik Bhaskar
9 महीने से तैयारी में लगे थे निगम के 8000 अधिकारी और कर्मचारी।
  • निगम को 105 करोड़ की जमीन मिली, सीएनजी और ड्राय वेस्ट से रॉयल्टी भी मिलेगी

आखिरकार स्वच्छ सर्वे-2021 को होल्ड कर दिया गया है। केंद्र सरकार ने कोरोना संक्रमण को देखते हुए सभी सर्वे फिलहाल रोकने की सूचना नगर निगम को भेज दी है। भोपाल में स्वच्छ सर्वे के 3 पार्ट में से 2 पार्ट पूरे हो चुके थे। वाटर प्लस का सर्वे अभी बाकी था, लेकिन सर्वे की मैथडोलॉजी ऐसी बनी हुई है कि तीनों आपस में जुड़े हुए हैं। वाटर प्लस मिलने पर ही सेवन स्टार रेटिंग हो सकती है और मुख्य सर्वे में भी वाटर प्लस और सेवन स्टार के अलग-अलग नंबर हैं।

निगम ने स्वच्छ सर्वे के संसाधन जुटाने के लिए लगभग 100 करोड़ रुपए खर्च किए और पिछले 9 महीने से लगभग 8000 अधिकारी और कर्मचारी इसमें जुटे हुए थे। सर्वे भले ही टल गया हो, लेकिन सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए शहर को कुछ नई सुविधाएं भी मिल गई हैं। स्वच्छ सर्वे पर शुरू से ही कोरोना संक्रमण का साया था। स्वच्छ सर्वे-2020 का रिजल्ट भी अगस्त 2020 में जारी हो पाया था, क्योंकि मार्च के अंतिम हफ्ते से देशभर में लॉकडाउन लग गया था।

यह संसाधन और बढ़े

  • ट्रांसफर स्टेशन से आदमपुर खंती तक कचरा ले जाने वाले कैप्सूल वाहन 43 से 68 हो गए।
  • डोर टू डोर कचरा कलेक्शन के वाहन 451 से 469 हो गए।
  • स्वीपिंग व्हीकल 126 से 202 हो गए।
  • सीवेज क्लीनिंग मशीन 19 से बढ़कर 26 हो गईं।
  • सफाई कामगारों की संख्या 6365 से बढ़ कर 7617 हो गई।
  • सूखा कचरा अलग करने वाले एमआरएफ सेंटर 7 से 9 हो गए।

15 करोड़ से 7 नए ट्रांसफर स्टेशन बने

स्वच्छ सर्वे की तैयारी के लिए इस साल शहर में 5 नए ट्रांसफर स्टेशन बनाए गए। इन पर कुल 15 करोड़ रुपए खर्च हुए। अभी दो ट्रांसफर स्टेशन और तैयार होना है, इनकी लागत 6 करोड़ रुपए होगी। हालांकि इन ट्रांसफर स्टेशन के बन जाने से डोर टू डोर कचरा कलेक्शन की व्यवस्था में सुधार हुआ है।

आदमपुर में बन रहा है बायो सीएनजी प्लांट

आदमपुर छावनी में पीपीपी मोड पर 300 मैट्रिक टन कचरे से बायो सीएनजी बनाने का प्लांट तैयार हो रहा है। लागत 30 करोड़ है, लेकिन इसमें 10.50 करोड़ यूनीडो का अनुदान शामिल है। इससे निगम को हर साल 61 लाख रुपए रॉयल्टी मिलेगी। इधर, एनटीपीसी भी यहां मिक्स कचरे से चारकोल निर्माण का प्लांट लगा रही है।

भानपुर खंती की सफाई, 21 एकड़ जमीन मिली

शहर की 50 साल पुरानी भानपुर खंती का रेमिडेशन पूरा हो गया। इस पर 52 करोड़ खर्च हुए, हालांकि इससे निगम को 21 एकड़ जमीन मिली है। इसकी कलेक्टर गाइडलाइन से ही कीमत 105 करोड़ है। इधर, पिछले साल सितंबर से सर्वे में लगे 8 हजार कर्मचारियों के वेतन पर हर महीने लगभग 13 करोड़ खर्च होते हैं।

30 करोड़ से बन रही साइंटिफिक लैंडफिल साइट

आदमपुर छावनी पर साइंटिफिक लैंडफिल साइट बनाने और वहां पड़े कचरे को साफ करने पर लगभग 30 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। अभी 5 एकड़ में लैंडफिल साइट तैयार हो गई है। एमआरएफ से निगम को हर साल 38 लाख रुपए की रॉयल्टी भी मिलेगी।

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